“हार का ठीकरा आयोग पर! कांग्रेस लोकतंत्र को बदनाम कर छिपा रही अपनी नाकामी” राज्यसभा में जेपी नड्डा का करारा प्रहार
Share your love

संवाद 24 नई दिल्ली। चुनाव सुधारों पर संसद में हुई लंबी बहस के दौरान विपक्ष जहां कथित वोट चोरी और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाकर एनडीए को मिले जनादेश को संदेह के घेरे में लाने की कोशिश करता रहा, वहीं सत्ता पक्ष ने तथ्यों के सहारे हर आरोप का जवाब दिया। लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी करीब दस घंटे चली चर्चा मंगलवार को नेता सदन जेपी नड्डा के जवाब के साथ समाप्त हुई।
जेपी नड्डा ने विपक्ष, खासकर कांग्रेस पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि चुनावी हार के बाद जनता को भ्रमित करने की राजनीति बंद होनी चाहिए। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि जैसे कमजोर छात्र परीक्षा में असफल होने पर बहाने ढूंढते हैं, वैसे ही आज कुछ राजनीतिक दल अपनी पराजय के लिए नए-नए तर्क गढ़ रहे हैं।
“लोकतंत्र को कमजोर करने की साजिश”
राज्यसभा में 57 सांसदों के विचार रखने के बाद चर्चा का उत्तर देते हुए नड्डा ने कहा कि देश लोकतंत्र और एक-एक वोट की ताकत को भली-भांति समझता है। चुनाव सुधारों का उद्देश्य लोकतांत्रिक व्यवस्था को और मजबूत करना है, न कि किसी को नुकसान पहुंचाना। उन्होंने विपक्ष को संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखने की नसीहत दी और कहा कि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पूरी दुनिया में स्थापित है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि दशकों तक एक ही पार्टी सत्ता में रही और उस दौरान चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर कभी सवाल नहीं उठाए गए। तब जिम्मेदारी किसी संस्था की नहीं, बल्कि एक परिवार की मानी जाती थी।
एसआईआर पर भ्रम फैलाने का आरोप
नेता सदन ने कहा कि विपक्ष विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर देश में यह माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है कि बड़े पैमाने पर धांधली हो रही है, जबकि सच्चाई इससे उलट है। 1952 से 2004 के बीच दस बार एसआईआर हुआ, जिनमें से अधिकांश उस दौर में हुए जब भाजपा सत्ता में नहीं थी। एसआईआर चुनाव आयोग का संवैधानिक अधिकार है और यह प्रक्रिया आगे भी चलती रहेगी।
उन्होंने सवाल उठाया कि संसद में एसआईआर पर जवाब कौन देगा, जब यह पूरी तरह से चुनाव आयोग का विषय है। इसके बावजूद विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक हथियार बनाने में जुटा है।
घुसपैठ और फर्जी नामों पर सख्त रुख
जेपी नड्डा ने कहा कि पूर्व में एक निर्णय के कारण रिटर्निंग अधिकारियों से मतदाता सूची से नाम हटाने का अधिकार छीन लिया गया था, जिससे मृत, स्थानांतरित और डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम सूची में बने रहे। अब एसआईआर के जरिए उसी त्रुटि को सुधारा जा रहा है।
उन्होंने तीखा सवाल उठाया“क्या देश घुसपैठियों को मतदाता सूची में शामिल करने की अनुमति दे सकता है?” नड्डा ने कहा कि चुनाव परिणाम विपक्ष को असहज कर रहे हैं, लेकिन हार का ठीकरा चुनाव आयोग पर फोड़ना न सिर्फ जनता को गुमराह करना है, बल्कि देशहित के खिलाफ भी है।
“आत्ममंथन करें, बहाने नहीं”
कांग्रेस को आंकड़ों का आईना दिखाते हुए नड्डा ने कहा कि कई राज्यों में पार्टी दशकों से सत्ता से बाहर है। समस्या चुनाव आयोग नहीं, बल्कि जनता से कटता जनाधार है। ऐसे में लोकतांत्रिक संस्थाओं पर आरोप लगाना आत्ममंथन से बचने का तरीका है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लोकतंत्र चलता रहेगा, चुनाव आयोग अपना संवैधानिक कर्तव्य निभाता रहेगा और जनता ऐसे प्रयासों को स्वीकार नहीं करेगी, जो हार को साजिश बताकर लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश करते हैं।






