जहां है रेत की भरमार, उस सऊदी अरब को ऑस्ट्रेलिया से रेत क्यों खरीदनी पड़ रही? असली वजह चौंका देगी
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संवाद 24 डेस्क। अक्सर हम सोचते हैं कि सऊदी अरब जैसे देश जहाँ अधिकांश ज़मीन रेगिस्तान से ढकी है, वहाँ रेत की कमी कैसे हो सकती है? लेकिन तथ्य यह है कि सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देश ऑस्ट्रेलिया, चीन और बेल्जियम जैसे देशों से निर्माण-योग्य रेत आयात करते हैं, और इसके पीछे वैज्ञानिक व औद्योगिक कारण हैं जो आपको हैरान कर देंगे।
क्यों रेगिस्तान की रेत काम नहीं आती?
रेगिस्तान जहाँ तक नज़र जाती है वहाँ रेत भले ही प्रचुर मात्रा में हो, लेकिन प्राकृतिक रूप से वहाँ की रेत का बनावट (texture) निर्माण के काम के लिए उपयुक्त नहीं होती।
???? गोल और चिकनी रेत: हवा के निरंतर प्रभाव के कारण रेगिस्तानी रेत के कण हजारों सालों में इतनी चिकनी और गोल हो जाते हैं कि वे सीमेंट और पानी के साथ मजबूती से नहीं जुड़ते। इस वजह से यह रेत कंक्रीट में मजबूती नहीं दे पाती — और कंक्रीट की मजबूती के लिए सख्त, एंगल्ड (angular) कण ज़रूरी होते हैं।
???? निर्माण-गुणवत्ता की कमी: जब रेत के कण गोल और चिकने होते हैं, तो वे एक दूसरे के साथ अच्छी तरह बंधते ही नहीं हैं, जिससे कंक्रीट की संरचना कमजोर होती है। इसलिए रेगिस्तानी रेत स्काइडीलर्स, पुलों या बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण जैसे कार्यों में सफल नहीं हो पाती।
किस तरह की रेत चाहिए?
निर्माण-योग्य रेत वे होती है जिसका बनावट खुरदरी और कोणीय (rough and angular) होता है, जिससे सीमेंट और पानी के साथ यह अधिक मजबूती से बंध सकती है। यह प्रकार की रेत अक्सर नदी के तल, झील के किनारे या समुद्र तटों से मिलती है, जहाँ पानी की गति रेत के कणों की सतह को तेज और खुरदरी रखती है। इतना खास निर्माण-ग्रेड रेत केवल रेगिस्तान में उपलब्ध नहीं होती, यही वजह है कि सऊदी अरब जैसे देश उन देशों से रेत मंगाते हैं जहाँ से यह रूप मिलती है, जैसे ऑस्ट्रेलिया और चीन।
ऑस्ट्रेलिया क्यों बड़ा सप्लायर?
ऑस्ट्रेलिया उन देशों में से एक है जहाँ से उच्च गुणवत्ता वाली निर्माण-गुणवत्ता वाली रेत निर्यात की जाती है। OEC के आंकड़ों के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया ने 2023 में 275 मिलियन डॉलर के लगभग रेत निर्यात किए, और इसमें से सऊदी अरब भी एक महत्वपूर्ण आयातक है। यह रेत नदियों, झीलों या समुद्र तटों से आती है जहाँ कणों की सतह अधिक एंगल्ड होती है, जो कंक्रीट जैसे व्यापक उपयोग वाले निर्माण पदार्थों में अच्छी तरह बंधती है।
Vision 2030 जैसे मेगा-प्रोजेक्ट्स की मांग
सऊदी अरब का Vision 2030 जैसी योजनाएँ महंगी, उच्च-स्तरीय और अत्याधुनिक निर्माण परियोजनाओं पर केंद्रित हैं। इनमें शामिल हैं NEOM, The Line, Red Sea Project और Qiddiya जैसे योजनाबद्ध नागरिक और पर्यटन स्थल। इन प्रोजेक्ट्स के लिए मिलियन टन कंक्रीट की आवश्यकता होती है, और इसी कंक्रीट के लिए उचित बनावट वाली रेत की भारी मांग होती है जिसे केवल रेगिस्तानी रेत पूरा नहीं कर सकती।
इसलिए रेत का आयात एक निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की आवश्यकता से प्रेरित कदम है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि संरचनाएँ मजबूत, सुरक्षित और दीर्घकालिक हों।
खाड़ी के अन्य देश भी आयात कर रहे हैं
सिर्फ सऊदी अरब ही नहीं, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतार और अन्य खाड़ी क्षेत्र भी बाहरी स्रोतों से रेत आयात करते हैं, क्योंकि इन देशों में भी उच्च-स्तरीय निर्माण, आधुनिक इमारतें और उन्नत शहरी विकास के लिए उसी तरह की निर्माण-गत रेत की आवश्यकता होती है।
क्यों यह मुद्दा वैश्विक रूप से महत्वपूर्ण है?
✦ रेत संकट: यूएन पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में हर साल लगभग 50 अरब टन रेत का उपयोग निर्माण कार्यों में होता है, जिससे यह दुनिया में सबसे अधिक निकाला जाने वाला ठोस स्रोत बन चुका है।
✦ पर्यावरणीय प्रभाव: अति-उत्खनन के कारण नदी तलों का कटाव, तटों का क्षरण और जैव विविधता का नुकसान बढ़ रहा है, जिससे अनुसंधानकर्ता इसे एक वैश्विक पर्यावरण समस्या के रूप में देख रहे हैं।
अंततः हम कह सकते हैं कि सऊदी अरब की तरह रेगिस्तान राष्ट्रों का रेत आयात करना पहली नज़र में विरोधाभासी लगता है, पर वास्तविकता यह है कि सभी रेत समान नहीं होती। जहाँ रेगिस्तान रेत भले ही प्रचुर हो, वहाँ निर्माण-ग्रेड रेत की कमी उस तरह की संरचनाओं के निर्माण में बाधा बन रही है, जो शहरी विस्तार, मेगा-प्रोजेक्ट्स और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की नींव रखते हैं। इसीलिए ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों से निर्माण योग्य रेत का निर्यात और आयात जारी है और यह वास्तव में एक तकनीकी-औद्योगिक आवश्यकता है, न कि मात्र भौगोलिक उपलब्धता का संकेत।






