03 अक्टूबर 2026 का वैदिक पंचांग एवं राशिफल

वैदिक पंचांग
अंग्रेजी दिनांक – 03 अक्टूबर 2026, शनिवार

कालगणना
युगाब्द – 5128
विक्रम संवत् – 2083
शक संवत् – 1948 (पराभव)
सम्वत्सर – रौद्र
अयन – दक्षिणायन
ऋतु – शरद

मास, पक्ष एवं वार विवरण
मास – भाद्रपद (अमांत), आश्विन (पूर्णिमांत)
पक्ष – कृष्ण
तिथि – सप्तमी प्रातः 08:01 AM तक, तत्पश्चात् अष्टमी अगले दिन (04 अक्टूबर) प्रातः 05:58 AM तक
वार – शनिवार

नक्षत्र, योग एवं करण
नक्षत्र – आर्द्रा अगले दिन (04 अक्टूबर) प्रातः 01:30 AM तक, तत्पश्चात् पुनर्वसु
योग – वरीयान् दोपहर 03:21 PM तक, तत्पश्चात् परिघ
करण – भव प्रातः 08:01 AM तक, तत्पश्चात् बालव सायं 06:56 PM तक, तत्पश्चात् कौलव

सूर्य, काल एवं मुहूर्त
सूर्योदय – 06:05 AM
सूर्यास्त – 05:56 PM
चन्द्रोदय – 11:19 PM
चन्द्रास्त – 12:54 PM
चन्द्र राशि – मिथुन
अभिजित मुहूर्त – 11:37 AM से 12:24 PM तक
विजय मुहूर्त – 01:59 PM से 02:46 PM तक

अशुभ काल
राहुकाल – 09:02 AM से 10:31 AM तक
यमगण्ड – 01:29 PM से 02:58 PM तक
गुलिक काल – 06:05 AM से 07:33 AM तक
दुर्मुहूर्त – 06:05 AM से 06:52 AM तक एवं 06:52 AM से 07:39 AM तक
कंटक – 11:37 AM से 12:24 PM तक

शुभ चौघड़िया
शुभ – 07:33 AM से 09:02 AM तक
चर – 12:00 PM से 01:29 PM तक
लाभ – 01:29 PM से 02:58 PM तक
अमृत – 02:58 PM से 04:27 PM तक

दिशाशूल एवं यात्रा विचार
दिशाशूल – पूर्व
यात्रा उपाय – शनिवार को पूर्व दिशा की यात्रा टालें। यदि अनिवार्य हो, तो अदरक या उड़द खाकर अथवा श्री हनुमान चालीसा का पाठ करके प्रस्थान करें।

व्रत-पर्व एवं विशेष योग
अष्टमी श्राद्ध (पितृपक्ष / महालक्ष्मी व्रत पूर्ण)
आश्विन कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर ‘अष्टमी श्राद्ध’ संपन्न किया जाता है। जिन पूर्वजों का देहावसान किसी भी मास की अष्टमी तिथि को हुआ हो, उनका तर्पण, पिंडदान व ब्राह्मण भोजन आज कराया जाता है। इसे ‘अष्टका श्राद्ध’ भी कहते हैं। इसके अतिरिक्त इस दिन महालक्ष्मी व्रत का पारण और माता के निमित्त श्राद्ध का विशेष महत्व होता है।

आर्द्रा नक्षत्र एवं शनि-हनुमान पूजन
आर्द्रा नक्षत्र रात्रि पर्यन्त (अगले दिन प्रातः 01:30 तक) रहेगा, जिसके स्वामी राहु और अधिपति देव भगवान शिव (रुद्र) हैं। शनिवार का दिन होने से शनि देव और हनुमान जी की आराधना विशेष फलदायी रहेगी। आर्द्रा नक्षत्र में शिव जी का जलाभिषेक समस्त कष्टों और पापों का नाश करता है।

विशेष ज्योतिषीय विश्लेषण
आज चन्द्रमा पूरे दिन-रात बुध की राशि मिथुन में गोचर करेंगे, जिससे बौद्धिक चिंतन, संवाद, संचार माध्यमों और व्यापारिक गणनाओं में तीव्रता आएगी। दोपहर 03:21 तक वरीयान् योग का प्रभाव रहने से किए गए कार्यों में यश और सफलता प्राप्त होगी।

आज का राशिफल – 03 अक्टूबर 2026 शनिवार

मेष (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
तृतीय भाव में चन्द्रमा आपके साहस और पराक्रम में वृद्धि करेगा। मित्रों और भाई-बहनों का भरपूर सहयोग मिलेगा। व्यावसायिक यात्राएं सुखद और फलदायी सिद्ध होंगी।
उपाय – हनुमान जी को चमेली का तेल और सिन्दूर अर्पित करें।

वृषभ (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
धन भाव में चन्द्रमा आर्थिक स्थिति को मजबूती प्रदान करेगा। अटका हुआ धन प्राप्त हो सकता है। परिवार में सुख-शांति रहेगी और वाणी की मधुरता से लाभ होगा।
उपाय – शनि मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाएं।

मिथुन (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह)
चन्द्रमा आपकी ही राशि में गोचर कर रहे हैं, जिससे मानसिक स्पष्टता और निर्णय शक्ति मजबूत होगी। कार्यक्षेत्र में आपके सुझावों की सराहना होगी। आत्मविश्वास बना रहेगा।
उपाय – ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ मंत्र का 108 बार जप करें।

कर्क (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
द्वादश भाव में चन्द्रमा के प्रभाव से खर्चों में कुछ तेजी आ सकती है। धार्मिक और परोपकारी कार्यों में धन व्यय होगा। सेहत और खानपान का विशेष ध्यान रखें।
उपाय – भगवान शिव को जल में काले तिल मिलाकर अर्पित करें।

सिंह (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
एकादश भाव में चन्द्रमा आय के नए साधन निर्मित करेंगे। वरिष्ठ सहयोगियों और मित्रों से पूरा समर्थन मिलेगा। महत्वपूर्ण योजनाएं समय पर पूरी होंगी।
उपाय – सूर्यदेव को तांबे के पात्र से अर्घ्य दें।

कन्या (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
दशम भाव में चन्द्रमा कार्यक्षेत्र में आपकी प्रतिष्ठा और प्रभाव में वृद्धि करेगा। उच्चाधिकारियों का समर्थन मिलेगा। व्यापार में नए अनुबंध मिल सकते हैं।
उपाय – भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करें।

तुला (रा, री, रू, रे, रो, ता, टी, तू, ते)
नवम भाव में चन्द्रमा भाग्य का पूर्ण सहयोग दिलाएगा। धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में रुचि बढ़ेगी। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में प्रयासरत जातकों को सफलता मिलेगी।
उपाय – निर्धनों को काले वस्त्र या भोजन का दान करें।

वृश्चिक (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
अष्टम भाव में चन्द्रमा होने से स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहें। वाहन सावधानी से चलाएं और अनचाहे विवादों से दूरी बनाए रखें। वित्तीय मामलों में जोखिम न लें।
उपाय – सुंदरकांड का पाठ करें या हनुमान चालीसा पढ़ें।

धनु (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
सप्तम भाव में चन्द्रमा दाम्पत्य जीवन में सुख और सौहार्द बढ़ाएगा। साझेदारी के व्यापार में उत्तम लाभ होगा। सामाजिक जीवन में सम्मान और प्रतिष्ठा बढ़ेगी।
उपाय – पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाएं।

मकर (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
षष्ठ भाव में चन्द्रमा विरोधियों और प्रतिस्पर्धियों पर आपका वर्चस्व स्थापित करेगा। नौकरीपेशा लोगों को परिश्रम का उत्तम फल मिलेगा। पुराने कर्जों से राहत मिलेगी।
उपाय – शमी वृक्ष पर जल चढ़ाएं और दीपक लगाएं।

कुंभ (गु, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
पंचम भाव में चन्द्रमा बौद्धिक क्षमता में वृद्धि करेगा। विद्यार्थियों को अध्ययन और शोध में सफलता मिलेगी। संतान पक्ष से शुभ समाचार की प्राप्ति होगी।
उपाय – काले कुत्ते को तेल चुपड़ी रोटी खिलाएं।

मीन (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
चतुर्थ भाव में चन्द्रमा पारिवारिक मामलों में व्यस्त रखेगा। भौतिक सुख-सुविधाओं पर ध्यान केंद्रित रहेगा। माता के स्वास्थ्य का ध्यान रखें और उनका आशीर्वाद लें।
उपाय – भगवान विष्णु को पीले पुष्प अर्पित करें।

॥ शुभम भवतु ॥

Samvad 24 Office
Samvad 24 Office

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *