बिना रजिस्ट्रेशन चल रहे अस्पतालों पर गिरी गाज: पटना में 45 निजी अस्पतालों पर कार्रवाई से मचा हड़कंप
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संवाद 24 बिहार। राजधानी पटना में स्वास्थ्य विभाग ने अवैध और बिना पंजीकरण चल रहे निजी अस्पतालों के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू किया है। इस कार्रवाई के तहत जिले में संचालित 45 निजी अस्पतालों को चिह्नित कर उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग की इस सख्ती से निजी अस्पताल संचालकों में हड़कंप मच गया है। प्रशासन का कहना है कि यह कदम मरीजों की सुरक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
अवैध अस्पतालों पर कसी प्रशासन की नकेल
पटना जिले में लंबे समय से यह शिकायत मिल रही थी कि कई निजी अस्पताल बिना उचित लाइसेंस और पंजीकरण के ही संचालित हो रहे हैं। इन अस्पतालों में न तो पर्याप्त संसाधन मौजूद थे और न ही मानक के अनुरूप चिकित्सा व्यवस्था। शिकायतों के आधार पर स्वास्थ्य विभाग ने जांच अभियान चलाया और पाया कि दर्जनों अस्पताल निर्धारित नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। जांच के बाद प्रशासन ने 45 ऐसे निजी अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी, जिनका संचालन बिना वैध पंजीकरण या आवश्यक मानकों के किया जा रहा था। अधिकारियों के अनुसार, इन अस्पतालों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है और कई मामलों में संचालन पर रोक लगाने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी भी बनी बड़ी समस्या
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कई छोटे निजी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की भारी कमी है। कुछ अस्पतालों में तो ऐसे लोग इलाज करते पाए गए जो विशेषज्ञ चिकित्सक भी नहीं थे। इससे मरीजों की जान जोखिम में पड़ने की आशंका बनी रहती है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कई अस्पतालों में मरीजों का इलाज बिना उचित जांच और संसाधनों के किया जा रहा था। गंभीर मरीजों की हालत बिगड़ने पर उन्हें बाद में बड़े सरकारी अस्पतालों जैसे पीएमसीएच, आईजीआईएमएस, एम्स और एनएमसीएच में रेफर कर दिया जाता था। इस तरह की लापरवाही को देखते हुए विभाग ने सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया।
25 बेड से कम वाले अस्पतालों की विशेष जांच
स्वास्थ्य विभाग की टीम खास तौर पर उन अस्पतालों की जांच कर रही है जिनमें 25 से कम बेड हैं। ऐसे कई छोटे अस्पतालों में न तो विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध हैं और न ही प्रशिक्षित स्टाफ। यही कारण है कि विभाग ने इन संस्थानों की विस्तृत जांच के लिए विशेष टीम गठित की है। टीम अस्पतालों में मौजूद डॉक्टरों की योग्यता, कर्मचारियों की संख्या, चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता और मरीजों के इलाज की व्यवस्था की जांच कर रही है। यदि जांच में कोई अस्पताल मानकों के अनुरूप नहीं पाया जाता, तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
सिविल सर्जन ने दी कड़ी चेतावनी
पटना के सिविल सर्जन डॉ. अविनाश कुमार सिंह ने स्पष्ट कहा है कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि सभी निजी अस्पतालों को राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग और स्वास्थ्य विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सक या प्रशिक्षित स्टाफ नहीं पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर अस्पताल का संचालन भी बंद कराया जा सकता है।
मरीजों की सुरक्षा के लिए जरूरी कार्रवाई
विशेषज्ञों का मानना है कि कई बार छोटे निजी अस्पतालों में संसाधनों की कमी के कारण मरीजों को सही इलाज नहीं मिल पाता। ऐसे मामलों में गलत इलाज या देरी से इलाज होने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए प्रशासन की यह कार्रवाई मरीजों की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि उसका उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि मरीजों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवा मिले। इसके लिए आने वाले दिनों में जांच अभियान और तेज किया जाएगा।
आगे भी जारी रहेगा अभियान
स्वास्थ्य विभाग ने संकेत दिए हैं कि यह कार्रवाई केवल शुरुआत है। पटना जिले में अन्य निजी अस्पतालों की भी जांच की जाएगी। जिन संस्थानों के पास आवश्यक लाइसेंस और मानक व्यवस्था नहीं होगी, उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने सभी निजी अस्पताल संचालकों से अपील की है कि वे जल्द से जल्द अपने संस्थान का पंजीकरण कराएं और स्वास्थ्य विभाग द्वारा तय मानकों का पालन करें, ताकि मरीजों को सुरक्षित और बेहतर इलाज मिल सके।






