दो दिन में 7 ढेर, 50 गिरफ्तार, क्या ‘नक्सल फ्री इंडिया’ का सपना अब सच होने के करीब?”

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छत्तीसगढ़, ओडिशा सीमा पर सुरक्षा बलों ने लगातार दूसरे दिन जिस तरह से बड़ी सफलता हासिल की है, उसे नक्सल उन्मूलन अभियान की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है। दो दिनों की संयुक्त कार्रवाई में सुरक्षा बलों ने 7 नक्सलियों को ढेर कर दिया, जिनमें 3 महिला नक्सली भी शामिल हैं, जबकि 50 नक्सलियों को गिरफ्तार कर पूरे इलाके में मजबूत दबदबा स्थापित कर लिया गया है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मार्च 2026 तक ‘नक्सल फ्री इंडिया’ का लक्ष्य तय किया है और हालिया ऑपरेशनों ने इस मिशन को नई गति दे दी है। लगातार हो रही सफलताओं ने इस सवाल को मजबूती से खड़ा कर दिया है। क्या नक्सलवाद का अध्याय अब खत्म होने के बिल्कुल करीब है?

ऑपरेशन का पूरा घटनाक्रम: दो दिन में दो बड़े मुठभेड़
पहला दिन: मंगलवार का निर्णायक मुकाबला

मंगलवार को सुरक्षा बलों को खुफिया सूचना मिली कि सीमावर्ती जंगलों में दर्जनों नक्सली सक्रिय हैं और एक बड़ी वारदात की तैयारी कर रहे हैं। इसके बाद DRG, STF और COBRA के संयुक्त दस्ते ने इलाके की घेराबंदी की और मुठभेड़ शुरू हो गई। करीब दो घंटे चली इस भिड़ंत में 7 नक्सलियों को मार गिराया गया। मौके से हथियार, संचार उपकरण और बड़ी मात्रा में सामग्री बरामद की गई।

दूसरा दिन: बुधवार की मुठभेड़ में तेज़ी से मोर्चाबंदी
अगले ही दिन बुधवार को सुरक्षा बलों ने एक विशेष अभियान चलाया जिसमें नक्सली दहशत में आकर भागने लगे और छिपने की कोशिश की। घिर जाने पर उन्होंने गोलियां चलाईं, जिसमें CISF जवान अश्वनी शर्मा गंभीर रूप से घायल हुए। उन्हें तुरंत हेलीकॉप्टर से रायपुर रेफर किया गया। मुठभेड़ खत्म होने के बाद सुरक्षाबलों ने बड़ी संख्या में नक्सलियों को पकड़ा। 50 नक्सली गिरफ्तार किए गए, जो हाल के वर्षों में किसी एक ऑपरेशन में पकड़ी गई सबसे बड़ी संख्या में से एक है।

क्यों घट रहे हैं नक्सल प्रभावित जिले?
आँकड़े बताते हैं कहानी –

सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या लगातार कम होती जा रही है:
2013 : 126 जिले
2018 : 90 जिले
2021 : 70 जिले
2024 : 38 जिले
इन आँकड़ों से स्पष्ट है कि सरकार के लगातार ऑपरेशन मोड में रहने और रणनीतिक बदलावों ने नक्सलियों के नेटवर्क को लगभग तोड़कर रख दिया है।

नक्सलवाद पर लगाम कसने के तीन बड़े कारण

  1. लगातार ऑपरेशन, बिना विराम रणनीति
    सुरक्षा बलों ने अब ‘प्रतिकार’ की जगह ‘पहलकदमी’ रणनीति अपनाई है। यानी नक्सलियों के हमले का इंतज़ार नहीं, सीधे उनके ठिकानों पर सर्जिकल एक्शन।
  2. सरेंडर करने वालों के लिए बेहतर योजनाएँ
    राज्य और केंद्र सरकार ने आत्मसमर्पण को बढ़ावा देने के लिए पुनर्वास पैकेज अधिक प्रभावी बनाए हैं। नतीजा: पिछले 5 वर्षों में हजारों नक्सली सरेंडर कर मुख्यधारा में लौटे।
  3. इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर बड़ा फोकस
    सरकार अब नक्सल प्रभावित इलाकों में तेज़ी से सड़कें, मोबाइल टावर और सरकारी सुविधाएँ स्थापित कर रही है। इसी वजह से नक्सलियों की पकड़ कमजोर होती जा रही है और जनता का विश्वास प्रशासन में बढ़ रहा है।

गृह मंत्रालय का 2026 लक्ष्य, क्या संभव है?
गृह मंत्रालय ने मार्च 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य रखा है। हालिया दो दिनों की कार्रवाई बताती है कि:
खुफिया सूचना अधिक मजबूत हुई है
मैदानी अभियानों में तेजी है
नक्सलियों की ताकत और मनोबल दोनों कमजोर पड़े हैं
राज्यों के बीच आपसी तालमेल पहले से बेहतर हुआ है
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि इसी रफ्तार से ऑपरेशन चलाए गए, तो 2026 तक नक्सलवाद का जड़ से उखड़ जाना संभव है।

स्थानीय जनता की सक्रिय भूमिका, सबसे बड़ा बदलाव
पहले जहां ग्रामीण क्षेत्रों में नक्सलियों के डर के चलते कोई सूचना नहीं मिलती थी, अब लोग खुलकर सुरक्षा बलों की मदद कर रहे हैं। पिछले एक वर्ष में:
ग्रामीणों द्वारा दी गई खुफिया जानकारी में 45% बढ़ोतरी
विकास कार्यों में स्थानीयों की स्वैच्छिक भागीदारी
नक्सलियों के जनाधार में भारी कमी
इससे सुरक्षा बलों को मिशन स्तर पर बड़ी बढ़त मिली है।

ऑपरेशन के बाद कड़ा कॉम्बिंग अभियान
मुठभेड़ों के बाद क्षेत्र में बड़े पैमाने पर कॉम्बिंग ऑपरेशन चलाया जा रहा है। कई स्थानों को सील कर दिया गया है और जंगलों में ड्रोन एवं ट्रैकिंग डिवाइस से निगरानी बढ़ाई गई है। इसी कारण बड़ी संख्या में गिरफ्तारियाँ हुई हैं, जो संकेत देती हैं कि नक्सलियों की शहर सप्लाई चेन और स्थानीय कनेक्शन भी धीरे-धीरे निशाने पर आ रहे हैं।

क्या यह नक्सलवाद के अंत की शुरुआत है?
नक्सलियों पर इस प्रकार की लगातार चोटें यह संकेत दे रही हैं कि उनकी शक्ति, संसाधन और जनसमर्थन तीनों तेजी से घट रहे हैं। चूंकि नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या अब केवल 38 रह गई है, इसलिए माना जा रहा है कि आने वाले दो वर्षों में इसे शून्य के करीब लाया जा सकता है।

दो दिनों में 7 नक्सलियों का ढेर और 50 की गिरफ्तारी ने सुरक्षा बलों की रणनीति, तैयारी और नक्सलवाद खत्म करने की प्रतिबद्धता को दिखा दिया है। सरकार स्पष्ट संदेश दे चुकी है कि यह लड़ाई अब अपने अंतिम दौर में है। अगर इसी आक्रामक मोड में अभियान जारी रहा, तो ‘नक्सल फ्री इंडिया 2026’ सिर्फ लक्ष्य नहीं, बल्कि देश की सबसे बड़ी उपलब्धि बन सकता है।

Samvad 24 Office
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