असुरक्षित वाहनों में सफर कर रहे नौनिहाल, जिम्मेदारों की अनदेखी से बढ़ रहा खतरा
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फर्रुखाबाद / संवाददाता — शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक स्कूली बच्चों को असुरक्षित वाहनों में ले जाने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। निर्धारित मानकों की अनदेखी करते हुए ऑटो, वैन और टेंपो में क्षमता से अधिक बच्चों को ठूंसकर रोजाना स्कूल भेजा जा रहा है। विभागीय जिम्मेदार और परिवहन अधिकारी इस खतरनाक प्रवृत्ति पर आंखें मूंदे बैठे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों से शहर के निजी स्कूलों तक बच्चों को पहुंचाने के लिए अवैध रूप से संचालित वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं। अधिकांश वाहनों में न तो सीट बेल्ट हैं, न ही सुरक्षा के अन्य प्रबंध। कई ऑटो और वैनों में बच्चों को गेट पर लटकते हुए देखा जा सकता है। अभिभावक भी मजबूरी में इन वाहनों का सहारा ले रहे हैं क्योंकि सुरक्षित और नियमित स्कूल बसों की संख्या बहुत कम है।
परिवहन विभाग के अनुसार जिले में 485 स्कूल वैनें पंजीकृत हैं, जिनमें से केवल 115 वैनें फिटनेस प्रमाणपत्र के साथ संचालित हो रही हैं। शेष वाहनों का संचालन बिना अनुमति और सुरक्षा जांच के किया जा रहा है। यह स्थिति बच्चों की सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है।
बीते सोमवार को सुबह स्कूल के समय सड़कों पर भारी संख्या में ऐसे वाहन देखे गए जिनमें बच्चों को ठूंस-ठूंसकर बैठाया गया था। कई स्थानों पर ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग के कर्मचारी मौजूद रहने के बावजूद इन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूली वाहनों के लिए सख्त निगरानी और नियमित फिटनेस जांच अनिवार्य की जानी चाहिए। वाहन चालकों के सत्यापन से लेकर स्पीड गवर्नर और सीसीटीवी कैमरे जैसी सुरक्षा व्यवस्थाएं हर वाहन में होनी चाहिए।
शहरवासियों ने जिला प्रशासन और परिवहन विभाग से अपील की है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी इस गंभीर लापरवाही पर तत्काल रोक लगाई जाए और दोषी चालकों एवं वाहन मालिकों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।






