G7 में गूंजेगा ईरान युद्ध का मुद्दा – जयशंकर की अहम एंट्री से बढ़ी कूटनीतिक हलचल
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संवाद 24 नई दिल्ली। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर G7 देशों की अहम बैठक में हिस्सा लेने के लिए फ्रांस पहुंच गए हैं, जहां ईरान युद्ध समेत कई बड़े वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होने जा रही है। इस बैठक को मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ईरान युद्ध बना सबसे बड़ा एजेंडा
G7 देशों की इस बैठक में सबसे ज्यादा फोकस ईरान से जुड़े संघर्ष पर है, जिसने पूरी दुनिया की राजनीति और ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा ईरान में सैन्य कार्रवाई के बाद हालात और ज्यादा संवेदनशील हो गए हैं। G7 के विदेश मंत्री इस मुद्दे पर रणनीति, शांति प्रयास और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर चर्चा कर रहे हैं। साथ ही, तेल सप्लाई और समुद्री मार्गों की सुरक्षा भी एजेंडे में शामिल है।
भारत की भूमिका क्या है?
भारत इस बैठक में “पार्टनर कंट्री” के रूप में शामिल हो रहा है। एस. जयशंकर ने साफ किया है कि भारत किसी भी संघर्ष में मध्यस्थ (mediator) की भूमिका नहीं निभा रहा, बल्कि स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति पर कायम है। भारत की प्राथमिकता क्षेत्र में शांति, संवाद और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा बनी हुई है। हाल ही में जयशंकर ने ईरान के प्रतिनिधियों से बातचीत कर पश्चिम एशिया के हालात पर चिंता भी जताई थी।
वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा
इस बैठक में सिर्फ ईरान ही नहीं, बल्कि यूक्रेन युद्ध, वैश्विक अर्थव्यवस्था, समुद्री सुरक्षा और संयुक्त राष्ट्र सुधार जैसे मुद्दे भी उठाए जा रहे हैं। फ्रांस में हो रही इस दो दिवसीय बैठक में कई देशों के विदेश मंत्री और प्रतिनिधि शामिल हैं, जो आने वाले G7 शिखर सम्मेलन की तैयारी का भी हिस्सा है।
क्यों अहम है यह बैठक?
दुनिया इस समय कई संकटों से जूझ रही है – मिडिल ईस्ट में युद्ध, ऊर्जा संकट और वैश्विक अस्थिरता। ऐसे में G7 मंच पर लिए गए फैसले आने वाले समय की दिशा तय कर सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बैठक से यह साफ होगा कि बड़े देश ईरान संकट को सुलझाने के लिए कूटनीति अपनाएंगे या तनाव और बढ़ेगा।
आगे क्या?
अब नजर इस बात पर है कि क्या G7 देश ईरान युद्ध पर कोई साझा रणनीति बना पाते हैं या मतभेद जारी रहेंगे। भारत की संतुलित भूमिका भी इस पूरे घटनाक्रम में अहम मानी जा रही है।






