ग्रीनलैंड से लेकर टैरिफ तक: ट्रंप का बदला रुख और यूरोप-अमेरिका रिश्तों की नई तस्वीर
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संवाद 24 नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर चल रहे विवाद और यूरोपीय देशों पर प्रस्तावित टैरिफ के मुद्दे पर अपने रुख में बड़ा बदलाव किया है। इस फैसले ने न सिर्फ यूरोप-अमेरिका के रिश्तों को नई दिशा दी है, बल्कि वैश्विक राजनीति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भी हलचल पैदा कर दी है।
दावोस से आया बड़ा संकेत
स्विट्ज़रलैंड के दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच के दौरान ट्रंप ने संकेत दिए कि अमेरिका अब टकराव के बजाय संवाद का रास्ता अपनाना चाहता है। उन्होंने यूरोपीय देशों पर लगाए जाने वाले अतिरिक्त टैरिफ को फिलहाल वापस लेने की घोषणा की, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में राहत देखी गई।
ग्रीनलैंड विवाद की पृष्ठभूमि
ग्रीनलैंड लंबे समय से अमेरिका की रणनीतिक रुचि का केंद्र रहा है। इसकी भौगोलिक स्थिति, प्राकृतिक संसाधन और आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा ने इसे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अहम बना दिया है। ट्रंप के पहले के बयानों ने इस मुद्दे को और संवेदनशील बना दिया था।
यूरोपीय देशों पर टैरिफ की चेतावनी
ग्रीनलैंड को लेकर सहयोग न मिलने पर ट्रंप प्रशासन ने कई यूरोपीय देशों से आने वाले उत्पादों पर 10 से 25 प्रतिशत तक का आयात शुल्क लागू कर दिया था। इस फैसले के बाद यूरोपीय संघ और अमेरिका के बीच व्यापार युद्ध की आशंका और गहरा गई थी, जिससे दोनों पक्षों के रिश्तों में तनाव साफ दिखाई देने लगा।
यूरोप की कड़ी प्रतिक्रिया
यूरोपीय नेताओं ने ट्रंप के टैरिफ प्रस्ताव को अनुचित और सहयोग की भावना के खिलाफ बताया। उनका कहना था कि ग्रीनलैंड का मुद्दा संप्रभुता और स्थानीय जनता की इच्छा से जुड़ा है, जिसे किसी भी दबाव की राजनीति से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
कूटनीति ने लिया नया मोड़
बढ़ते दबाव और अंतरराष्ट्रीय आलोचना के बीच ट्रंप ने टैरिफ पर नरम रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच एक संभावित “फ्रेमवर्क” पर बातचीत जारी है, जिससे भविष्य में टकराव की स्थिति से बचा जा सके।
वैश्विक बाजारों पर असर
टैरिफ वापस लेने की खबर के बाद वैश्विक शेयर बाजारों में सकारात्मक माहौल देखा गया। निवेशकों ने इसे व्यापारिक स्थिरता की ओर कदम माना, जबकि यूरोपीय मुद्राओं और अमेरिकी डॉलर में हलचल दर्ज की गई।
ग्रीनलैंड की स्पष्ट स्थिति
ग्रीनलैंड और डेनमार्क के नेताओं ने साफ किया कि यह क्षेत्र किसी भी तरह की खरीद-फरोख्त या दबाव की राजनीति का हिस्सा नहीं बनेगा। उनका कहना है कि ग्रीनलैंड की भविष्य की दिशा वहां के लोगों की सहमति से ही तय होगी।
रणनीतिक और सुरक्षा पहलू
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का बदला रुख सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि सुरक्षा रणनीति से भी जुड़ा है। अमेरिका आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन की बढ़ती गतिविधियों को लेकर सतर्क है और ग्रीनलैंड को इस दृष्टि से अहम मानता है।
क्या पूरी तरह खत्म हुआ विवाद?
हालांकि टैरिफ हटाने से तनाव कम हुआ है, लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि ग्रीनलैंड को लेकर मतभेद पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। यह मुद्दा आने वाले समय में फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर चर्चा का विषय बन सकता है।
यूरोप-अमेरिका रिश्तों की अगली राह
इस पूरे घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि यूरोप और अमेरिका के रिश्ते अब केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सुरक्षा, रणनीति और वैश्विक राजनीति से गहराई से जुड़े हुए हैं। आने वाले महीनों में यह देखा जाएगा कि यह नया रुख स्थायी साझेदारी में बदलता है या फिर अस्थायी शांति साबित होता है।






