
एक और हत्या, वही सन्नाटा: क्या हिंदुओं का खून वैश्विक अंतरात्मा को नहीं झकझोरता? चयनात्मक संवेदना का युग, कुछ मौतें सुर्ख़ियाँ, कुछ आँकड़े।
संवाद 24 संजीव सोमवंशी। बांग्लादेश में एक हिंदू युवक की नृशंस हत्या केवल एक अपराध नहीं, बल्कि एक वैश्विक नैतिक विफलता का प्रतीक है। सवाल सीधा है जब-जब हिंदुओं को उनकी पहचान के कारण मारा जाता है, तब दुनिया चुप…














