
वैदिक पंचांग
अंग्रेजी दिनांक – 30 सितंबर 2026, बुधवार
कालगणना
युगाब्द – 5128
विक्रम संवत् – 2083
शक संवत् – 1948 (पराभव)
सम्वत्सर – रौद्र
अयन – दक्षिणायन
ऋतु – शरद
मास, पक्ष एवं वार विवरण
मास – भाद्रपद (अमांत), आश्विन (पूर्णिमांत)
पक्ष – कृष्ण
तिथि – चतुर्थी दोपहर 02:57 PM तक, तत्पश्चात् पंचमी
वार – बुधवार
नक्षत्र, योग एवं करण
नक्षत्र – भरणी प्रातः 07:37 AM तक, तत्पश्चात् कृतिका अगले दिन (01 अक्टूबर) प्रातः 06:03 AM तक
योग – वज्र अगले दिन (01 अक्टूबर) प्रातः 00:20 AM तक, तत्पश्चात् सिद्धि
करण – बालव दोपहर 02:57 PM तक, तत्पश्चात् कौलव अगले दिन (01 अक्टूबर) प्रातः 01:47 AM तक
सूर्य, काल एवं मुहूर्त
सूर्योदय – 06:03 AM
सूर्यास्त – 05:59 PM
चन्द्रोदय – 08:18 PM
चन्द्रास्त – 09:39 AM
चन्द्र राशि – मेष दोपहर 01:14 PM तक, तत्पश्चात् वृषभ
अभिजित मुहूर्त – कोई नहीं
विजय मुहूर्त – 02:00 PM से 02:48 PM तक
अशुभ काल
राहुकाल – 12:01 PM से 01:31 PM तक
यमगण्ड – 07:33 AM से 09:02 AM तक
गुलिक काल – 10:32 AM से 12:01 PM तक
दुर्मुहूर्त – 11:37 AM से 12:25 PM तक
कंटक – 04:24 PM से 05:12 PM तक
शुभ चौघड़िया
लाभ – 06:03 AM से 07:33 AM तक
अमृत – 07:33 AM से 09:02 AM तक
शुभ – 10:32 AM से 12:01 PM तक
चर – 03:00 PM से 04:30 PM तक
लाभ – 04:30 PM से 05:59 PM तक
दिशाशूल एवं यात्रा विचार
दिशाशूल – उत्तर
यात्रा उपाय – बुधवार को उत्तर दिशा की यात्रा टालें। यदि अनिवार्य हो, तो तिल या धनिया खाकर अथवा भगवान श्रीगणेश का ध्यान करके प्रस्थान करें।
व्रत-पर्व एवं विशेष योग
चतुर्थी श्राद्ध (पितृपक्ष) एवं संकष्टी चतुर्थी
आश्विन कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर चतुर्थी श्राद्ध संपन्न किया जाता है। जिन पूर्वजों का देहावसान किसी भी मास के दोनों पक्षों की चतुर्थी तिथि को हुआ हो, उनका तर्पण, पिंडदान व ब्राह्मण भोजन आज के दिन कराना श्रेयस्कर होता है। साथ ही विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश की आराधना का पावन संकष्टी व्रत भी रखा जाएगा।
कृतिका नक्षत्र एवं चन्द्रमा का उच्च गोचर
प्रातः 07:37 के बाद कृतिका नक्षत्र प्रारंभ होगा, जिसके स्वामी सूर्यदेव और अधिपति देव अग्नि हैं। दोपहर 01:14 पर चन्द्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में प्रवेश करेंगे। यह गोचर मानसिक स्थिरता, आकर्षण, आर्थिक समृद्धि और रचनात्मक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि करता है।
विशेष ज्योतिषीय विश्लेषण
आज दिन में अभिजित मुहूर्त नहीं रहेगा। दोपहर 01:14 के बाद चन्द्रमा के वृषभ राशि में आने से व्यापारिक सौदों और पारिवारिक निर्णयों में संतुलन आएगा। पूरे दिन वज्र योग का प्रभाव रहने से गुप्त शत्रुओं और वित्तीय लेन-देन में थोड़ी सावधानी बरतना हितकर रहेगा

आज का राशिफल – 30 सितंबर 2026 बुधवार
मेष (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
दोपहर तक चन्द्रमा आपकी राशि में रहेंगे, जिससे आत्मविश्वास बना रहेगा। दोपहर बाद धन भाव में उच्च के चन्द्रमा के आने से रुका हुआ धन वापस मिलेगा और आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी।
उपाय – भगवान गणेश को 21 दूर्वा अर्पित करें।
वृषभ (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
दोपहर तक दौड़भाग और खर्च की स्थिति रह सकती है। दोपहर 01:14 के बाद चन्द्रमा आपकी ही राशि में प्रवेश करेंगे, जिससे मानसिक शांति मिलेगी और सोचे हुए कार्य सफल होंगे।
उपाय – छोटी कन्याओं को हरी फलियां या मिठाई दान करें।
मिथुन (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह)
पूर्वाह्न में लाभ और नए अवसरों की प्राप्ति होगी। दोपहर बाद द्वादश भाव में चन्द्रमा के प्रभाव से खर्चों में वृद्धि हो सकती है। लंबी यात्रा या विदेश से जुड़े कार्यों में लाभ मिलेगा।
उपाय – गाय को हरी घास या पालक खिलाएं।
कर्क (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
कार्यक्षेत्र में आपके प्रभाव और प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। दोपहर के बाद एकादश भाव में उच्च के चन्द्रमा आय के नए साधन निर्मित करेंगे। मित्रों का पूर्ण सहयोग मिलेगा।
उपाय – शिवलिंग पर कच्चा दूध और जल अर्पित करें।
सिंह (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
भाग्य का साथ मिलेगा और धार्मिक कार्यों में मन लगेगा। दोपहर बाद दशम भाव में चन्द्रमा के प्रभाव से नौकरी व व्यवसाय में नए अवसर प्राप्त होंगे। उच्चाधिकारी प्रसन्न रहेंगे।
उपाय – सूर्यदेव को तांबे के पात्र से जल अर्पित करें।
कन्या (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
दोपहर तक स्वास्थ्य और खानपान का ध्यान रखें। दोपहर बाद नवम भाव में चन्द्रमा के आने से भाग्य का पूरा सहयोग मिलेगा और अटके हुए कार्य गति पकड़ेंगे।
उपाय – श्री गणेश संकटनाशन स्तोत्र का पाठ करें।
तुला (रा, री, रू, रे, रो, ता, टी, तू, ते)
दाम्पत्य जीवन में मधुरता बनी रहेगी। दोपहर के बाद अष्टम भाव में चन्द्रमा होने से वाहन सावधानी से चलाएं और वित्तीय मामलों में जोखिम लेने से बचें।
उपाय – किसी जरूरतमंद को सफेद अन्न या फल दान करें।
वृश्चिक (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
शत्रुओं और विरोधियों पर आपका वर्चस्व रहेगा। दोपहर बाद सप्तम भाव में उच्च के चन्द्रमा जीवनसाथी और व्यापारिक साझेदारों से विशेष सहयोग व लाभ दिलाएंगे।
उपाय – हनुमान चालीसा का पाठ करें।
धनु (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
बौद्धिक कार्यों और अध्ययन में सफलता मिलेगी। दोपहर बाद षष्ठ भाव में चन्द्रमा के प्रभाव से प्रतियोगिता और कार्यक्षेत्र में विजय प्राप्त होगी। स्वास्थ्य में सुधार होगा।
उपाय – भगवान विष्णु को पीले पुष्प और चने की दाल अर्पित करें।
मकर (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
पारिवारिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि होगी। दोपहर के बाद पंचम भाव में चन्द्रमा आने से संतान पक्ष से शुभ समाचार मिलेगा और रचनात्मक कार्यों में सफलता हासिल होगी।
उपाय – पीपल के वृक्ष में जल अर्पित करें और दीपक जलाएं।
कुंभ (गु, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
साहस और पराक्रम में वृद्धि देखने को मिलेगी। दोपहर बाद चतुर्थ भाव में उच्च के चन्द्रमा घरेलू वातावरण में सुख-शांति लाएंगे। भूमि या वाहन संबंधी कार्य पूरे होंगे।
उपाय – पक्षियों को दाना डालें और ‘ॐ गं गणपतये नमः’ का जप करें।
मीन (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
आर्थिक योजनाओं में सफलता मिलेगी। दोपहर बाद तृतीय भाव में चन्द्रमा के प्रभाव से नए संपर्क बनेंगे और भाई-बहनों के सहयोग से महत्वपूर्ण कार्य संपन्न होंगे।
उपाय – मस्तक पर केसर या पीले चंदन का तिलक लगाएं।
॥ शुभम भवतु ॥

