
वैदिक पंचांग
अंग्रेजी दिनांक – 17 अक्टूबर 2026, शनिवार
कालगणना
युगाब्द – 5128
विक्रम संवत् – 2083
शक संवत् – 1948 (पराभव)
सम्वत्सर – रौद्र
अयन – दक्षिणायन
ऋतु – शरद
मास, पक्ष एवं वार विवरण
मास – आश्विन (अमांत), आश्विन (पूर्णिमांत)
पक्ष – शुक्ल
तिथि – सप्तमी पूर्ण रात्रि
वार – शनिवार
नक्षत्र, योग एवं करण
नक्षत्र – मूल प्रातः 09:47 AM तक, तत्पश्चात् पूर्वाषाढ़ा
योग – अतिगण्ड रात्रि 11:02 PM तक, तत्पश्चात् सुकर्मा
करण – गर सायं 07:13 PM तक, तत्पश्चात् वणिज
सूर्य, काल एवं मुहूर्त
सूर्योदय – 06:12 AM
सूर्यास्त – 05:41 PM
चन्द्रोदय – 12:09 PM
चन्द्रास्त – 10:29 PM
चन्द्र राशि – धनु
अभिजित मुहूर्त – 11:34 AM से 12:19 PM तक
विजय मुहूर्त – 01:51 PM से 02:37 PM तक
अशुभ काल
राहुकाल – 09:04 AM से 10:30 AM तक
यमगण्ड – 01:23 PM से 02:49 PM तक
गुलिक काल – 06:12 AM से 07:38 AM तक
दुर्मुहूर्त – 06:12 AM से 06:58 AM तक एवं 06:58 AM से 07:44 AM तक
कंटक – 11:34 AM से 12:19 PM तक
शुभ चौघड़िया
शुभ – 07:38 AM से 09:04 AM तक
चर – 11:57 AM से 01:23 PM तक
लाभ – 01:23 PM से 02:49 PM तक
अमृत – 02:49 PM से 04:15 PM तक
दिशाशूल एवं यात्रा विचार
दिशाशूल – पूर्व
यात्रा उपाय – शनिवार को पूर्व दिशा की यात्रा टालें। यदि अनिवार्य हो, तो अदरक या उड़द खाकर अथवा श्री हनुमान चालीसा का पाठ करके प्रस्थान करें।
व्रत-पर्व एवं विशेष योग
शारदीय नवरात्रि (सप्तम दिवस – माँ कालरात्रि पूजन) एवं महासप्तमी
आश्विन शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को माँ दुर्गा के सातवें स्वरूप ‘माँ कालरात्रि’ की उपासना की जाती है। माँ कालरात्रि काल का नाश करने वाली और सभी प्रकार के भय, शत्रु व नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने वाली देवी हैं। इनका स्वरूप अत्यंत भयानक होने पर भी यह अपने भक्तों को सदैव शुभ फल देती हैं, इसलिए इन्हें ‘शुभंकरी’ भी कहा जाता है। आज के दिन पत्रिका प्रवेश और नवपत्रिका पूजा का भी विशेष विधान होता है।
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र एवं शनि-हनुमान पूजन
प्रातः 09:47 तक मूल (गंडमूल) नक्षत्र रहेगा, तत्पश्चात् पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र प्रारंभ होगा। पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के स्वामी शुक्र देव और अधिपति ‘आपः’ (जल के देवता) हैं। यह नक्षत्र विजय, सफलता, दृढ़ निश्चय और वैभव का प्रतीक है। शनिवार का दिन होने से शनि देव और श्री हनुमान जी की पूजा समस्त संकटों और साढ़ेसाती के कष्टों से मुक्ति दिलाएगी।
विशेष ज्योतिषीय विश्लेषण
आज चन्द्रमा पूरे दिन-रात देवगुरु बृहस्पति की राशि धनु में संचरण करेंगे, जिससे बौद्धिक, धार्मिक और दार्शनिक कार्यों में प्रगति होगी। प्रातः 09:47 तक मूल शांति का विचार रखना चाहिए। रात्रि 11:02 तक अतिगण्ड योग रहेगा, अतः नए सांसारिक कार्यों के आरंभ में सावधानी बरतें।

आज का राशिफल – 17 अक्टूबर 2026 शनिवार
मेष (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
नवम भाव में चन्द्रमा भाग्य का पूर्ण सहयोग दिलाएगा। धर्म-कर्म और आध्यात्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में प्रयासरत जातकों को सफलता प्राप्त होगी।
उपाय – माँ कालरात्रि को गुड़ या गुड़ से बनी मिठाई का भोग लगाएं।
वृषभ (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
अष्टम भाव में चन्द्रमा के प्रभाव से सेहत और खानपान पर विशेष ध्यान दें। वाहन सावधानी से चलाएं और अनचाहे विवादों से दूरी बनाए रखें। जोखिम भरे वित्तीय फैसले न लें।
उपाय – पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
मिथुन (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह)
सप्तम भाव में चन्द्रमा दाम्पत्य जीवन में सुख और आपसी सौहार्द बढ़ाएगा। साझेदारी के व्यापार में उत्तम लाभ होगा। सामाजिक जीवन में सम्मान और प्रतिष्ठा बढ़ेगी।
उपाय – शनि चालीसा का पाठ करें और काले तिल का दान करें।
कर्क (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
षष्ठ भाव में चन्द्रमा विरोधियों और प्रतिस्पर्धियों पर आपका वर्चस्व स्थापित करेगा। नौकरीपेशा लोगों को परिश्रम का पूरा फल मिलेगा। पुराने कर्जों और रोगों से राहत मिलेगी।
उपाय – शिवलिंग पर जल में काले तिल मिलाकर अर्पित करें।
सिंह (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
पंचम भाव में चन्द्रमा बौद्धिक क्षमता में वृद्धि करेगा। विद्यार्थियों को अध्ययन और शोध में सफलता मिलेगी। संतान पक्ष से शुभ समाचार मिलेगा और रचनात्मक कार्यों में प्रगति होगी।
उपाय – हनुमान जी को चमेली का तेल और सिन्दूर अर्पित करें।
कन्या (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
चतुर्थ भाव में चन्द्रमा पारिवारिक सुख-साधनों पर ध्यान केंद्रित रखेगा। भूमि, भवन या वाहन से जुड़ा काम आगे बढ़ सकता है। माताजी के स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें।
उपाय – भगवान गणेश को 21 दूर्वा अर्पित करें।
तुला (रा, री, रू, रे, रो, ता, टी, तू, ते)
तृतीय भाव में चन्द्रमा आपके पराक्रम और साहस में वृद्धि करेगा। मित्रों और भाई-बहनों का भरपूर सहयोग मिलेगा। छोटी लेकिन अत्यंत लाभकारी यात्राओं के योग बन रहे हैं।
उपाय – किसी निर्धन व्यक्ति को काले वस्त्र या भोजन दान करें।
वृश्चिक (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
धन भाव में चन्द्रमा आर्थिक स्थिति को मजबूती प्रदान करेगा। अटका हुआ धन वापस आने की संभावना बनेगी। परिवार में उत्सव जैसा माहौल रहेगा और वाणी से लाभ होगा।
उपाय – सुंदरकांड का पाठ करें या हनुमान चालीसा पढ़ें।
धनु (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
चन्द्रमा आपकी ही राशि में गोचर कर रहे हैं, जिससे मानसिक स्पष्टता और निर्णय शक्ति मजबूत होगी। व्यक्तित्व में आकर्षण बढ़ेगा और सोचे हुए कार्य पूरे होंगे।
उपाय – मस्तक पर केसर या हल्दी का तिलक लगाएं।
मकर (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
द्वादश भाव में चन्द्रमा के प्रभाव से धार्मिक व सामाजिक कार्यों में धन व्यय होगा। दूरस्थ संपर्कों और विदेश से जुड़े मामलों में प्रगति होगी। सेहत का ध्यान रखें।
उपाय – शमी वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
कुंभ (गु, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
एकादश भाव में चन्द्रमा आय के नए साधन निर्मित करेंगे। वरिष्ठ सहयोगियों और मित्रों से पूरा समर्थन मिलेगा। व्यावसायिक विस्तार के लिए दिन उत्तम है।
उपाय – काले कुत्ते को तेल चुपड़ी रोटी खिलाएं।
मीन (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
दशम भाव में चन्द्रमा कार्यक्षेत्र में आपकी प्रतिष्ठा और प्रभाव में वृद्धि करेगा। उच्चाधिकारियों का समर्थन मिलेगा। व्यापार में नए प्रोजेक्ट्स मिलने के उत्तम योग हैं।
उपाय – भगवान शिव का जलाभिषेक करें और ‘ॐ नमः शिवाय’ का जप करें।
॥ शुभम भवतु ॥

