आईआईटी की डिग्री, अमेरिका का सपना और 780 रुपये की एक प्याली चाय

​संवाद 24 नई दिल्ली । सात समंदर पार अमेरिका के लॉस एंजिल्स की सड़कों पर इन दिनों एक भारतीय युवक की चर्चा हर जुबान पर है। यह चर्चा किसी बड़ी टेक कंपनी के सीईओ बनने की नहीं, बल्कि सड़क किनारे ‘मसाला चाय’ का ठेला लगाने की है। लेकिन यह कोई साधारण चायवाला नहीं है; यह कहानी है आईआईटी खड़गपुर (IIT Kharagpur) से ग्रेजुएट प्रभाकर प्रसाद की, जिन्होंने किस्मत के थपेड़ों को अपनी ताकत बनाकर विदेशी धरती पर भारतीय स्वाद का परचम लहरा दिया है। आज उनकी एक प्याली चाय की कीमत 8 डॉलर यानी करीब 780 रुपये है, जिसे पीने के लिए अमेरिकियों की लंबी कतारें लग रही हैं।

​सपनों का शहर और हकीकत की चोट
बिहार से ताल्लुक रखने वाले और भोपाल में पले-बढ़े प्रभाकर प्रसाद की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी से पढ़ाई पूरी करने के बाद हर युवा की तरह उनके भी बड़े सपने थे। प्रभाकर ने अपनी शुरुआत मॉडलिंग और बॉडीबिल्डिंग से की, जिसके लिए वे मुंबई भी गए। हालांकि, वहां उन्हें वह मुकाम नहीं मिला जिसकी उन्होंने उम्मीद की थी। इसके बाद वे अपनी प्रेमिका के पास अमेरिका चले गए और वहां के टेक सेक्टर में नौकरी करने लगे। सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन साल 2025 की आर्थिक मंदी और टेक सेक्टर में हुई भारी छंटनी ने उनकी दुनिया बदल दी। एक झटके में उनकी सुरक्षित नौकरी चली गई।

​हार नहीं मानी, हुनर को बनाया हथियार
विदेशी धरती पर बिना नौकरी के गुजारा करना किसी पहाड़ तोड़ने जैसा था। लेकिन एक आईआईटीयन का दिमाग हार मानने के लिए नहीं बना होता। प्रभाकर ने तय किया कि वे किसी के सामने हाथ फैलाने के बजाय अपना खुद का कुछ शुरू करेंगे। उन्होंने लॉस एंजिल्स की सड़कों पर भारतीय मसाला चाय का ठेला लगाने का साहसी फैसला लिया। शुरुआत में यह कदम जोखिम भरा लग रहा था, क्योंकि अमेरिका जैसे देश में जहां कॉफी का बोलबाला है, वहां चाय के बिजनेस को जमाना आसान नहीं था।

​780 रुपये की एक प्याली का जादू
प्रभाकर के ‘इंडियन टी स्टॉल’ की सबसे खास बात इसकी कीमत और स्वाद है। वे अपनी चाय में शुद्ध भारतीय मसालों—अदरक, इलायची, और दालचीनी—का इस्तेमाल करते हैं, जो अमेरिकियों के लिए एक नया और ताज़ा अनुभव है। आज उनकी दुकान पर एक कप चाय 8 डॉलर (लगभग 780 रुपये) में बिक रही है। लोग न केवल उनके स्वाद के कायल हैं, बल्कि एक पढ़े-लिखे इंजीनियर के इस जज्बे को भी सलाम कर रहे हैं। उनके स्टॉल पर आने वाले ग्राहक उनकी कहानी सुनकर दंग रह जाते हैं कि कैसे एक आईआईटी ग्रेजुएट ने विपरीत परिस्थितियों में खुद को संभाला।

​सोशल मीडिया पर वायरल हुई ‘इंजीनियर की चाय’
प्रभाकर की यह कहानी देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है। लोग उन्हें ‘अमेरिका का आत्मनिर्भर चायवाला’ कह रहे हैं। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि कोई भी काम छोटा नहीं होता और अगर आपके पास हुनर और मेहनत करने का जज्बा है, तो आप दुनिया के किसी भी कोने में अपनी जगह बना सकते हैं। लॉस एंजिल्स की सड़कों पर अब प्रभाकर सिर्फ चाय नहीं बेच रहे, बल्कि भारतीय संस्कृति और संघर्ष की एक मिसाल पेश कर रहे हैं। ​आज प्रभाकर उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए हैं जो छोटी-सी असफलता से टूट जाते हैं। उनकी कहानी याद दिलाती है कि जब एक दरवाजा बंद होता है, तो मेहनत और नवाचार के दम पर हम खुद के लिए नया रास्ता बना सकते हैं।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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