8 साल बाद भारत दौरे पर दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति, मोदी से आज अहम बातचीत – किन मुद्दों पर टिकेगी दुनिया की नजर
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संवाद 24 नई दिल्ली। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग आठ साल बाद भारत के दौरे पर पहुंचे हैं और आज उनकी मुलाकात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से होने जा रही है। इस उच्चस्तरीय बैठक में दोनों देश अपने संबंधों को नई ऊंचाई देने के लिए कई अहम मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
तीन दिवसीय दौरा और मजबूत रणनीतिक साझेदारी
राष्ट्रपति ली 19 से 21 अप्रैल तक भारत के तीन दिवसीय दौरे पर हैं, जो पिछले आठ वर्षों में किसी दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति का पहला भारत दौरा है। इस यात्रा को भारत और दक्षिण कोरिया के बीच “स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” को और मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। इस दौरान दोनों देशों के बीच न केवल राजनीतिक बल्कि आर्थिक और तकनीकी सहयोग पर भी जोर रहेगा।
किन मुद्दों पर होगी चर्चा?
आज होने वाली मोदी-ली वार्ता में कई अहम सेक्टर प्रमुख रहेंगे, जिनमें –
व्यापार और निवेश
शिपबिल्डिंग और मैन्युफैक्चरिंग
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
सेमीकंडक्टर और नई तकनीक
ऊर्जा और सप्लाई चेन
इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के जरिए दोनों देश अपने आर्थिक रिश्तों को नई दिशा देना चाहते हैं।
व्यापार और निवेश पर खास फोकस
इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बड़े उद्योगपतियों और कंपनियों की भी सक्रिय भागीदारी देखी जा रही है। करीब 200 बिजनेस प्रतिनिधि इस यात्रा का हिस्सा हैं, जिससे नए निवेश और संयुक्त परियोजनाओं की उम्मीद बढ़ गई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह दौरा भारत में दक्षिण कोरियाई कंपनियों के विस्तार को और गति दे सकता है।
तकनीक और रक्षा सहयोग पर जोर
भारत और दक्षिण कोरिया के बीच तकनीकी और रक्षा सहयोग भी इस बैठक का प्रमुख एजेंडा है। खासतौर पर सेमीकंडक्टर, एआई और उभरती तकनीकों में साझेदारी बढ़ाने पर चर्चा होगी। इसके अलावा, दोनों देश वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी अपने विचार साझा करेंगे, जिससे रणनीतिक तालमेल और मजबूत हो सके।
राष्ट्रपति और अन्य कार्यक्रम भी शामिल
राष्ट्रपति ली, भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी मुलाकात करेंगे। इसके अलावा उनके सम्मान में राजकीय भोज और कई आधिकारिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस दौरान “इंडिया-कोरिया बिजनेस फोरम” जैसे कार्यक्रम भी आयोजित होंगे, जहां दोनों देशों के उद्योग जगत के लोग सहयोग के नए रास्ते तलाशेंगे।
क्यों अहम है यह दौरा?
भारत और दक्षिण कोरिया के बीच पहले से ही मजबूत आर्थिक और सांस्कृतिक संबंध हैं। यह दौरा –
निवेश बढ़ाने
नई तकनीकी साझेदारी बनाने
वैश्विक सप्लाई चेन मजबूत करने
एशिया में रणनीतिक संतुलन बनाए रखने
के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नए युग की साझेदारी की शुरुआत?
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति का यह दौरा सिर्फ एक औपचारिक यात्रा नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के रिश्तों को नए स्तर पर ले जाने का संकेत भी है। अगर इस बैठक से ठोस समझौते निकलते हैं, तो आने वाले वर्षों में भारत और दक्षिण कोरिया की साझेदारी एशिया की सबसे मजबूत आर्थिक और तकनीकी साझेदारियों में शामिल हो सकती है।






