“EU की नई रणनीति: यूक्रेन को पहले ‘सीमित सदस्यता’, पूरे अधिकार बाद में”

संवाद 24 नई दिल्ली। यूरोपीय आयोग ने यूक्रेन को यूरोपीय संघ (EU) में शामिल करने के एक अनूठे और विवादास्पद तरीके पर विचार करना शुरू कर दिया है, जिसमें तेज़ प्रवेश तो मिलेगा लेकिन पूर्ण अधिकार धीरे-धीरे दिए जाएंगे — ताकि देश को युद्ध के बाद सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और पश्चिम के साथ करीब लाया जा सके। वैज्ञानिक और राजनीतिक विशेषज्ञ यह सोच को “पारंपरिक प्रक्रिया का उल्टा मॉडल” कहते हैं, जो इतिहास में पहले कभी नहीं अपनाया गया। यह विचार विशेष रूप से यूक्रेन-रूस युद्ध के संभावित शांति समझौते के हिस्से के रूप में सामने आया है, जिसका लक्ष्य 2027 तक इसकी EU में शामिल होने की दिशा को मज़बूत बनाना है। परंपरागत EU सदस्यता प्रक्रिया में संप्रभु निर्णय, विस्तृत कानूनी सुधार और हर सदस्य देश की मंज़ूरी शामिल है, जो वर्षों तक खिंच सकती है। लेकिन अब प्रस्तावित “membership-lite” मॉडल में यूक्रेन को कुछ सीमित सदस्यता अधिकार तुरंत दिए जा सकते हैं, जबकि पूर्ण अधिकार अनुक्रमिक रूप से लागू होंगे।

क्या है ये “सीमित सदस्यता” मॉडल?
इस नई योजना के तहत:
यूक्रेन को EU में शामिल किया जाएगा लेकिन पारंपरिक पूर्ण अधिकार तत्काल नहीं मिलेंगे। प्रारंभिक चरण में, देश को राजनीतिक रूप से सदस्य के रूप में माना जाएगा। इसके बाद ही यूक्रेन को पूर्ण मत देने का अधिकार और अन्य अधिकार क्रमिक रूप से प्रदान किए जाएंगे।इस तरह की सदस्यता प्रक्रिया यूरोप की सुरक्षा और आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए डिज़ाइन की जा रही है, खासकर ऐसे समय में जब रूस के साथ संघर्ष जारी है। यूरोपीय आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि यूरोपीय संघ को ऐसी “रचनात्मक” सदस्यता प्रणाली ढूंढनी होगी क्योंकि यह समय 1993 में बनाई गई मूल नियमावली जैसा नहीं है और वर्तमान जटिल भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को ध्यान में रखना ज़रूरी है।

विरोध और आलोचना भी तेज़
हालाँकि इस प्रस्ताव को कुछ समर्थकों द्वारा शांति की ओर एक बड़ा क़दम कहा जा रहा है, लेकिन कई EU देशों और सदस्यता की पारंपरिक प्रक्रिया से गुज़रे देशों ने इस पर गंभीर आपत्तियाँ जताई हैं।
वे कहते हैं कि: यह EU की मूल “योग्यता-आधारित (merit-based)” प्रक्रिया को कमजोर कर सकता है। उन देशों (जैसे मोंटेनेग्रो और अल्बानिया) के लिए अनुचित होगा जिन्होंने परंपरागत प्रक्रिया को पूरा किया है। कुछ देश इसे EU के भीतर आंतरिक विभाजन और अस्थिरता बढ़ाने वाला कदम भी मानते हैं। विशेषज्ञों का तर्क है कि हालांकि ऐसे बदलाव से यूक्रेन को तत्काल समर्थन मिलेगा, पर यह नए नियम और प्रक्रिया कितना प्रभावी और व्यावहारिक होगा, इसका निर्णय आसान नहीं होगा।

यूक्रेन और EU: लंबा रास्ता
यूक्रेन ने पहले ही 2022 में EU की सदस्यता की उम्मीदवारी प्राप्त कर ली थी और इसके बाद से ही यह प्रक्रिया कई राजनीतिक और कानूनी चुनौतियों का सामना कर रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस नए “membership-lite” प्रस्ताव से यूरोप-यूक्रेन रिश्तों की दिशा बदल सकती है, लेकिन सबसे बड़े सवाल यही है कि क्या यूरोपीय संघ सभी 27 सदस्य देशों को इस नई राह के लिए राज़ी कर पाएगा।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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