351 रुपये क्विंटल तक लुढ़के आलू के दाम, फर्रुखाबाद के किसान चिंता में
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संवाद 24 संवाददाता। फर्रुखाबाद की सातनपुर आलू मंडी में नए आलू के दाम किसानों की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पा रहे हैं। लगातार बढ़ती आवक के बीच गुरुवार को आलू 351 से 521 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से बिका, जो किसानों की लागत निकालने के लिए नाकाफी साबित हो रहा है। नतीजतन, मंडी में पहुंचे उत्पादकों में गहरी निराशा देखी गई।
मंडी सूत्रों के अनुसार, सातनपुर मंडी में इन दिनों आलू की आवक तेज है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और ट्रकों से आलू बिक्री के लिए पहुंच रहा है। गुरुवार को लगभग 100 ट्रक आलू मंडी में आए, जिससे आपूर्ति दबाव और बढ़ गया। अधिक आवक के कारण बोली कमजोर रही और भाव में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका।
किसानों का कहना है कि मौजूदा दामों पर बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी और ढुलाई की लागत भी नहीं निकल पा रही है। सिलसंडा से आए एक किसान ने बताया कि उनका आलू 431 रुपये प्रति क्विंटल में बिका, जिससे प्रति बीघा करीब 5,000 रुपये का नुकसान झेलना पड़ रहा है। वहीं नवाबगंज के वीरेंद्र सिंह ने कहा कि चार एकड़ में अच्छी पैदावार के बावजूद कम भाव ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया है।
पखना के शैलेंद्र कुमार के अनुसार, एक बीघा में औसतन 45 पैकेट आलू की पैदावार हुई है, लेकिन मौजूदा कीमतों पर कुल लागत की भरपाई नहीं हो पा रही। किसानों का मानना है कि यदि जल्द भाव में सुधार नहीं हुआ तो नुकसान और बढ़ेगा।
किसानों की चिंता इसलिए भी बढ़ी हुई है क्योंकि भाव में सुधार न होने की स्थिति में शीतगृहों में भंडारण के लिए प्रतिस्पर्धा तेज हो सकती है। वर्ष 2024 के दिसंबर के अंतिम सप्ताह में नया आलू 1,700 से 1,800 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से बिका था, तब कई किसानों ने भंडारण की बजाय सीधे बिक्री को प्राथमिकता दी थी। इस बार परिदृश्य उलट है और किसान मजबूरी में कोल्ड स्टोरेज का रुख कर रहे हैं।
कुल मिलाकर, सातनपुर मंडी में आलू के कमजोर दाम किसानों के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। किसान संगठन और उत्पादक जल्द ही बाजार में हस्तक्षेप, निर्यात प्रोत्साहन या सरकारी खरीद जैसे उपायों की मांग कर सकते हैं, ताकि गिरते भाव से राहत मिल सके और उत्पादन लागत की भरपाई सुनिश्चित हो।






