28वें कॉमनवेल्थ स्पीकर्स कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन: पीएम मोदी बोले विविधता ही भारत के लोकतंत्र की असली शक्ति
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संवाद 24 नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को नई दिल्ली के संविधान सदन में आयोजित कॉमनवेल्थ स्पीकर्स एंड प्रेसाइडिंग ऑफिसर्स कॉन्फ्रेंस के 28वें संस्करण का उद्घाटन किया। इस अवसर पर 42 देशों के 61 स्पीकर्स और प्रेसाइडिंग ऑफिसर्स मौजूद रहे। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने अपनी विविधता को लोकतंत्र की कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी सबसे बड़ी ताकत में बदला है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज यह चौथा अवसर है जब कॉमनवेल्थ स्पीकर्स कॉन्फ्रेंस का आयोजन भारत में हो रहा है। इस वर्ष सम्मेलन की थीम “Effective Delivery of Parliamentary Democracy” है, जो वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में अत्यंत प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के समय दुनिया को संदेह था कि इतनी विविधताओं वाला देश लोकतंत्र को संभाल पाएगा या नहीं, लेकिन भारत ने इन आशंकाओं को पूरी तरह गलत साबित किया।
लोकतंत्र ने दी स्थिरता और गति
पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने यह दिखाया है कि मजबूत लोकतांत्रिक संस्थान और प्रक्रियाएं न केवल स्थिरता देती हैं, बल्कि निर्णय लेने की गति और विकास का पैमाना भी बढ़ाती हैं। उन्होंने कहा कि भारत में लोकतंत्र का अर्थ केवल चुनाव नहीं, बल्कि अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाना है।
प्रधानमंत्री ने भारत की आर्थिक और तकनीकी उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। भारत के पास विश्व का सबसे बड़ा डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म यूपीआई है, देश वैक्सीन उत्पादन में वैश्विक स्तर पर अग्रणी है और स्टील, स्टार्टअप, एविएशन तथा रेल नेटवर्क जैसे क्षेत्रों में भी भारत शीर्ष देशों में शामिल हो चुका है।
गरीबी उन्मूलन और लोक कल्याण पर जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र को लेकर एक और आशंका यह थी कि भारत विकास नहीं कर पाएगा, लेकिन बीते कुछ वर्षों में लोक कल्याण की नीतियों के जरिए 25 करोड़ से अधिक लोग गरीबी से बाहर निकले हैं। उन्होंने कहा कि सरकार बिना किसी भेदभाव के समाज के हर वर्ग तक योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित कर रही है।
लोकसभा स्पीकर का संबोधन
इस अवसर पर ओम बिरला ने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में संसदीय संवाद, सहयोग और साझा मूल्यों को मजबूत करने के उद्देश्य से यह सम्मेलन आयोजित किया गया है। उन्होंने कहा कि भारतीय संसद की सात दशकों से अधिक की यात्रा में जनकल्याण आधारित नीति निर्माण के जरिए लोकतंत्र को लगातार सशक्त किया गया है।
कॉमनवेल्थ स्पीकर्स कॉन्फ्रेंस का यह संस्करण वैश्विक मंच पर संसदीय लोकतंत्र की प्रभावी भूमिका और उसके भविष्य को लेकर भारत के दृष्टिकोण को मजबूती से सामने रखता है।






