भव्य रथ पलटा, उत्सव में हड़कंप — 60 फुट ऊँचा मंदिर रथ गिरा, कई घायल
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संवाद 24 तमिलनाडु। धार्मिक उमंग और उत्सव की धूम के बीच अचानक हाहाकार फैल गया, जब तमिलनाडु के तंज़ावुर में आयोजित एक भव्य 60 फुट ऊँचे मंदिर रथ (थेरीन) के गिरने से सात श्रद्धालु घायल हो गए। यह घटना उस समय घटित हुई जब सैंकड़ों लोग त्योहार की रस्मों में भाग ले रहे थे, लेकिन रथ के ढहने से आनंदित माहौल बदल गया और अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय प्रशासन ने इसे एक “गंभीर दुर्घटना” बताया है और हादसे के कारणों की तफ्तीश शुरू कर दी है।
उत्सव की धूम से लेकर दुर्घटना की चपेट तक
स्थानिय निवासियों और श्रद्धालुओं की मानें तो यह रथ उत्सव वर्षा के मौसम के बाद आयोजित किया जा रहा था, और लाखों की संख्या में लोग अपने परिवारों के साथ प्राचीन मंदिर में पहुंच रहे थे। रथ को पारंपरिक तरीके से रस्सियों से खींचा जा रहा था, जिसमें स्थानीय युवा और बुज़ुर्ग दोनों शामिल थे। अचानक, भारी भीड़ और रथ के ऊँचाई के कारण उसका संतुलन खो गया और वह ढह गया, जिससे कई लोग उसके नीचे दब गए। घटनास्थल पर मौजूद एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि रथ गिरने के तुरंत बाद राहत कार्य शुरू कर दिया गया। घायल लोगों को तज्ज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार चल रहा है। अधिकारी ने कहा, “हम हर संभावना का अध्ययन कर रहे हैं और दुर्घटना के मूल कारण का पता लगाने के लिए फॉरेंसिक टीम भी बुलाई गई है।”
घायल स्थिति और प्राथमिक स्वास्थ्य देखरेख
अस्पताल के सूत्रों के अनुसार घायल सभी सातों लोग गंभीर हालत से तो बाहर हैं, लेकिन उनमें कुछ को अभी भी चिकित्सकीय निगरानी के तहत रखा गया है। इनमें से अधिकांश चोटें रथ के गिरने से हुए पानी और लकड़ी के टुकड़ों की चपेट में आने से आई हैं, जबकि कुछ लोगों को सिर और पाँव में चोटें आई हैं। स्थानीय अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि सभी घायल श्रद्धालुओं को सर्वोत्तम इलाज मुहैया कराया जाएगा। रथ दुर्घटना की शुरुआती जांच से यह प्रतीत होता है कि रथ के भार और ऊँचाई का आकलन सही तरीके से नहीं किया गया था। इसके अलावा, भारी भीड़ के कारण नियंत्रित तरीके से रथ का संचालन कठिन हो गया और इसी वजह से संतुलन बिगड़ गया। स्थानीय प्रशासन ने कहा है कि आगे ऐसे आयोजनों में रथ की संरचना की मजबूत तकनीकी जांच अनिवार्य रूप से की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसे हादसे न हों।
प्रशासन की प्रतिक्रिया और सुरक्षा सुधार
तंज़ावुर जिला कलेक्टर ने अपने बयान में कहा, “हम क्षतिग्रस्त लोगों के परिवारों के साथ हैं, और यह सुनिश्चित करेंगे कि उन्हें हर संभव सहायता मिले। प्राथमिक जांच से संकेत मिल रहे हैं कि सुरक्षा मानकों का पालन रथ के निर्माण में नहीं हुआ, जिससे यह दुर्घटना हुई।” उन्होंने आगे यह भी कहा कि पूरी घटना की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है और दोषियों को कड़ी सजा दी जाएगी, यदि यह तय हुआ कि किसी के लापरवाही का हाथ है। पर्यटन और स्थानीय नागरिकों सहित कई लोगों ने भी इस हादसे पर अपनी प्रतिक्रियाएँ व्यक्त की हैं। कुछ का कहना है कि यह दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना थी, लेकिन कुछ ने आयोजकों और मंदिर प्रशासन की योजना और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर कड़ी आलोचना भी की है। स्थानीय निवासी ने बताया, “यह एक बड़ा उत्सव है और लोग हर साल इसे बड़े गर्व से मनाते हैं, लेकिन सुरक्षा का ध्यान रखना आवश्यक है, जिसे इस बार नजरअंदाज किया गया।”
बदलते नियम, बढ़ती जिम्मेदारी
हालांकि रथ उत्सव धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से कई पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण रहा है, लेकिन नियमित रूप से बड़ी भीड़ और भारी संरचनाओं के उपयोग से जुड़े जोखिमों को चुनौती मानते हुए सरकार ने कई सुझाव दिए हैं। इस दुर्घटना के बाद यह अपेक्षा जताई जा रही है कि आगामी त्योहारों में रथ की ऊँचाई को सीमित करना, लोगों की संख्या नियंत्रित करना, और अनुमति-आधारित निर्माण विनियमों का कड़ाई से पालन करना ज़रूरी होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इतिहास के ऐसे कई उत्सव रहे हैं जिनमें भीड़-नियंत्रण और संरचना की मजबूती की चुनौती सामने आई है। रथ जैसे ऊँचे और भारी पर्वकाय ढांचों के लिए आधुनिक तकनीकी उपायों, सुरक्षित रस्सियों और ट्रैक्टोरियल संतुलन तकनीकों का उपयोग अपरिहार्य हो गया है ताकि आयोजन सफल और सुरक्षित दोनों रहें।
सांस्कृतिक विरासत और भविष्य की तैयारी
कई सांस्कृतिक इतिहासकारों का कहना है कि रथ उत्सव हिंदू धर्म में ऐतिहासिक महत्व रखता है और यह सदियों से मनाया जा रहा है। लेकिन समय के साथ बढ़ते जनसंख्या, भीड़ की मात्रा और भारी रथ के ढांचे को देखते हुए यह आवश्यक है कि आधुनिक सुरक्षा उपायों को अपनाया जाए। विशेषज्ञ कहते हैं कि जैसे-जैसे उत्सव का आकार बढ़ता है, वैसे-वैसे उसकी देखरेख और सुरक्षा पर गंभीर ध्यान देना चाहिए।






