खामेनेई पर आंच आई तो भड़केगा जिहाद! ईरान की संसद की चेतावनी
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संवाद 24 नई दिल्ली। ईरान की संसद ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। संसद के वरिष्ठ सदस्यों ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को किसी भी प्रकार का नुकसान पहुंचता है, तो इसे केवल ईरान पर हमला नहीं, बल्कि पूरे इस्लामिक जगत के खिलाफ साजिश माना जाएगा।
जिहाद शब्द का इस्तेमाल और उसका संदेश
ईरानी संसद के इस बयान में “जिहाद” शब्द का उपयोग किया गया है, जिसे धार्मिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से अत्यंत गंभीर माना जाता है। संसद का कहना है कि ऐसे किसी भी हमले की स्थिति में इसे पवित्र युद्ध की घोषणा समझा जाएगा और इसका जवाब उसी स्तर पर दिया जाएगा।
राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की सख्त भूमिका
ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति ने यह चेतावनी सार्वजनिक की। समिति के अनुसार, सर्वोच्च नेता देश की संप्रभुता और इस्लामी व्यवस्था के प्रतीक हैं, इसलिए उन पर हमला पूरे राष्ट्र और उसकी विचारधारा पर सीधा प्रहार होगा।
बढ़ते अंतरराष्ट्रीय तनाव की पृष्ठभूमि
यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब मध्य-पूर्व में पहले से ही तनावपूर्ण हालात बने हुए हैं। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के साथ ईरान के रिश्ते लंबे समय से तल्ख रहे हैं और हालिया घटनाओं ने इस खाई को और गहरा किया है।
आंतरिक हालात और बाहरी दबाव
ईरान के भीतर आर्थिक चुनौतियां, महंगाई और सामाजिक असंतोष लगातार बढ़ रहा है। इन परिस्थितियों में सरकार पर बाहरी दबाव भी है, जिसे वह अपनी संप्रभुता के लिए खतरा मानती है। संसद का यह बयान उसी दबाव के जवाब के रूप में देखा जा रहा है।
धार्मिक नेतृत्व की केंद्रीय भूमिका
ईरान की शासन प्रणाली में सर्वोच्च नेता केवल राजनीतिक नहीं बल्कि धार्मिक मार्गदर्शक भी होते हैं। संसद का मानना है कि यदि उन्हें निशाना बनाया गया, तो यह पूरे इस्लामी विश्वास पर हमला माना जाएगा, जिसका असर ईरान की सीमाओं से बाहर भी महसूस किया जाएगा।
मध्य-पूर्व की सुरक्षा पर असर
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के बयान से पूरे मध्य-पूर्व की सुरक्षा व्यवस्था पर प्रभाव पड़ सकता है। यदि तनाव बढ़ता है, तो क्षेत्र में अस्थिरता और संघर्ष की आशंका और गहरी हो सकती है।
वैश्विक समुदाय की चिंता
ईरान की इस चेतावनी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी सतर्क कर दिया है। कई देश स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं क्योंकि किसी भी प्रकार का बड़ा टकराव वैश्विक शांति और ऊर्जा आपूर्ति जैसे मुद्दों को प्रभावित कर सकता है।
कूटनीति बनाम टकराव
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान कूटनीतिक दबाव बनाने की रणनीति भी हो सकता है, ताकि संभावित खतरों को पहले ही रोका जा सके। हालांकि, कुछ विशेषज्ञ इसे आंतरिक समर्थन मजबूत करने का प्रयास भी मानते हैं।
अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया क्या होती है। क्या यह चेतावनी केवल शब्दों तक सीमित रहेगी या इससे वैश्विक राजनीति की दिशा बदल सकती है—यह सवाल पूरी दुनिया के सामने है।






