मानवता की आड़ में आतंक: दान के रास्ते कैसे बन रहे हैं खतरे का ज़रिया
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संवाद 24 नई दिल्ली । दुनिया भर में आतंकवाद अब सिर्फ़ हथियारों या हिंसक हमलों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसने अपने लिए धन जुटाने के नए और चौंकाने वाले रास्ते खोज लिए हैं। हालिया अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तान से जुड़े कई आतंकी संगठन अब “मानवतावादी सहायता” और “दान” जैसे शब्दों का सहारा लेकर वैश्विक स्तर पर फंड इकट्ठा कर रहे हैं। यह तरीका इसलिए खतरनाक है क्योंकि इसमें आम लोग अनजाने में आतंक के नेटवर्क का हिस्सा बन जाते हैं।
दान और राहत के नाम पर पैसा इकट्ठा करने की रणनीति
रिपोर्ट में बताया गया है कि ये संगठन आपदा राहत, गरीबों की मदद, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर चंदा जुटाते हैं। प्राकृतिक आपदाओं, युद्धग्रस्त इलाकों और मानवीय संकटों की भावनात्मक तस्वीरें दिखाकर लोगों से सहायता मांगी जाती है। दान देने वालों को यह आभास तक नहीं होता कि उनका पैसा जरूरतमंदों तक पहुंचने के बजाय आतंकवादी गतिविधियों को मजबूत कर रहा है
धार्मिक मंचों का दुरुपयोग
कई आतंकी संगठन मस्जिदों, धार्मिक सभाओं और सामुदायिक कार्यक्रमों का उपयोग फंडिंग नेटवर्क फैलाने के लिए कर रहे हैं। धर्म और आस्था से जुड़े होने के कारण इन गतिविधियों पर अक्सर सवाल नहीं उठाए जाते। इसी भरोसे का फायदा उठाकर ये संगठन बड़ी मात्रा में नकदी और डिजिटल फंड एकत्र कर लेते हैं, जिसे बाद में प्रशिक्षण, प्रचार और हिंसक गतिविधियों में लगाया जाता है।
पश्चिमी देशों में फैला नेटवर्क
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि इन फंडिंग नेटवर्कों की पहुंच केवल दक्षिण एशिया तक सीमित नहीं है। अमेरिका और यूरोप जैसे देशों में पंजीकृत कुछ चैरिटेबल संस्थाओं के जरिए भी धन इकट्ठा किया जा रहा है। ये संस्थाएं कानूनी रूप से गैर-लाभकारी संगठन के तौर पर काम करती हैं, जिससे उन पर शक करना और कार्रवाई करना मुश्किल हो जाता है।
कानूनी और तकनीकी चुनौतियाँ
अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि ये संगठन पारंपरिक बैंकिंग सिस्टम से बचते हुए जटिल तरीकों से पैसा ट्रांसफर करते हैं। कई बार धन छोटे-छोटे हिस्सों में भेजा जाता है ताकि वह निगरानी एजेंसियों की नजर में न आए। इसके अलावा अलग-अलग देशों के कानून और नियम भी इन नेटवर्कों पर कार्रवाई को और जटिल बना देते हैं।
मानवता बनाम सुरक्षा का टकराव
विशेषज्ञों का कहना है कि मानवीय संगठनों को मिलने वाली स्वतंत्रता और संरक्षण का गलत फायदा उठाया जा रहा है। एक तरफ सरकारें वास्तविक राहत कार्यों को बाधित नहीं करना चाहतीं, वहीं दूसरी तरफ इसी छूट के कारण आतंकी संगठन अपने मंसूबों में कामयाब हो जाते हैं। यह संतुलन बनाना आज वैश्विक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है।
वैश्विक सतर्कता की ज़रूरत
रिपोर्ट में साफ़ चेतावनी दी गई है कि यदि समय रहते दान और राहत से जुड़े फंडिंग चैनलों की कड़ी निगरानी नहीं की गई, तो आतंकवाद को अप्रत्यक्ष रूप से और बल मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारों, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और आम नागरिकों को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि मदद सही हाथों तक पहुंचे।
जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार
यह मुद्दा केवल सुरक्षा एजेंसियों का नहीं है, बल्कि आम नागरिकों की जागरूकता से भी जुड़ा है। दान देने से पहले संस्था की विश्वसनीयता जांचना, उसके कामकाज को समझना और पारदर्शिता की मांग करना आज पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है। क्योंकि जब मानवता की आड़ में आतंक पनपने लगे, तब चुप्पी नहीं, सतर्कता ही सबसे बड़ा हथियार बनती है।






