नशे की रफ्तार और मासूमों की चीख: द्वारका हादसे के पीछे का खौफनाक सच, क्या रईस बाप की लापरवाही ने ली जान?
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संवाद 24 नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली का द्वारका इलाका एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह कोई उपलब्धि नहीं बल्कि एक रूह कंपा देने वाला सड़क हादसा है। इस हादसे ने न केवल दो परिवारों को ताउम्र का दर्द दिया है, बल्कि समाज के उस पहलू पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं जहाँ रईस परिवारों की लापरवाही मासूमों की जान पर भारी पड़ रही है। नाबालिगों के हाथों में थमाई गई तेज रफ्तार कारों ने एक बार फिर दिल्ली की सड़कों को लाल कर दिया है।
हादसे की वो काली रात: जब मौत बनकर दौड़ी कार
दिल्ली के द्वारका सेक्टर इलाके में बीते दिनों हुई यह घटना किसी डरावने सपने जैसी है। चश्मदीदों के मुताबिक, एक लग्जरी कार बेकाबू होकर सड़क पर दौड़ रही थी। कार की रफ्तार इतनी तेज थी कि ड्राइवर का उस पर से नियंत्रण पूरी तरह खत्म हो चुका था। सड़क किनारे चल रहे बेकसूर लोग इस बात से अनजान थे कि अगले ही पल उनकी जिंदगी हमेशा के लिए खत्म होने वाली है। इस भीषण टक्कर में हताहतों की चीख-पुकार से पूरा इलाका दहल उठा। जब तक लोग मदद के लिए दौड़ते, आरोपी मौके का फायदा उठाकर भागने की फिराक में थे।
नाबालिग के हाथ में स्टीयरिंग: पिता का कबूलनामा या मजबूरी?
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब पुलिस तफ्तीश में पता चला कि गाड़ी कोई अनुभवी ड्राइवर नहीं, बल्कि एक नाबालिग चला रहा था। जैसे ही पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाया, आरोपी नाबालिग के पिता का बयान सामने आया है। आरोपी के पिता ने अपनी बात रखते हुए जो पक्ष पेश किया है, वह कानून और नैतिकता के बीच की एक धुंधली लकीर को दर्शाता है।
जानकारी के अनुसार, पिता ने स्वीकार किया है कि गाड़ी उनके घर की थी, लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि उन्होंने कभी भी अपने नाबालिग बेटे को सार्वजनिक सड़क पर गाड़ी ले जाने की अनुमति नहीं दी थी। पिता का कहना है कि वह उस वक्त घर पर मौजूद नहीं थे और बच्चे ने उनकी अनुपस्थिति में चाबियाँ उठाईं। हालांकि, पुलिस इस थ्योरी को पूरी तरह स्वीकार करने के मूड में नहीं है। कानून के जानकारों का मानना है कि नाबालिग के हाथ में चाबी पहुँचना ही माता-पिता की सबसे बड़ी विफलता है।
कानून का शिकंजा: सिर्फ बेटा ही नहीं, बाप भी घेरे में
दिल्ली पुलिस ने इस मामले में सख्त रुख अख्तियार किया है। नए मोटर व्हीकल एक्ट के तहत अब ऐसे मामलों में केवल गाड़ी चलाने वाले पर ही नहीं, बल्कि गाड़ी के मालिक (अभिभावक) पर भी कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या पिता को इस बात की जानकारी थी कि उनका बेटा अक्सर गाड़ी लेकर निकलता है? आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं ताकि यह पता चल सके कि क्या यह पहली बार था या यह सिलसिला लंबे समय से चल रहा था।
द्वारका में आक्रोश: न्याय की मांग तेज
इस हादसे के बाद द्वारका के निवासियों में भारी रोष है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के समय सड़कों पर “स्पीड थ्रिल” (रफ्तार का रोमांच) युवाओं के लिए एक शौक बन गया है। लोगों ने मांग की है कि ऐसे रईसजादों और उनके लापरवाह माता-पिता को ऐसी सजा मिलनी चाहिए जो समाज के लिए एक नजीर बने। पीड़ित परिवार के घर मातम पसरा है, और उनकी एक ही मांग है— “हमें सिर्फ इंसाफ चाहिए।”






