
वैदिक पंचांग
अंग्रेजी दिनांक – 08 अक्टूबर 2026, गुरुवार
कालगणना
युगाब्द – 5128
विक्रम संवत् – 2083
शक संवत् – 1948 (पराभव)
सम्वत्सर – रौद्र
अयन – दक्षिणायन
ऋतु – शरद
मास, पक्ष एवं वार विवरण
मास – भाद्रपद (अमांत), आश्विन (पूर्णिमांत)
पक्ष – कृष्ण
तिथि – त्रयोदशी रात्रि 10:17 PM तक, तत्पश्चात् चतुर्दशी
वार – गुरुवार
नक्षत्र, योग एवं करण
नक्षत्र – पूर्वाफाल्गुनी रात्रि 09:20 PM तक, तत्पश्चात् उत्तराफाल्गुनी
योग – शुक्ल अगले दिन (09 अक्टूबर) प्रातः 00:57 AM तक, तत्पश्चात् ब्रह्म
करण – गर प्रातः 10:45 AM तक, तत्पश्चात् वणिज रात्रि 10:17 PM तक, तत्पश्चात् विष्टि (भद्रा)
सूर्य, काल एवं मुहूर्त
सूर्योदय – 06:07 AM
सूर्यास्त – 05:50 PM
चन्द्रोदय – अगले दिन (09 अक्टूबर) 04:38 AM
चन्द्रास्त – 04:22 PM
चन्द्र राशि – सिंह अगले दिन (09 अक्टूबर) प्रातः 03:18 AM तक, तत्पश्चात् कन्या
अभिजित मुहूर्त – 11:35 AM से 12:22 PM तक
विजय मुहूर्त – 01:56 PM से 02:43 PM तक
अशुभ काल
राहुकाल – 01:27 PM से 02:55 PM तक
यमगण्ड – 06:07 AM से 07:35 AM तक
गुलिक काल – 09:03 AM से 10:31 AM तक
दुर्मुहूर्त – 10:01 AM से 10:48 AM तक एवं 02:43 PM से 03:30 PM तक
कंटक – 02:43 PM से 03:30 PM तक
शुभ चौघड़िया
शुभ – 06:07 AM से 07:35 AM तक
चर – 10:31 AM से 11:59 AM तक
लाभ – 11:59 AM से 01:27 PM तक
अमृत – 01:27 PM से 02:55 PM तक
शुभ – 04:22 PM से 05:50 PM तक
दिशाशूल एवं यात्रा विचार
दिशाशूल – दक्षिण
यात्रा उपाय – गुरुवार को दक्षिण दिशा की यात्रा टालें। यदि अनिवार्य हो, तो दही या जीरा खाकर अथवा भगवान विष्णु का स्मरण करके प्रस्थान करें।
व्रत-पर्व एवं विशेष योग
त्रयोदशी श्राद्ध (पितृपक्ष / मघा त्रयोदशी)
आश्विन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर त्रयोदशी श्राद्ध संपन्न किया जाता है। जिन पूर्वजों का देहावसान किसी भी मास की त्रयोदशी तिथि को हुआ हो, उनका तर्पण, पिंडदान व ब्राह्मण भोजन आज कराया जाता है। इसे ‘काकबली’ व बालकों (कम आयु में दिवंगत परिजनों) के निमित्त श्राद्ध के लिए भी विशेष फलदायी माना जाता है। साथ ही गुरुवार के दिन त्रयोदशी का संयोग गुरु प्रदोष व्रत का भी शुभ प्रभाव बनाता है।
पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र का प्रभाव
रात्रि 09:20 तक पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र रहेगा, जिसके स्वामी शुक्र देव और अधिपति देव ‘भग’ (सूर्य के स्वरूप) हैं। यह नक्षत्र कला, सौंदर्य, रचनात्मकता, ऐश्वर्य और नवीन योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए अनुकूल माना जाता है। इसके पश्चात उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र प्रारंभ होगा।
विशेष ज्योतिषीय विश्लेषण
आज चन्द्रमा पूरे दिन-रात सिंह राशि में गोचर करेंगे, जिससे जातक में आत्मविश्वास, तेजस्विता और नेतृत्व क्षमता में वृद्धि देखने को मिलेगी। मध्यरात्रि बाद 00:57 तक शुक्ल योग रहेगा, जो आध्यात्मिक और धार्मिक कार्यों के लिए सिद्धिदायक है। रात्रि 10:17 के बाद भद्रा का प्रवेश होगा, अतः रात्रि काल में सांसारिक मांगलिक कार्यों की शुरुआत न करें।

आज का राशिफल – 08 अक्टूबर 2026 गुरुवार
मेष (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
पंचम भाव में चन्द्रमा बौद्धिक क्षमता में वृद्धि करेगा। विद्यार्थियों को अध्ययन और शोध में सफलता मिलेगी। संतान पक्ष से शुभ समाचार की प्राप्ति होगी।
उपाय – भगवान विष्णु को पीले पुष्प और तुलसी दल अर्पित करें।
वृषभ (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
चतुर्थ भाव में चन्द्रमा के प्रभाव से घरेलू मामलों में समय बीतेगा। भूमि, भवन या वाहन से संबंधित काम आगे बढ़ेंगे। माताजी के स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें।
उपाय – मस्तक पर सफेद चंदन का तिलक लगाएं।
मिथुन (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह)
तृतीय भाव में चन्द्रमा आपके पराक्रम और साहस में वृद्धि करेगा। मित्रों और भाई-बहनों का भरपूर सहयोग मिलेगा। छोटी लेकिन लाभकारी यात्राओं के योग हैं।
उपाय – गाय को भीगी हुई चने की दाल या गुड़ खिलाएं।
कर्क (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
धन भाव में चन्द्रमा आर्थिक स्थिति को मजबूती प्रदान करेगा। अटका हुआ धन वापस आने की पूरी संभावना है। परिवार में सौहार्द रहेगा और वाणी से लाभ होगा।
उपाय – शिवलिंग पर कच्चा दूध और जल अर्पित करें।
सिंह (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
चन्द्रमा आपकी ही राशि में संचरण कर रहे हैं, जिससे मानसिक स्पष्टता और निर्णय शक्ति मजबूत होगी। कार्यक्षेत्र में आपके सुझावों की प्रशंसा होगी।
उपाय – सूर्यदेव को तांबे के पात्र से जल में रोली मिलाकर अर्घ्य दें।
कन्या (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
द्वादश भाव में चन्द्रमा के प्रभाव से अनावश्यक भागदौड़ या खर्च की स्थिति बन सकती है। विदेश अथवा दूरस्थ संपर्कों से लाभ होगा। योग-ध्यान से मन को शांत रखें।
उपाय – भगवान गणेश को 21 दूर्वा अर्पित करें।
तुला (रा, री, रू, रे, रो, ता, टी, तू, ते)
एकादश भाव में चन्द्रमा आय के नए साधन निर्मित करेंगे। वरिष्ठ सहयोगियों और मित्रों से पूरा समर्थन मिलेगा। व्यावसायिक विस्तार के लिए दिन उत्तम है।
उपाय – किसी जरूरतमंद को पीले फल या भोजन का दान करें।
वृश्चिक (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
दशम भाव में चन्द्रमा कार्यक्षेत्र में आपकी प्रतिष्ठा और प्रभाव में वृद्धि करेगा। अधिकारियों का समर्थन मिलेगा। पिता के सहयोग से नए मार्ग प्रशस्त होंगे।
उपाय – हनुमान चालीसा का पाठ करें।
धनु (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
नवम भाव में चन्द्रमा भाग्य का पूर्ण सहयोग दिलाएगा। धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में रुचि बढ़ेगी। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में प्रयासरत जातकों को सफलता मिलेगी।
उपाय – मस्तक पर केसर या हल्दी का तिलक लगाएं।
मकर (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
अष्टम भाव में चन्द्रमा होने से स्वास्थ्य और खानपान पर विशेष ध्यान दें। वाहन सावधानी से चलाएं और अनचाहे विवादों से दूरी बनाए रखें। जोखिम भरे वित्तीय फैसले न लें।
उपाय – पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाएं।
कुंभ (गु, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
सप्तम भाव में चन्द्रमा दाम्पत्य जीवन में सुख और सामंजस्य बनाए रखेगा। साझेदारी के व्यापार में उत्तम लाभ होगा। सामाजिक जीवन में मान-सम्मान बढ़ेगा।
उपाय – भगवान शिव का जलाभिषेक करें और ‘ॐ नमः शिवाय’ का जप करें।
मीन (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
षष्ठ भाव में चन्द्रमा विरोधियों और प्रतिस्पर्धियों पर आपका वर्चस्व स्थापित करेगा। नौकरीपेशा लोगों को परिश्रम का पूरा फल मिलेगा। पुराने रोगों में सुधार होगा।
उपाय – केले के वृक्ष में जल दें और गुरुजनों का आशीर्वाद लें।
॥ शुभम भवतु ॥

