27 सितंबर 2026 का वैदिक पंचांग एवं राशिफल

वैदिक पंचांग
अंग्रेजी दिनांक – 27 सितंबर 2026, रविवार

कालगणना
युगाब्द – 5128
विक्रम संवत् – 2083
शक संवत् – 1948 (पराभव)
सम्वत्सर – रौद्र
अयन – दक्षिणायन
ऋतु – शरद

मास, पक्ष एवं वार विवरण
मास – भाद्रपद (अमांत), आश्विन (पूर्णिमांत)
पक्ष – कृष्ण
तिथि – प्रतिपदा रात्रि 09:00 PM तक, तत्पश्चात् द्वितीया
वार – रविवार

नक्षत्र, योग एवं करण
नक्षत्र – उत्तराभाद्रपद पूर्वाह्न 11:08 AM तक, तत्पश्चात् रेवती
योग – वृद्धि पूर्वाह्न 11:16 AM तक, तत्पश्चात् ध्रुव
करण – बालव प्रातः 09:43 AM तक, तत्पश्चात् कौलव रात्रि 09:00 PM तक, तत्पश्चात् तैतिल

सूर्य, काल एवं मुहूर्त
सूर्योदय – 06:02 AM
सूर्यास्त – 06:03 PM
चन्द्रोदय – 06:17 PM
चन्द्रास्त – 06:25 AM
चन्द्र राशि – मीन
अभिजित मुहूर्त – 11:38 AM से 12:26 PM तक
विजय मुहूर्त – 02:02 PM से 02:51 PM तक

अशुभ काल
राहुकाल – 04:33 PM से 06:03 PM तक
यमगण्ड – 12:02 PM से 01:32 PM तक
गुलिक काल – 03:02 PM से 04:33 PM तक
दुर्मुहूर्त – 04:27 PM से 05:15 PM तक
कंटक – 10:02 AM से 10:50 AM तक

शुभ चौघड़िया
उद्वेग – 06:02 AM से 07:32 AM तक
चर – 07:32 AM से 09:02 AM तक
लाभ – 09:02 AM से 10:32 AM तक
अमृत – 10:32 AM से 12:02 PM तक
शुभ – 01:32 PM से 03:02 PM तक

दिशाशूल एवं यात्रा विचार
दिशाशूल – पश्चिम
यात्रा उपाय – रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा टालें। यदि अनिवार्य हो, तो दलिया, घी या पान खाकर अथवा भगवान भास्कर (सूर्यदेव) को अर्घ्य देकर प्रस्थान करें।

व्रत-पर्व एवं विशेष योग
प्रतिपदा श्राद्ध (पितृपक्ष)
आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को प्रतिपदा श्राद्ध संपन्न किया जाता है। जिन पितरों का देहावसान किसी भी मास के शुक्ल या कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को हुआ हो, उनका श्राद्ध, तर्पण व पिंडदान आज के दिन श्रद्धापूर्वक किया जाता है। रविवार का दिन होने से सूर्योपासना से पितृदोष की शांति होती है।

रेवती नक्षत्र एवं पंचक विचार
पूर्वाह्न 11:08 के बाद रेवती नक्षत्र प्रारंभ होगा, जिसके स्वामी बुध देव और अधिपति पूषा हैं। चन्द्रमा के मीन राशि में संचरण करने से पंचक प्रभावी रहेगा। रेवती नक्षत्र गंडमूल नक्षत्र भी है, अतः पूर्वाह्न 11:08 के बाद जन्मे शिशुओं की मूल शांति करानी चाहिए। यह नक्षत्र कला, व्यापार और शिक्षा के लिए अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है।

विशेष ज्योतिषीय विश्लेषण
आज चन्द्रमा पूरे दिन-रात अपनी गुरु-प्रधान राशि मीन में गोचर करेंगे। पूर्वाह्न 11:16 तक वृद्धि योग और उसके बाद ध्रुव योग का प्रभाव रहने से स्थायी व आध्यात्मिक कार्यों में स्थिरता और सफलता प्राप्त होगी। पंचक काल होने के कारण छत ढालना, दक्षिण दिशा की यात्रा व तृण-काष्ठ संचय जैसे कार्यों से बचें।

आज का राशिफल – 27 सितंबर 2026 रविवार

मेष (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
द्वादश भाव में चन्द्रमा के प्रभाव से धार्मिक व सामाजिक कार्यों में धन व्यय होगा। लंबी दूरी की यात्रा या विदेश से जुड़े कार्यों में प्रगति होगी। मानसिक शांति के लिए ध्यान करें।
उपाय – प्रातः काल सूर्यदेव को तांबे के पात्र से जल अर्पित करें।

वृषभ (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
एकादश भाव में चन्द्रमा आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा। आय के नए अवसर मिलेंगे और वरिष्ठजनों का मार्गदर्शन प्राप्त होगा। मित्रों के साथ सुखद समय बीतेगा।
उपाय – गायत्री मंत्र का पाठ करें।

मिथुन (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह)
दशम भाव में चन्द्रमा कार्यक्षेत्र में आपकी मान-प्रतिष्ठा बढ़ाएगा। वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा। पैतृक मामलों में सकारात्मक परिणाम प्राप्त होंगे।
उपाय – गाय को हरी घास या रोटी पर गुड़ रखकर खिलाएं।

कर्क (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
नवम भाव में चन्द्रमा भाग्य का साथ दिलाएगा। आध्यात्मिक और परोपकारी गतिविधियों में मन लगेगा। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में प्रयासरत जातकों को सफलता मिलेगी।
उपाय – भगवान शिव का जलाभिषेक करें।

सिंह (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
अष्टम भाव में चन्द्रमा के प्रभाव से सेहत और खानपान पर ध्यान दें। वाहन चलाते समय सतर्क रहें। अनावश्यक वाद-विवाद और जल्दबाजी के फैसलों से बचें।
उपाय – आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें।

कन्या (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
सप्तम भाव में चन्द्रमा दाम्पत्य जीवन में मधुरता और सामंजस्य बनाए रखेगा। साझेदारी के व्यापार में लाभ के योग हैं। सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी।
उपाय – भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करें।

तुला (रा, री, रू, रे, रो, ता, टी, तू, ते)
षष्ठ भाव में चन्द्रमा विरोधियों और प्रतिस्पर्धियों पर आपका प्रभाव स्थापित करेगा। नौकरीपेशा लोगों के लिए दिन उत्तम है। रुके हुए कार्यों में तेजी आएगी।
उपाय – जरूरतमंदों को फल या भोजन का दान करें।

वृश्चिक (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
पंचम भाव में चन्द्रमा बौद्धिक क्षमता में वृद्धि करेगा। विद्यार्थियों को अध्ययन और शोध में सफलता मिलेगी। संतान पक्ष से शुभ समाचार मिलेगा।
उपाय – हनुमान चालीसा का पाठ करें।

धनु (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
चतुर्थ भाव में चन्द्रमा पारिवारिक सुख-साधनों पर ध्यान केंद्रित रखेगा। भूमि, भवन या वाहन से जुड़ा विचार आगे बढ़ सकता है। माता के स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
उपाय – मस्तक पर केसर या हल्दी का तिलक लगाएं।

मकर (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
तृतीय भाव में चन्द्रमा पराक्रम और आत्मविश्वास में वृद्धि करेगा। भाई-बहनों और मित्रों का पूरा सहयोग मिलेगा। छोटी लेकिन लाभकारी यात्राएं संभव हैं।
उपाय – पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।

कुंभ (गु, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
धन भाव में चन्द्रमा आर्थिक स्थिति को मजबूती प्रदान करेगा। फंसा हुआ धन वापस आने के योग हैं। अपनी मधुर वाणी से संबंधों को प्रगाढ़ बनाएंगे।
उपाय – भगवान सूर्य को प्रणाम करें और लाल पुष्प अर्पित करें।

मीन (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
चन्द्रमा आपकी ही राशि में गोचर कर रहे हैं, जिससे मानसिक स्पष्टता और निर्णय शक्ति मजबूत होगी। व्यक्तित्व में आकर्षण बढ़ेगा और सोचे हुए कार्य पूरे होंगे।
उपाय – भगवान विष्णु को पीले पुष्प और तुलसी दल अर्पित करें।

॥ शुभम भवतु ॥

Samvad 24 Office
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