सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान की बौखलाहट, इशाक डार की धमकी; भारत को भेजी चिट्ठी, पर तथ्यों पर मौन
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संवाद 24 नई दिल्ली। सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान की बेचैनी एक बार फिर खुलकर सामने आई है। भारत के सख्त और संप्रभु रुख से घबराए पाकिस्तान ने न केवल बयानबाजी तेज कर दी है, बल्कि युद्ध जैसी धमकियों का सहारा भी लेना शुरू कर दिया है। पाकिस्तान के डिप्टी प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने भारत पर सिंधु जल संधि के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए चिनाब नदी के प्रवाह को लेकर औपचारिक पत्र भेजा है।
भारत के कदमों से पाकिस्तान में खलबली
इस्लामाबाद में दिए बयान में इशाक डार ने कहा कि भारत सिंधु जल संधि को कमजोर कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि यदि भारत ने पानी रोका तो पाकिस्तान इसे “युद्ध की कार्रवाई” मानेगा। हालांकि, डार अपने बयान में यह बताने से बचते दिखे कि भारत ने संधि के किस अनुच्छेद का उल्लंघन किया है।
भारतीय अधिकारियों का स्पष्ट रुख है कि भारत ने अब तक संधि के दायरे में रहते हुए ही कदम उठाए हैं और किसी भी नदी का पानी अवैध रूप से रोका नहीं गया है।
चिनाब के बहाव पर सवाल, सबूत नहीं
पाकिस्तान ने चिनाब नदी के कथित उतार-चढ़ाव को लेकर भारत से स्पष्टीकरण मांगा है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, उसके सिंधु जल आयुक्त ने भारतीय समकक्ष को पत्र भेजा है। भारत का कहना है कि चिनाब सहित सभी नदियों का प्रबंधन तकनीकी और मौसमी कारणों से होता है, जिसमें किसी भी प्रकार की मनमानी या संधि उल्लंघन शामिल नहीं है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, मानसून, बर्फ पिघलने और जलविद्युत परियोजनाओं के नियमित संचालन से जलस्तर में बदलाव सामान्य प्रक्रिया है, जिसे पाकिस्तान बार-बार राजनीतिक रंग देने की कोशिश करता रहा है।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद बदला भारत का रुख
22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया था। इसी क्रम में भारत ने 1960 की सिंधु जल संधि को स्थगित करने का निर्णय लिया। यह संधि विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई थी और भारत ने दशकों तक इसका पालन किया, बावजूद इसके कि पाकिस्तान की धरती से लगातार आतंकवाद को बढ़ावा मिलता रहा।
भारत का स्पष्ट संदेश
भारत का रुख साफ है—आतंक और वार्ता, या आतंक और सहयोग, साथ नहीं चल सकते। जल संसाधनों पर भारत का अधिकार संप्रभु है और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
पाकिस्तान की बयानबाजी को जानकार घरेलू दबाव और अंतरराष्ट्रीय मंच पर सहानुभूति बटोरने की कोशिश मान रहे हैं। फिलहाल भारत की ओर से संयमित लेकिन दृढ़ रुख जारी है, जबकि पाकिस्तान की धमकियों से उसकी बेचैनी साफ झलक रही है।






