क्यूबा को घेरने की रणनीति तेज, अमेरिका ने सहयोगी देशों को दी कड़ी चेतावनी
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संवाद 24 अमेरिका। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्यूबा को दी जा रही तेल की सप्लाई पर नई कड़ी कार्रवाई करते हुए एक कार्यकारी आदेश (Executive Order) पर हस्ताक्षर किए हैं, जो उन देशों पर टैरिफ (टैक्स) लागू करने की अनुमति देता है जो क्यूबा को कच्चा तेल बेचते या सप्लाई करते हैं। इस कदम का मकसद कम्युनिस्ट-शासित क्यूबा को और अधिक आर्थिक रूप से अलग करना है, जिससे उसकी ऊर्जा आपूर्ति और कमजोर हो सकती है। यह आदेश अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं और विदेश नीति रणनीति के तहत जारी किया गया है, जिसमें यह कहा गया है कि क्यूबा “अमेरिका के लिए असाधारण खतरों” से जुड़ा हुआ है। आदेश के तहत यह तय नहीं किया गया कि टैरिफ की दरें क्या होंगी, लेकिन यह स्पष्ट है कि इस नीति से तेल आपूर्ति करने वाले देशों पर दबाव बढ़ेगा, खासकर उन पर जिन्होंने लंबे समय से क्यूबा को ईंधन दिया है।
क्यूबा की ऊर्जा आपूर्ति संकट — तेजी से बढ़ता दबाव
क्यूबा अब मुश्किल दौर से गुजर रहा है। देश के पास अब केवल लगभग 15 से 20 दिनों के तेल भंडार बचे हैं, और इसे लगातार बिजली कटौती, गैसोलीन की कमी तथा भारी आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है। यह संकट तब और गहरा गया जब वेनेजुएला, जो पहले क्यूबा का प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ता था, हाल ही में तेल भेजना बंद कर दिया। इस स्थिति ने मेक्सिको की भूमिका को और महत्वपूर्ण बना दिया था। पिछले कुछ हफ्तों में मेक्सिको ने क्यूबा को तेल की आपूर्ति को अस्थायी रूप से रोक दिया, जिसे राष्ट्रपति क्लॉडिया शाइनबौम ने “एक संप्रभु निर्णय” बताया है, यह कहते हुए कि यह अमेरिका के दबाव के कारण नहीं लिया गया निर्णय था। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन की यह नई नीति मेक्सिको पर बहुत राजनीतिक और आर्थिक दबाव डाल सकती है।
अमेरिका की रणनीति: क्यूबा को अलग करना
अमेरिका के इस कदम का मूल लक्ष्य क्यूबा की आर्थिक और राजनीतिक मजबूती को कमजोर करना है। ट्रंप प्रशासन का दावा है कि क्यूबा के शासन को “विरोधी देशों और आतंकवादी समूहों” के साथ संबंधों के कारण रोकना आवश्यक है, और इसलिए उन सप्लायर्स पर टैरिफ लगाए जाएंगे जो अभी भी क्यूबा को तेल या तेल सम्बंधित सामग्री देते हैं। ऐसा माना जा रहा है कि यह नीति एक राष्ट्रीय आपातकाल घोषणा के तहत लागू की जा रही है, जिससे अमेरिका को अधिक शक्तियां मिलती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम अमेरिका की विदेश नीति में तेजी से अधिक आक्रामक रुख का संकेत देता है, जहां व्यापार नीतियों को विदेशी राजनयिक दबाव और आर्थिक प्रतिबंध के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। यह नीति विशेष रूप से लैटिन अमेरिका और कैरेबियन में अमेरिका-क्यूबा संबंधों को और तनावपूर्ण बना सकती है।
मेक्सिको की मुश्किल स्थिति
मेक्सिको क्यूबा का एक ऐतिहासिक सहयोगी रहा है और समय-समय पर तेल आपूर्ति प्रदान करता रहा है। पिछले वर्षों में मेक्सिको लगभग 20,000 बैरल प्रति दिन क्यूबा को सप्लाई करता रहा है, लेकिन यह मात्रा घटकर अब कुछ हजार बैरल रह गई है। ट्रंप की नई नीति के कारण मेक्सिको को तय करना होगा कि वह अमेरिकी दबाव की चुनौतियों के बीच अपने क्यूबा समर्थन को जारी रखता है या अमेरिका-मेक्सिको के बड़े व्यापार समझौतों के लिये समझौता करता है। राष्ट्रपति शाइनबौम ने कहा है कि तेल सप्लाई रोकना “मेक्सिको का संप्रभु अधिकार” है, लेकिन तेल रुकने के समय और अमेरिका की नीति की घोषणा के बीच का तालमेल यह संकेत देता है कि यह निर्णय अमेरिका-मेक्सिको संबंधों को एक जटिल चौराहे पर ला खड़ा कर सकता है।
वैश्विक प्रभाव और भविष्य की दिशा
टैरिफ की इस नई नीति से न केवल क्यूबा, बल्कि पूरे क्षेत्र में राजनीतिक और आर्थिक प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि क्यूबा की तेल आपूर्ति और अधिक प्रभावित होती है, तो यह देश में खानपान, ऊर्जा वितरण, कृषि और रोज़मर्रा की जीवन स्थितियों पर तीव्र प्रभाव डाल सकता है। इसके साथ ही पड़ोसी देशों को भी यह तय करना होगा कि वे अमेरिका या क्यूबा के साथ अपने रिश्तों को किस प्रकार संतुलित करेंगे।






