गाजा में फिर गूंजे गोले, तीन फिलिस्तीनियों की मौत; अमेरिका-इजरायल संपर्क तेज, शांति की कोशिशें जारी
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संवाद 24 नई दिल्ली। मध्य-पूर्व एक बार फिर तनाव की आग में झुलसता नजर आ रहा है। गाजा पट्टी में इजरायली गोलाबारी के चलते तीन फिलिस्तीनी नागरिकों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल बताए जा रहे हैं। यह घटना ऐसे समय पर सामने आई है जब क्षेत्र में पहले से ही अस्थिरता का माहौल है और सीमावर्ती इलाकों में तनाव लगातार बढ़ रहा है।
रिहायशी इलाकों में गोलाबारी से बढ़ा डर
स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, इजरायली हमलों में जिन लोगों की जान गई, वे आम नागरिक थे। गोलाबारी का असर रिहायशी इलाकों तक देखा गया, जिससे महिलाओं और बच्चों में भय का माहौल बन गया। अस्पतालों में घायलों की संख्या बढ़ने की खबर है, जबकि सीमित संसाधनों के कारण इलाज में कठिनाइयों की बात भी सामने आ रही है।
इजरायल का पक्ष: सुरक्षा को लेकर सख्ती
इजरायली सेना का कहना है कि ये कार्रवाई सुरक्षा कारणों से की गई। सेना के मुताबिक, गाजा से होने वाली गतिविधियों को रोकने और अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया। इजरायल पहले भी ऐसी कार्रवाइयों को आत्मरक्षा के दायरे में बताता रहा है।
फिलिस्तीनी प्रशासन ने की कड़ी निंदा
दूसरी ओर, फिलिस्तीनी प्रशासन ने इस हमले की कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन हो रहा है और आम नागरिक इसकी कीमत चुका रहे हैं। प्रशासन ने वैश्विक समुदाय से हस्तक्षेप की अपील की है ताकि हिंसा को रोका जा सके और स्थायी समाधान की दिशा में कदम बढ़ें।
अमेरिका की सक्रिय कूटनीति
इसी बीच, संयुक्त राज्य अमेरिका ने हालात को काबू में लाने के लिए कूटनीतिक स्तर पर प्रयास तेज कर दिए हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात कर क्षेत्रीय स्थिति पर विस्तृत चर्चा की। बातचीत में संघर्षविराम, मानवीय सहायता और आगे की रणनीति जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।
मानवीय संकट और अंतरराष्ट्रीय चिंता
गाजा में लगातार हो रही हिंसा ने मानवीय संकट को और गहरा कर दिया है। बिजली, पानी और चिकित्सा सुविधाओं की कमी आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रही है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने चिंता जताते हुए तत्काल मानवीय सहायता पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
क्षेत्रीय अस्थिरता का वैश्विक असर
विशेषज्ञों का मानना है कि गाजा-इजरायल संघर्ष का असर सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति पर भी पड़ता है। तेल की कीमतों से लेकर अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा तक, इस तनाव की गूंज दूर-दूर तक सुनाई देती है। यही कारण है कि विश्व शक्तियां इस संघर्ष पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।
शांति की उम्मीद और आगे की राह
हालांकि हालिया घटनाएं निराशाजनक हैं, लेकिन कूटनीतिक बातचीत से शांति की उम्मीद अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। अमेरिका समेत कई देश दोनों पक्षों से संयम बरतने और संवाद का रास्ता अपनाने की अपील कर रहे हैं। जानकारों का कहना है कि स्थायी समाधान के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग अनिवार्य है।
आम लोगों की सबसे बड़ी कीमत
हर हमले और जवाबी कार्रवाई के बीच सबसे ज्यादा नुकसान आम नागरिकों को उठाना पड़ता है। गाजा के लोग एक बार फिर अनिश्चित भविष्य के बीच जीने को मजबूर हैं। सवाल यही है कि क्या आने वाले दिनों में हालात सुधरेंगे या यह संघर्ष एक और भयावह मोड़ लेगा।






