सर्द रातों में खुले आसमान तले सोने को मजबूर लोग, नहीं बना रैन बसेरा
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फर्रुखाबाद में ठंड बढ़ी, नगर पालिका की लापरवाही उजागर
संवाददाता, संवाद 24 | फर्रुखाबाद
कड़ाके की सर्दी के बावजूद नगर पालिका द्वारा अब तक रैन बसेरा शुरू न किए जाने से गरीब और बेघर लोग खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को मजबूर हैं। रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन और शहर के प्रमुख स्थलों पर लोग ठिठुरती रातों में ठंड से बचने के लिए चादर ओढ़े फर्श और बेंचों पर सोते दिखाई दे रहे हैं।
हर साल सर्दी की शुरुआत में नगर पालिका अस्थायी रैन बसेरे बनवाती थी, ताकि गरीब, मजदूर और राहगीर ठंड से बच सकें। लेकिन इस बार नवंबर आधा बीत जाने के बावजूद अब तक कोई व्यवस्था नहीं की गई है। न तो रेलवे स्टेशन परिसर में और न ही बस अड्डे पर किसी प्रकार की राहत व्यवस्था की गई है।
रेलवे स्टेशन के टिकट घर के पास यात्री परिवार, महिलाएं और छोटे बच्चे रात में ठंड से कांपते हुए दिखाई दे रहे हैं। कई लोग अपने सामान के साथ प्लेटफॉर्म और चौक क्षेत्रों में जमीन पर सोने को मजबूर हैं।
यात्रियों का कहना है कि “सर्दी बढ़ने के बावजूद रैन बसेरा नहीं खुला। न ही नगर पालिका की ओर से कोई कंबल या अलाव की व्यवस्था की गई है। रात में ठंड से बचने के लिए चाय की दुकानों पर आग सेकना ही एकमात्र सहारा है।”
नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी विवेक कुमार ने बताया कि “रैन बसेरे हर साल ठंड बढ़ने पर सक्रिय किए जाते हैं। इस वर्ष भी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और जल्द ही अलाव एवं रैन बसेरे की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।”
संवाद 24 टिप्पणी:
ठंड का मौसम शुरू होते ही रैन बसेरा और अलाव व्यवस्था गरीबों के लिए जीवन रक्षक साबित होती है। प्रशासन और नगर पालिका को चाहिए कि वे समय रहते इन व्यवस्थाओं को सक्रिय करें, ताकि कोई भी नागरिक सर्दी में खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर न हो।






