संयुक्त संघर्ष से सामरिक साझेदारी तक: भारत-अमेरिका रिश्तों में ‘जयशंकर डिप्लोमेसी’ का अहम मोड़

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संवाद 24 नई दिल्ली। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सोमवार को तीन दिवसीय महत्वपूर्ण अमेरिकी दौरे की शुरुआत की, जिसमें वे वाशिंगटन डी.सी. में आयोजित होने वाली क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टेरियल बैठक में भाग लेंगे और अमेरिकी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से द्विपक्षीय चर्चाओं को अंजाम देंगे।

रणनीतिक चिंताओं से खनिज आपूर्ति तक – दौरे का व्यापक एजेंडा
जयशंकर की यह यात्रा केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि इंडो-अमेरिकी रिश्तों को नई दिशा देने का एक कूटनीतिक प्रयास भी है। दौरे का मुख्य आकर्षण ‘क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टेरियल’ है, जिसे अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो के नेतृत्व में आयोजित किया गया है। इस बैठक का उद्देश्य वैश्विक खनिज आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाना, क्लीन एनर्जी ट्रांज़िशन को बढ़ावा देना और तकनीकी रूप से महत्वपूर्ण खनिजों में रणनीतिक सहयोग को सुनिश्चित करना है। इन क्रिटिकल मिनरल्स में वे तत्व शामिल हैं जिनका उपयोग बैटरी, इलेक्ट्रिक वाहन, हाई-टेक उपकरण और ऊर्जा-संचालित उद्योगों में तेजी से बढ़ रहा है। ये खनिज भारत जैसे बढ़ते हुए तकनीकी और स्वच्छ ऊर्जा बाज़ार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव का परिदृश्य
पिछले कुछ महीनों में दोनों देशों के रिश्तों में तनाव देखा गया है, खासकर व्यापार एवं शुल्क (टैरिफ) को लेकर। वर्ष 2025 के मध्य से अमेरिकी प्रशासन ने भारतीय वस्तुओं पर उच्च शुल्क लगाए, जिसमें कुल मिलाकर 50% तक की दरें शामिल हैं। ये कदम विशेष रूप से भारत की रूसी ऊर्जा पर निर्भरता के कारण लगाए गए अतिरिक्त शुल्क से जुड़े रहे हैं, जिसने द्विपक्षीय आर्थिक वार्ता को प्रभावित किया है।
यह तनाव सिर्फ व्यापार तक ही सीमित नहीं रहा — अमेरिकी नीति-निर्माताओं और भारत के बीच अक्षय ऊर्जा, रक्षा साझेदारी और क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर भी विचारों में मतभेद उभरे हैं। जिसके कारण इस दौरे को द्विपक्षीय रिश्तों में संभावित ‘थॉ (thaw)’ या तनाव कम करने वाला कदम माना जा रहा है।

शिखर वार्ता: रुबियो से मुलाक़ात और आगे की दिशा
जयशंकर ने दौरे से पहले नई दिल्ली में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर से भी व्यापक बातचीत की, जिसमें दोनों पक्षों ने रक्षा, व्यापार और खनिज रणनीतियों सहित कई आयामों पर चर्चा की। गोर ने इसे “उत्पादक और गंभीर बातचीत” बताया, जिसमें साझेदारी के लंबी अवधि के हितों को प्राथमिकता दी गई। अब वाशिंगटन में होने वाली बैठक में जयशंकर मार्को रुबियो और अन्य उच्च-स्तरीय अमेरिकी अधिकारियों से मिलेंगे। इन वार्ताओं में द्विपक्षीय व्यापार समझौते, रणनीतिक साझेदारी, तकनीकी सहयोग, और वैश्विक सुरक्षा समेत कई विषय शामिल होने वाले हैं।

संभावित व्यापार समझौते पर उम्मीदें
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते के लिए पिछले वर्ष कई दौर की बातचीत हुई थी, जिसका लक्ष्य दोनों देशों के बीच सीमा शुल्क बाधाओं को कम करना था। हालांकि मामलों में पिछड़ाव आया, लेकिन मौजूद हालात में नई रणनीतिक बैठकें दोनों पक्षों के समाधान-मुखी रुख को दर्शाती हैं, जिससे संभावित व्यापार समझौते की दिशा में आगे बढ़ने की उम्मीद बढ़ी है। विशेषज्ञ यह मानते हैं कि खनिजों, क्लीन ऊर्जा और तकनीकी आपूर्ति श्रृंखलाओं पर सहयोग बढ़ने से महाद्वीपीय एवं वैश्विक व्यापार संबंधों को मजबूती मिलने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही, यदि व्यापार समझौते पर प्रगति होती है, तो यह दशकों से दोनों देशों के बीच चल रहे आर्थिक तनाव में कमी ला सकता है।

भविष्य की कूटनीति और रणनीतिक संतुलन
यह दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारतीय विदेश नीति का केंद्र अब केवल आर्थिक भागीदारी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वैश्विक रणनीति, ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी भावी सहयोग तक विस्तारित हो गया है। आने वाले दिनों में यह तय करेगा कि कैसे भारत और अमेरिका, दोनों अपनी अंतरराष्ट्रीय भूमिका को साझा हितों के आधार पर संतुलित कर सकते हैं।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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