महिलाओं के सशक्तिकरण पर केंद्रित बजट-2026, सरकार का बड़ा दांव
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संवाद 24 नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने बजट 2026 में महिलाओं को आर्थिक, सामाजिक और शैक्षिक रूप से मजबूत बनाने के लिए कई अहम घोषणाएँ की हैं। इस बजट में साफ तौर पर यह संकेत दिया गया है कि आने वाले वर्षों में विकास की धुरी महिलाओं को बनाया जाएगा। सरकार का फोकस केवल सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर उन्हें मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं।
शी मार्ट्स की शुरुआत महिला उद्यमियों को मिलेगा नया बाजार
बजट 2026 की सबसे चर्चित घोषणाओं में ‘शी मार्ट्स’ की स्थापना शामिल है। इन विशेष बाजारों के माध्यम से महिला स्वयं सहायता समूहों और महिला उद्यमियों द्वारा तैयार उत्पादों को सीधे उपभोक्ताओं तक पहुँचाने की व्यवस्था की जाएगी। सरकार का मानना है कि अब महिलाओं को अपने उत्पाद बेचने के लिए बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और उन्हें संगठित बाजार उपलब्ध होगा, जिससे उनकी आमदनी में स्थायी बढ़ोतरी संभव हो सकेगी।
लखपति दीदी योजना का विस्तार, आय बढ़ाने पर विशेष जोर
सरकार ने लखपति दीदी योजना के दायरे को और बढ़ाने की घोषणा की है। इस योजना का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को सालाना एक लाख रुपये या उससे अधिक की आय वाला बनाना है। बजट में यह स्पष्ट किया गया है कि महिलाओं को प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और वित्तीय संसाधनों तक आसान पहुँच दी जाएगी, ताकि वे छोटे व्यवसाय शुरू कर सकें और लंबे समय तक आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनी रहें।
हर जिले में गर्ल्स हॉस्टल
बजट 2026 में शिक्षा के क्षेत्र में भी एक बड़ा फैसला लिया गया है। सरकार ने देश के प्रत्येक जिले में कम से कम एक गर्ल्स हॉस्टल स्थापित करने की घोषणा की है। इसका उद्देश्य उन छात्राओं को सुरक्षित और सुविधाजनक आवास उपलब्ध कराना है, जो उच्च शिक्षा के लिए अपने घरों से दूर पढ़ाई करना चाहती हैं। माना जा रहा है कि इस फैसले से लड़कियों की शिक्षा बीच में छूटने की दर में कमी आएगी।
ग्रामीण और शहरी महिलाओं को समान अवसर देने की कोशिश
इस बजट में इस बात पर खास ध्यान दिया गया है कि योजनाओं का लाभ केवल शहरी महिलाओं तक सीमित न रहे। ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को भी रोजगार, स्वरोजगार और बाजार से जोड़ने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। सरकार का मानना है कि जब ग्रामीण महिलाएँ आर्थिक रूप से सशक्त होंगी, तो इसका सीधा असर परिवार और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
आर्थिक आत्मनिर्भरता से बदलेगा सामाजिक ढांचा
विशेषज्ञों का कहना है कि बजट 2026 में की गई ये घोषणाएँ केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का भी संकेत हैं। जब महिलाएँ कमाई में भागीदार बनेंगी, तो उनकी भूमिका परिवार और समाज में और मजबूत होगी। निर्णय-निर्माण में उनकी भागीदारी बढ़ेगी और आने वाली पीढ़ियों के लिए शिक्षा और विकास के नए रास्ते खुलेंगे।
देश के विकास में महिलाओं की भूमिका को नई पहचान
कुल मिलाकर बजट 2026 को महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है। शी मार्ट्स, लखपति दीदी योजना और गर्ल्स हॉस्टल जैसी घोषणाएँ यह बताती हैं कि सरकार अब महिलाओं को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि विकास की साझेदार बनाना चाहती है। आने वाले वर्षों में इन योजनाओं का असर जमीनी स्तर पर दिखने की उम्मीद जताई जा रही है।






