देहरादून में भावुक हुए चेहरे: CAA के तहत पाक और अफगान नागरिकों को मिली भारत की नागरिकता, सालों का इंतजार हुआ खत्म

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संवाद 24 उत्तराखंड । राजधानी देहरादून में कल एक ऐतिहासिक और भावुक कर देने वाला दृश्य देखने को मिला। केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत वर्षों से भारत में रह रहे हिंदू शरणार्थियों के लिए कल का दिन उनके जीवन का नया ‘पुनर्जन्म’ साबित हुआ। देहरादून जिला मुख्यालय में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए कई नागरिकों को आधिकारिक तौर पर भारत की नागरिकता के प्रमाण पत्र सौंपे गए।

सालों का संघर्ष और अब अपने देश की मिट्टी का साथ
नागरिकता पाने वाले इन परिवारों की आंखों में खुशी के आंसू साफ झलक रहे थे। इनमें से अधिकांश लोग दशकों पहले धार्मिक उत्पीड़न और असुरक्षा के कारण अपना घर-बार छोड़कर भारत आए थे। देहरादून में शरण लेने के बाद से ही ये लोग लंबी कानूनी लड़ाई और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से गुजर रहे थे। CAA कानून के प्रभावी होने के बाद इनकी नागरिकता का रास्ता साफ हुआ और कल जिलाधिकारी द्वारा इन्हें भारतीय नागरिक होने का गौरव प्रदान किया गया।

देहरादून जिला प्रशासन की सक्रियता
जिलाधिकारी सविन बंसल के नेतृत्व में प्रशासन ने इन आवेदनों की गहन जांच की और केंद्र सरकार के पोर्टल के माध्यम से आए पात्र व्यक्तियों को चिह्नित किया। प्रमाण पत्र सौंपते समय अधिकारियों ने बताया कि यह केवल एक कागज का टुकड़ा नहीं है, बल्कि उन लोगों के लिए सम्मानजनक जीवन जीने की गारंटी है जिन्होंने सालों तक बिना किसी पहचान के संघर्ष किया। अब ये नागरिक भारत में सरकारी योजनाओं का लाभ ले सकेंगे, संपत्ति खरीद सकेंगे और सबसे महत्वपूर्ण, आने वाले चुनावों में अपने मत का प्रयोग कर सकेंगे।

भावुक हुईं कहानियां: “अब हम रिफ्यूजी नहीं, हिंदुस्तानी हैं”
नागरिकता पाने वालों में पाकिस्तान से आए कुछ बुजुर्ग भी शामिल थे, जिन्होंने विभाजन के बाद का दंश झेला था। उन्होंने साझा किया कि वे वर्षों से ‘शरणार्थी’ का ठप्पा लेकर जी रहे थे, लेकिन अब वे गर्व से कह सकते हैं कि वे भारत मां के सपूत हैं। अफगानिस्तान से आए एक युवक ने बताया कि वहां की अस्थिरता के कारण उनका परिवार सब कुछ खो चुका था, लेकिन भारत ने उन्हें गले लगाया और आज कानून ने उन्हें पहचान दे दी।

सियासी हलचल और सुरक्षा के कड़े इंतजाम
CAA को लेकर देशभर में चली लंबी बहस और विरोध प्रदर्शनों के बीच, देहरादून में हुई यह प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई। जिला प्रशासन और पुलिस बल इस दौरान पूरी तरह मुस्तैद रहा। राज्य सरकार ने इसे मानवता की जीत और शरणार्थियों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता करार दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि उत्तराखंड में रह रहे हर पात्र पीड़ित को न्याय दिलाया जाएगा।

एक नई शुरुआत
देहरादून की यह घटना दर्शाती है कि कानून केवल आंकड़ों का खेल नहीं होता, बल्कि यह हजारों जिंदगियों को नई दिशा देने का माध्यम भी है। नागरिकता पाने वाले इन नए भारतीयों के लिए आज की शाम दिवाली से कम नहीं थी। पूरे शहर में इन परिवारों के घरों पर मिठाइयां बांटी गईं और तिरंगा लहराकर अपनी खुशी का इजहार किया गया।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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