नाइजीरिया जल रहा है: 2025 में 7000 से ज़्यादा ईसाई क़त्ल, ट्रंप की उंगली ट्रिगर पर”
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नाइजीरिया, अफ्रीका का सबसे अधिक आबादी वाला देश, लंबे समय से धार्मिक और जातीय हिंसा का शिकार रहा है। लेकिन 2025 में यह संकट चरम पर पहुंच गया है, जब इस्लामिक चरमपंथी समूहों ने ईसाई समुदायों को निशाना बनाते हुए हजारों निर्दोषों की जान ले ली। अनुमानित आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष नाइजीरिया में टेररिज्म से जुड़ी हिंसा में 8,000 से अधिक लोग मारे गए हैं, जिनमें से अधिकांश ईसाई थे।
हाल ही में, 22 नवंबर 2025 को नाइजर राज्य के एक कैथोलिक स्कूल से 303 छात्रों और 12 शिक्षकों का अपहरण कर लिया गया, जो 2014 के चिबोक किडनैपिंग की याद दिलाने वाला है।
इन घटनाओं के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाइजीरिया को खुली चेतावनी दी है: यदि ईसाइयों पर हमले जारी रहे, तो अमेरिका ‘फास्ट, विसियस एंड स्वीट’ सैन्य कार्रवाई करेगा। यह बयान न केवल नाइजीरियाई सरकार के लिए चुनौती है, बल्कि वैश्विक कूटनीति के लिए भी एक खतरा बन गया है। इस लेख में हम इन हमलों के पीछे के कारणों, चरमपंथियों के उद्देश्यों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं का विश्लेषण करेंगे।
नाइजीरिया की धार्मिक विविधता हमेशा से ही तनाव का कारण रही है। देश की आधी आबादी मुस्लिम है, जबकि बाकी ईसाई। उत्तरी क्षेत्रों में इस्लामिक चरमपंथी समूह जैसे बोको हराम और इस्लामिक स्टेट वेस्ट अफ्रीका प्रोविंस (ISWAP) सक्रिय हैं। बोको हराम, जिसका अर्थ है ‘पश्चिमी शिक्षा पाप है’, 2002 में स्थापित हुआ था। इस समूह का मुख्य एजेंडा नाइजीरिया के धर्मनिरपेक्ष संविधान को उखाड़ फेंकना और शरिया कानून पर आधारित एक कट्टर इस्लामिक राज्य स्थापित करना है। वे मानते हैं कि पश्चिमी शिक्षा, लोकतंत्र और गैर-इस्लामिक गठबंधन इस्लाम विरोधी हैं।
2009 में, जब नाइजीरियाई सेना ने उनके नेता मुहम्मद यूसुफ को मार दिया, तो बोको हराम ने बदला लेना शुरू किया। उसके बाद से, यह समूह सैकड़ों हमलों के लिए जिम्मेदार रहा है, जिनमें चर्चों पर बमबारी, गांवों का नरसंहार और स्कूलों का अपहरण शामिल हैं।
ISWAP, जो बोको हराम का ही एक अलग धड़ा है, 2016 में ISIS से जुड़ गया। यह समूह लेक चाड बेसिन क्षेत्र में सक्रिय है और स्थानीय मुस्लिमों को भी निशाना बनाता है यदि वे उनके कट्टरवाद का समर्थन न करें। इन समूहों की हिंसा का पैमाना इतना व्यापक है कि संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, 2009 से अब तक 35,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। लेकिन 2025 में यह आंकड़ा तेजी से बढ़ा है। ओपन डोर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईसाई समुदाय विशेष रूप से खतरे में हैं, क्योंकि चरमपंथी उन्हें ‘क्रूसेडर्स’ के रूप में देखते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह ‘ईसाई नरसंहार’ का सरलीकरण है; वास्तव में, हिंसा धार्मिक के साथ-साथ जातीय और आर्थिक भी है। अधिकांश पीड़ित मुस्लिम भी हैं, जो गरीबी और बेरोजगारी से जूझ रहे उत्तरी क्षेत्रों में रहते हैं।
हाल की घटनाएं इस संकट की गंभीरता को उजागर करती हैं। 19 नवंबर 2025 को, काडुना राज्य में एक चर्च पर हमला हुआ, जिसमें दो लोग मारे गए और पादरी समेत कई लोग अपहृत कर लिए गए। यह हमला बोको हराम से जुड़े गुटों का था, जो ईसाई प्रतीकों को निशाना बनाते हैं। लेकिन सबसे चौंकाने वाली घटना 22 नवंबर की है, जब सेंट मैरीज कैथोलिक स्कूल पर सशस्त्र हमलावरों ने धावा बोल दिया। 315 छात्रों और स्टाफ को जंगल में ले जाया गया। अगले दिन, 50 छात्र भाग निकले, लेकिन 253 बच्चे और 12 शिक्षक अभी भी बंधक हैं।
यह इस हफ्ते का दूसरा बड़ा अपहरण था, जो नाइजीरिया की असुरक्षा को दर्शाता है। एमनेस्टी इंटरनेशनल के कार्यकारी निदेशक इसा सनुसी ने कहा, “यह पैटर्न परेशान करने वाला है; सरकार की निष्क्रियता से बच्चे लक्ष्य बन रहे हैं।”
इन अपहरणों का उद्देश्य स्पष्ट है: फिरौती वसूलना और सरकार पर दबाव डालना। 2014 के चिबोक अपहरण में 276 लड़कियों को बोको हराम ने ले लिया था, जिनमें से कई अभी भी लापता हैं। वर्तमान अपहरण में भी लड़कियां मुख्य लक्ष्य हैं, क्योंकि चरमपंथी उन्हें ‘पश्चिमी शिक्षा’ के प्रतीक के रूप में देखते हैं। नाइजीरियाई सरकार ने स्कूल बंद करने और सुरक्षा बढ़ाने का आदेश दिया है, लेकिन स्थानीय निवासी कहते हैं कि सेना की उपस्थिति अपर्याप्त है। यूरोपीय संसद ने भी चिंता जताई है और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए कदम उठाने की मांग की है।
अब सवाल उठता है: आखिर इस्लामिक चरमपंथी क्या चाहते हैं? बोको हराम और उसके सहयोगी एक कट्टर इस्लामिक कैलिफेट स्थापित करने के लिए लड़ रहे हैं, जहां शरिया कानून सर्वोपरि हो। वे नाइजीरियाई सरकार को ‘काफिरों का गठबंधन’ मानते हैं और पश्चिमी प्रभाव को इस्लाम का दुश्मन बताते हैं। उनके प्रचार में सोशल मीडिया का बड़ा रोल है, जहां वे सरकार को एंटी इस्लामिक साबित करने की कोशिश करते हैं।
महिलाओं को वे प्रतीक और हथियार दोनों के रूप में इस्तेमाल करते हैं अपहरण कर उन्हें जबरन शादी या लड़ाकू बनाते हैं। लेकिन उनका एजेंडा सिर्फ धार्मिक नहीं; आर्थिक लाभ भी है। अपहरण से करोड़ों की फिरौती मिलती है, जो हथियार खरीदने में लगती है। ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन की रिपोर्ट के अनुसार, बोको हराम की विचारधारा एक्सक्लूसिव है मुसलमानों को भी इस्लाम और ‘एंटी-इस्लामिक प्रैक्टिसेज’ के बीच चुनना पड़ता है। संक्षेप में, वे एक ऐसा समाज चाहते हैं जहां कोई गैर-इस्लामिक तत्व न हो, चाहे वह शिक्षा हो या लोकतंत्र।
इन घटनाओं पर वैश्विक प्रतिक्रिया तेज हुई है, खासकर अमेरिका से। राष्ट्रपति ट्रंप ने 1 नवंबर 2025 को कहा, “ईसाइयों पर नरसंहार हो रहा है। यदि हमला करेंगे, तो यह तेज, क्रूर और मीठा होगा।
ट्रंप की धमकी नाइजीरिया के लिए दोधारी तलवार है। एक ओर, यह अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाएगा, जिससे सरकार को आतंकवाद के खिलाफ कदम उठाने पड़ेंगे। लेकिन यदि अमेरिकी स्ट्राइक हुई, तो नागरिक हानि हो सकती है। इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप ने सलाह दी कि हस्तक्षेप से पहले नाइजीरियाई सेना को मजबूत किया जाए।
इस संकट का समाधान सैन्य से ज्यादा सामाजिक-आर्थिक प्रयासों में है। नाइजीरिया को उत्तरी क्षेत्रों में विकास, शिक्षा और रोजगार पर निवेश करना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को डिप्लोमेसी और मानवीय सहायता पर जोर देना होगा। ट्रंप की ‘स्ट्राइक’ की तैयारी चरमपंथियों को और उकसा सकती है, लेकिन यदि सही दिशा में इस्तेमाल हुई, तो शांति की उम्मीद जाग सकती है। नाइजीरिया के निर्दोष बच्चे और ईसाई समुदाय इंतजार कर रहे हैं, दुनिया को अब कार्रवाई करनी होगी।






