आम की मिठास के बीच सियासी कड़वाहट: मालदा की 12 सीटों पर उलझी चुनावी गणित

Share your love

संवाद 24 पश्चिम बंगाल। मालदा जिला, जो अपने मीठे आमों के लिए देशभर में मशहूर है, इन दिनों सियासी गर्मी और तनाव का केंद्र बन गया है। 2026 विधानसभा चुनाव से पहले यहां की 12 सीटों पर राजनीतिक माहौल बेहद जटिल हो गया है, जहां घुसपैठ के आरोप, वोटर लिस्ट संशोधन (SIR) और जातीय-सामाजिक समीकरणों ने चुनावी गणित को उलझा दिया है।

SIR बना सबसे बड़ा मुद्दा
मालदा की राजनीति में इस समय “स्पेशल इंटेंसिव रिविजन” यानी SIR सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बन चुका है। इस प्रक्रिया के तहत बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने से राजनीतिक दलों के बीच टकराव बढ़ गया है। पूरे राज्य में लगभग 90 लाख से ज्यादा नाम हटाए जाने की खबरों ने इस मुद्दे को और संवेदनशील बना दिया है।

घुसपैठ बनाम वोट बैंक की राजनीति
मालदा, जो बांग्लादेश सीमा के करीब स्थित है, लंबे समय से घुसपैठ के आरोपों को लेकर चर्चा में रहा है। भाजपा इस मुद्दे को जोर-शोर से उठा रही है और दावा कर रही है कि SIR के जरिए अवैध घुसपैठियों की पहचान हुई है। वहीं तृणमूल कांग्रेस (TMC) का आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया “वोट बैंक को प्रभावित करने की रणनीति” है, जिससे खास समुदायों को निशाना बनाया जा रहा है।

12 सीटों पर फंसी चुनावी गणित
मालदा जिले की सभी 12 विधानसभा सीटों पर स्थिति बेहद पेचीदा हो गई है। यहां जातीय समीकरण, अल्पसंख्यक वोट, स्थानीय मुद्दे और SIR से प्रभावित वोटरों का संतुलन – सब मिलकर चुनाव को अनिश्चित बना रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि यहां सिर्फ गणित नहीं, बल्कि “ग्राउंड केमिस्ट्री” यानी स्थानीय माहौल और गठजोड़ ज्यादा अहम भूमिका निभाएंगे।

बढ़ता तनाव और विरोध प्रदर्शन
SIR को लेकर मालदा में तनाव इस कदर बढ़ा कि विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिले। एक घटना में न्यायिक अधिकारियों को घंटों तक घेरकर रखा गया, जिससे प्रशासनिक स्तर पर भी चिंता बढ़ गई।

महिलाओं और गरीब वर्ग पर ज्यादा असर
रिपोर्ट्स के मुताबिक, वोटर लिस्ट से नाम हटाने की प्रक्रिया का असर महिलाओं और गरीब वर्ग पर ज्यादा पड़ा है। दस्तावेजों की कमी, बार-बार पता बदलने और सामाजिक कारणों की वजह से बड़ी संख्या में महिलाएं इस प्रक्रिया में फंस गईं, जिससे चुनावी भागीदारी प्रभावित हो सकती है।

किसे होगा फायदा, किसे नुकसान?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मान लेना गलत होगा कि इस प्रक्रिया से केवल एक पार्टी को फायदा होगा। जहां एक तरफ सत्ताधारी दल को अपने वोट बैंक पर असर का डर है, वहीं विपक्ष को भी अपने समर्थकों के नाम कटने की चिंता सता रही है। ऐसे में यह मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है, क्योंकि दोनों पक्ष जोखिम में नजर आ रहे हैं।

चुनाव से पहले बढ़ी अनिश्चितता
2026 के विधानसभा चुनाव से पहले मालदा की 12 सीटें अब पूरे राज्य की राजनीति का केंद्र बन गई हैं। यहां का परिणाम न केवल स्थानीय समीकरण बल्कि राज्य की सत्ता की दिशा भी तय कर सकता है।

मिठास के बीच सियासी कड़वाहट
मालदा की पहचान भले ही अपने मीठे आमों से हो, लेकिन इस बार यहां चुनावी माहौल में कड़वाहट साफ महसूस की जा रही है। SIR, घुसपैठ और वोटों की जटिल गणित ने इस जिले को एक बड़ा राजनीतिक रणक्षेत्र बना दिया है। अब देखना दिलचस्प होगा कि मतदाता इस उलझन भरे समीकरण में किसे अपना समर्थन देते हैं और किसकी रणनीति पर मुहर लगती है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Get regular updates on your mail from Samvad 24 News