अपराध के मुद्दे पर बिहार में सियासी संग्राम, तेजस्वी के आरोपों पर जेडीयू का पलटवार
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संवाद 24 बिहार। बिहार में अपराध और कानून-व्यवस्था को लेकर एक बार फिर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव द्वारा राज्य में अपराध बढ़ने के आरोप लगाए जाने के बाद सत्तारूढ़ जनता दल (यूनाइटेड) ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। जेडीयू नेताओं का कहना है कि विपक्ष बिना तथ्यों के बयानबाज़ी कर जनता को गुमराह कर रहा है।
जेडीयू ने बताया आरोप निराधार
जेडीयू का कहना है कि तेजस्वी यादव द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं और इनका वास्तविक स्थिति से कोई लेना-देना नहीं है। पार्टी नेताओं के अनुसार बिहार सरकार अपराध के खिलाफ सख्त रुख अपनाए हुए है और किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जा रहा। जेडीयू ने साफ कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए सरकार की छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है।
नीतीश सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति
पार्टी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में अपनाई जा रही ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2005 से ही अपराध पर कड़ा नियंत्रण रखा गया है। पुलिस और प्रशासन को पूरी छूट दी गई है कि वे अपराधियों पर सख्त कार्रवाई करें, ताकि आम जनता सुरक्षित महसूस कर सके।
कानून-व्यवस्था मजबूत करने के दावे
जेडीयू नेताओं ने कहा कि सरकार ने पुलिस बल को मजबूत किया है, आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया है और अपराध के मामलों में त्वरित जांच सुनिश्चित की जा रही है। उनका दावा है कि इन प्रयासों के चलते अपराधियों में कानून का भय बना हुआ है और कई मामलों में त्वरित सजा भी सुनिश्चित की गई है।
तेजस्वी यादव का सरकार पर पलटवार
दूसरी ओर राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव का कहना है कि राज्य में आम लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उनका दावा है कि अपराध की घटनाएं बढ़ी हैं और सरकार को केवल बयान देने के बजाय जमीनी हकीकत स्वीकार कर ठोस कदम उठाने चाहिए।
चुनावी राजनीति में अपराध बना मुद्दा
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में बिहार की राजनीति में अपराध और कानून-व्यवस्था बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकता है। सत्तापक्ष अपनी नीतियों और उपलब्धियों को गिनाने में जुटा है, जबकि विपक्ष सरकार को इस मुद्दे पर घेरने की रणनीति बना रहा है। कुल मिलाकर, अपराध को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जारी यह जुबानी जंग अभी थमने के आसार नहीं दिखा रही। आने वाले दिनों में यह बहस और तेज हो सकती है, जिस पर बिहार की जनता की निगाहें टिकी रहेंगी।






