H-1B वीजा में देरी भारतीयों पर भारी: 182 दिन पूरे होते ही नौकरी से टैक्स तक दोहरी मार
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संवाद 24 नई दिल्ली। अमेरिका में काम करने वाले H-1B वीजा धारक भारतीयों के सामने अभूतपूर्व संकट खड़ा हो गया है। भारत आए कई प्रोफेशनल वीजा स्टैंपिंग में हो रही देरी के कारण अमेरिका लौट नहीं पा रहे हैं। इसका सीधा असर उनकी नौकरी, सैलरी और टैक्स स्थिति पर पड़ रहा है। हालात ऐसे बन रहे हैं कि एक तरफ अमेरिकी नियोक्ता नाराज़ हैं, तो दूसरी ओर भारतीय आयकर कानून भी शिकंजा कस सकता है।
वीज़ा स्टैंपिंग में देरी से बिगड़े हालात
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, H-1B वीजा इंटरव्यू की तारीखें लगातार आगे खिसक रही हैं और कई मामलों में मार्च–अप्रैल या उससे आगे की डेट दी जा रही है। इसकी वजह से अमेरिका में काम करने वाले भारतीय कर्मचारी भारत में फंसे हुए हैं। इमिग्रेशन विशेषज्ञों का कहना है कि स्टार्टअप और छोटी कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर है, क्योंकि वहां वर्क-फ्रॉम-रिमोट की सीमित सुविधा है।
सोशल मीडिया जांच बनी बड़ी वजह
सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन की ओर से वीजा आवेदकों की सोशल मीडिया गतिविधियों की कड़ी जांच की जा रही है। इसी अतिरिक्त जांच प्रक्रिया के कारण वीजा स्टैंपिंग में असामान्य देरी हो रही है, जिससे हजारों भारतीय प्रोफेशनल अनिश्चितता में फंस गए हैं।
182 दिन पूरे हुए तो टैक्स का खतरा
इमिग्रेशन लॉ फर्म सर्वांक एसोसिएट्स की फाउंडर अंकिता सिंह के अनुसार, यदि कोई H-1B वीजा धारक एक वित्तीय वर्ष में 182 दिन या उससे अधिक समय भारत में रह जाता है, तो वह आयकर कानून के तहत ‘रेसिडेंट’ माना जाएगा। ऐसी स्थिति में उसकी वैश्विक आय भारत में टैक्स के दायरे में आ सकती है, जिससे दोहरे कर का जोखिम पैदा हो जाता है।
नियोक्ता कंपनियां भी दबाव में
वीज़ा संकट का असर सिर्फ कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। कई अमेरिकी कंपनियां कंप्लायंस और टैक्स से जुड़े जोखिमों को समझने के लिए इमिग्रेशन कंसल्टेंट्स और लीगल फर्मों से सलाह ले रही हैं। कुछ कंपनियां अपने कर्मचारियों को भारत से रिमोट वर्क की अनुमति दे रही हैं या उन्हें भारतीय सहयोगी इकाइयों में अस्थायी रूप से शिफ्ट कर रही हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इससे कंपनियों पर भारत में कॉर्पोरेट टैक्स लागू होने का खतरा भी बढ़ सकता है।
टर्मिनेशन का अल्टीमेटम
स्थिति की गंभीरता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि कुछ कर्मचारियों को अमेरिकी नियोक्ताओं की ओर से टर्मिनेशन की चेतावनी तक दी गई है। Davis & Associates की इंडिया हेड सुकन्या रमन के अनुसार, ऐसे मामले सामने आए हैं जहां कर्मचारियों से कहा गया है कि पेड लीव खत्म होने के बाद अगर वे अमेरिका लौटकर काम शुरू नहीं कर पाए, तो नौकरी जाना तय है। कई कर्मचारी अब अपनी नौकरी बचाने के लिए वकीलों की मदद ले रहे हैं।
अनिश्चितता के बीच फंसे हजारों भारतीय
H-1B वीजा स्टैंपिंग में हो रही देरी ने भारतीय प्रोफेशनल्स को ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहां उन्हें नौकरी, सैलरी और टैक्स—तीनों मोर्चों पर संघर्ष करना पड़ रहा है। जब तक वीजा प्रक्रिया में तेजी नहीं आती, तब तक यह संकट अमेरिका में काम करने वाले भारतीयों के लिए और गहराने की आशंका बनी हुई है।






