अंतरराष्ट्रीय समुद्री संघर्ष: अमेरिकी शिकंजे में रूसी तेल टैंकर, 3 भारतीय क्रू मेंबर भी हिरासत में
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संवाद 24, नई दिल्ली। समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बीच चल रही रस्साकशी ने अब एक नया और गंभीर मोड़ ले लिया है। उत्तर अटलांटिक महासागर में अमेरिकी सेना और कोस्ट गार्ड ने एक बड़े सैन्य ऑपरेशन को अंजाम देते हुए रूसी झंडे वाले तेल टैंकर ‘मैरीनेरा’ को अपने कब्जे में ले लिया है। इस घटना ने भारत की चिंता इसलिए बढ़ा दी है क्योंकि इस टैंकर पर सवार कुल 28 चालक दल के सदस्यों में 3 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं।
साजिश या सुरक्षा? क्यों हुआ एक्शन?
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह जहाज पहले ‘बेला-1’ के नाम से जाना जाता था और वेनेजुएला पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन कर कच्चा तेल ले जा रहा था। वाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने स्पष्ट किया कि यह जहाज ‘शैडो फ्लीट’ का हिस्सा था, जो अवैध तरीके से प्रतिबंधित देशों के लिए तेल की ढुलाई करता है। आरोप है कि पकड़े जाने के डर से जहाज ने बीच रास्ते में अपना नाम बदला और रूस का झंडा लगा लिया ताकि अंतरराष्ट्रीय कानूनों की आड़ लेकर बचा जा सके।
क्रू मेंबर्स पर लटकी गिरफ्तारी की तलवार
जहाज पर सवार क्रू मेंबर्स की संरचना अंतरराष्ट्रीय है, जिसमें 17 यूक्रेनी, 6 जॉर्जियाई, 3 भारतीय और 2 रूसी नागरिक शामिल हैं। अमेरिकी अटॉर्नी जनरल और वाइट हाउस के बयानों ने इस मामले को और पेचीदा बना दिया है। अमेरिका का कहना है कि क्योंकि यह जहाज एक अदालती वारंट के तहत जब्त किया गया है, इसलिए इसके क्रू मेंबर्स पर अमेरिकी संघीय कानूनों के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है।
रूस का पलटवार: ‘यह समुद्री डकैती है’
दूसरी ओर, रूस ने इस कार्रवाई को ‘समुद्री डकैती’ करार दिया है। रूसी विदेश मंत्रालय ने एक कड़ा बयान जारी करते हुए कहा कि जहाज अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत रूसी झंडे के साथ शांतिपूर्ण तरीके से यात्रा कर रहा था। मॉस्को ने अमेरिका से मांग की है कि वह हिरासत में लिए गए नागरिकों के साथ मानवीय व्यवहार करे और उन्हें जल्द से जल्द स्वदेश लौटने की अनुमति दे।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब वेनेजुएला और रूस के साथ अमेरिका के संबंध बेहद तनावपूर्ण हैं। अब सबकी नजरें भारतीय विदेश मंत्रालय पर हैं कि वह अपने तीन नागरिकों की सुरक्षित रिहाई के लिए क्या कदम उठाता है।






