राफा बॉर्डर पर दो साल बाद लौटी हलचल: गाजा की ‘लाइफलाइन’ खुली

संवाद 24 नई दिल्ली। गाजा और मिस्र के बीच का महत्वपूर्ण राफा सीमा द्वार आखिरकार सोमवार को सीमित आवाजाही के लिए फिर से खोल दिया गया। लगभग दो साल के लंबे अंतराल और भारी संघर्ष के बाद इस सीमा का खुलना राहत की एक धुंधली सी किरण की तरह देखा जा रहा है। मई 2024 में इजरायली सैन्य नियंत्रण के बाद से यह रास्ता पूरी तरह बंद था, जिससे गाजा के लाखों लोग दुनिया से कटे हुए थे।

उम्मीदों की सीमित उड़ान
हालांकि इस सीमा को खोल दिया गया है, लेकिन फिलहाल यह पूरी तरह से स्वतंत्र आवाजाही के लिए नहीं है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्तमान में केवल बीमार और गंभीर रूप से घायल मरीजों को ही इलाज के लिए बाहर जाने की अनुमति मिल रही है। इजरायली और मिस्र के अधिकारियों के बीच हुए समझौते के तहत, प्रति दिन केवल 50 लोगों को ही गाजा से मिस्र जाने और 50 लोगों को मिस्र से गाजा में प्रवेश करने की मंजूरी दी जा रही है। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, लगभग 20,000 ऐसे मरीज हैं जिन्हें तुरंत विदेश में इलाज की जरूरत है। ऐसे में प्रतिदिन 50 की संख्या ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ के समान है। स्थानीय नागरिक मोहम्मद नासिर, जिनका पैर युद्ध के दौरान काटना पड़ा था, बताते हैं कि उनके लिए यह सीमा एक जीवनदायिनी (Lifeline) है, लेकिन उनके जैसे हजारों लोग अभी भी अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।

सुरक्षा का कड़ा पहरा और अंतरराष्ट्रीय निगरानी
इस बार बॉर्डर के खुलने के साथ ही सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। यूरोपीय संघ के सीमा सहायता मिशन (EUBAM) की टीमें मौके पर मौजूद हैं और पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर रही हैं। बॉर्डर पर कंक्रीट की ऊंची दीवारें और कंटीले तार लगाए गए हैं। लोगों को पैदल ही लगभग 2.5 किलोमीटर का सफर तय करके सीमा पार करनी पड़ रही है। हर यात्री को इजरायली सुरक्षा एजेंसियों के कड़े ‘थ्री-स्टेज’ स्क्रीनिंग प्रोसेस से गुजरना पड़ रहा है।

शांति की ओर एक छोटा कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि राफा बॉर्डर का खुलना अमेरिका द्वारा प्रायोजित संघर्ष विराम (Ceasefire) के दूसरे चरण की शुरुआत है। इजरायल ने पहले इस बॉर्डर को खोलने के लिए अपने अंतिम बंधक के अवशेषों की वापसी की शर्त रखी थी, जो पिछले हफ्ते पूरी हो गई। भले ही अभी केवल पैदल यात्रियों और मरीजों के लिए यह रास्ता खुला है, लेकिन भविष्य में यहां से मानवीय सहायता और व्यापारिक सामान की आवाजाही की उम्मीद जताई जा रही है।

चुनौतियां अभी भी बरकरार
एक तरफ जहां बॉर्डर खुलने की खुशियां हैं, वहीं दूसरी तरफ गाजा में हिंसा का दौर पूरी तरह थमा नहीं है। सोमवार को भी कई क्षेत्रों में सैन्य झड़पें और गोलाबारी की खबरें आईं, जिसमें एक 3 वर्षीय बालक सहित कुछ लोगों की जान जाने की दुखद खबर है। सेव द चिल्ड्रन जैसी संस्थाओं का कहना है कि वर्तमान गति से यदि मरीजों को बाहर भेजा गया, तो सभी जरूरतमंदों तक मदद पहुंचने में एक साल से ज्यादा का समय लग जाएगा, जो कई बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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