रसोई पर महंगाई का दोहरा वार: घरेलू और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों के दामों में भारी उछाल

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​संवाद 24 नई दिल्ली। पूरे देश में आम आदमी को महंगाई का एक बड़ा झटका लगा है। रसोई गैस की कीमतों में हुई अचानक बढ़ोतरी ने गृहणियों के बजट को पूरी तरह से बिगाड़ कर रख दिया है। तेल विपणन कंपनियों ने घरेलू एलपीजी (14.2 किलोग्राम) और कमर्शियल एलपीजी (19 किलोग्राम) दोनों ही श्रेणियों में कीमतों में भारी इजाफा किया है, जो आज यानी 7 मार्च 2026 से प्रभावी हो गया है।

​घरेलू सिलेंडर 60 रुपये महंगा
काफी समय की स्थिरता के बाद, घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में सीधे 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। इस वृद्धि के बाद देश की राजधानी दिल्ली में अब 14.2 किलो वाले सिलेंडर की कीमत 853 रुपये से बढ़कर 913 रुपये पर पहुंच गई है। इसी तरह आर्थिक राजधानी मुंबई में भी दाम 852.50 रुपये से बढ़कर 912.50 रुपये हो गए हैं। दक्षिण भारत के प्रमुख शहर चेन्नई में अब उपभोक्ताओं को एक सिलेंडर के लिए 928.50 रुपये खर्च करने होंगे।

कमर्शियल सिलेंडर पर 115 रुपये की मार
महंगाई की यह मार केवल घरों तक सीमित नहीं है, बल्कि बाहर खाना भी अब महंगा हो सकता है। 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में 115 रुपये की बड़ी वृद्धि की गई है। दिल्ली में इसकी नई कीमत 1883 रुपये, मुंबई में 1835 रुपये और कोलकाता में यह आंकड़ा 1990 रुपये तक पहुंच गया है। चेन्नई में कमर्शियल सिलेंडर अब 2043.50 रुपये का मिलेगा। जानकारों का मानना है कि कमर्शियल गैस महंगी होने से होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों पर खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ना तय है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल और गैस की कीमतों में हो रहे उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ा है। पिछले साल अप्रैल 2025 के बाद से घरेलू गैस की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा गया था, लेकिन इस बार कंपनियों ने एकमुश्त बड़ी बढ़ोतरी कर आम जनता की जेब पर बोझ डाल दिया है।

​आम जनता की प्रतिक्रिया
लखनऊ के गोमती नगर की रहने वाली गृहिणी सरिता सिंह कहती हैं, “पहले से ही सब्जियों और दालों के दाम आसमान छू रहे हैं, अब सिलेंडर पर 60 रुपये बढ़ाना मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए कमर तोड़ने जैसा है। सरकार को इस पर विचार करना चाहिए।” वहीं कमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़ने से छोटे दुकानदार और रेहड़ी-पटरी वाले भी चिंतित हैं, क्योंकि उनके मुनाफे का एक बड़ा हिस्सा अब ईंधन के बिल में चला जाएगा।

​आने वाले दिनों में चुनौती
होली के त्योहार से ठीक पहले गैस की कीमतों में यह बढ़ोतरी उपभोक्ताओं के लिए किसी झटके से कम नहीं है। त्योहारों के सीजन में खपत बढ़ जाती है और ऐसे में बढ़ी हुई दरें घर के खर्चों का संतुलन बिगाड़ सकती हैं। फिलहाल, विपक्ष ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है, लेकिन तेल कंपनियों का कहना है कि लागत बढ़ने के कारण यह फैसला लेना अनिवार्य था।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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