जयशंकर का दो टूक संदेश: दुर्भाग्य से हमारे पड़ोसी बुरे, आतंकवाद से देशवासियों की रक्षा हमारा अधिकार

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संवाद 24 मद्रास। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने आतंकवाद और पड़ोसी देशों को लेकर सख्त और स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि दुर्भाग्य से भारत को ऐसे पड़ोसी मिले हैं, जो जानबूझकर और बिना किसी पछतावे के आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे हालात में भारत को अपने लोगों को आतंकवाद से बचाने का पूरा अधिकार है और इस अधिकार का इस्तेमाल कैसे किया जाएगा, यह भारत स्वयं तय करेगा। कोई भी देश हमें यह नहीं बता सकता कि हमें क्या करना चाहिए और क्या नहीं।

आईआईटी मद्रास में शुक्रवार को आयोजित एक कार्यक्रम में विदेश मंत्री ने कहा कि अगर कोई देश लगातार आतंकवाद को नीति के तौर पर अपनाता है, तो भारत चुप बैठने वाला नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि देश की सुरक्षा के लिए जो भी आवश्यक होगा, भारत करेगा।

बांग्लादेश में हालिया अशांति के संदर्भ में जयशंकर ने कहा कि अच्छे पड़ोसी नुकसानदायक नहीं होते। उन्होंने बताया कि वह हाल ही में बांग्लादेश गए थे, जहां पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने कहा कि भारत को अलग-अलग तरह के पड़ोसी मिले हैं। जहां पड़ोसी सहयोगी होते हैं या कम से कम नुकसान नहीं पहुंचाते, वहां भारत निवेश करता है, मदद करता है और संसाधन साझा करता है।

अपने संबोधन में विदेश मंत्री ने भारत की विदेश नीति और वैश्विक भूमिका पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की प्राचीन सभ्यताओं में से एक है, जो आज एक आधुनिक राष्ट्र के रूप में मजबूती से खड़ा है। भारत को अपने इतिहास और सांस्कृतिक विरासत की स्पष्ट समझ है, जो बहुत कम देशों में देखने को मिलती है। भारत ने जानबूझकर लोकतांत्रिक व्यवस्था को अपनाया और इसी वजह से लोकतंत्र एक वैश्विक राजनीतिक विचार के रूप में उभरा।

जयशंकर ने कहा कि ‘वसुधैव कुटुंबकम’ भारत की सोच का मूल है, जिसमें दुनिया को कभी दुश्मन या खतरे के रूप में नहीं देखा गया। सीमित संसाधनों के बावजूद अधिक प्रभाव कैसे डाला जाए, यही भारत की विदेश नीति की दिशा है। उन्होंने बताया कि भारतीय कूटनीति अपनी ताकत, प्रतिस्पर्धा और वैश्विक संस्थाओं का उपयोग कर समाधान तलाशती है।

उन्होंने कोविड काल के दौरान भारत की वैक्सीन डिप्लोमेसी का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका भावनात्मक प्रभाव बहुत गहरा रहा। कई देशों में जब पहली वैक्सीन खेप पहुंची तो लोगों की आंखों में आंसू थे। उस समय कई विकसित देशों ने जरूरत से ज्यादा वैक्सीन जमा कर ली थी, जबकि छोटे और गरीब देशों के लिए भारत की मदद जीवनरेखा साबित हुई। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के सबसे कुशल वैक्सीन उत्पादकों में से एक है, लेकिन वैश्विक सप्लाई चेन के कारण दुनिया के साथ सहयोग जरूरी है।

अरुणाचल प्रदेश को लेकर विदेश मंत्री ने दो टूक कहा कि अरुणाचल भारत का अभिन्न हिस्सा है और हमेशा रहेगा। उन्होंने शंघाई एयरपोर्ट पर चीनी इमिग्रेशन अधिकारियों द्वारा अरुणाचल प्रदेश की एक महिला को परेशान किए जाने के मामले पर कड़ी आपत्ति जताई। जयशंकर ने कहा कि भारत ने इस पर स्पष्ट विरोध दर्ज कराया है और साफ कर दिया है कि ऐसी हरकतों से जमीनी हकीकत बदलने वाली नहीं है।

विदेश मंत्री के इस बयान को भारत की सुरक्षा नीति, कूटनीतिक आत्मविश्वास और पड़ोसी देशों को लेकर स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

Samvad 24 Office
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