ईरान में भड़का जनआक्रोश, सड़कों पर उतरे हजारों लोग
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संवाद 24 दिल्ली। ईरान में सरकार के खिलाफ उठ रही असंतोष की लहर अब खुलकर सड़कों पर दिखाई देने लगी है। राजधानी तेहरान सहित कई बड़े शहरों में हजारों लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए ईरानी प्रशासन ने अचानक देशभर में इंटरनेट सेवाओं और अंतरराष्ट्रीय फोन कॉल को बंद कर दिया, जिससे आम नागरिकों का बाहरी दुनिया से संपर्क लगभग कट गया है।
महंगाई और बेरोजगारी बनी विरोध की सबसे बड़ी वजह
बताया जा रहा है कि बीते कुछ दिनों से बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और राजनीतिक फैसलों को लेकर जनता में गुस्सा लगातार बढ़ रहा था। यही नाराजगी अब बड़े विरोध प्रदर्शनों में बदल गई है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार उनकी आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है और समस्याओं का समाधान करने के बजाय सख्ती का रास्ता अपना रही है।
इंटरनेट बंद होते ही और गहराया संकट
इंटरनेट और अंतरराष्ट्रीय कॉल बंद होने से स्थिति और तनावपूर्ण हो गई है। लोग न तो सोशल मीडिया के जरिए अपनी बात रख पा रहे हैं और न ही विदेशों में रह रहे अपने परिजनों से संपर्क कर पा रहे हैं। कई इलाकों में मोबाइल नेटवर्क भी कमजोर बताया जा रहा है, जिससे अफवाहों और आशंकाओं को और हवा मिल रही है। प्रदर्शनों के दौरान कई स्थानों पर सुरक्षा बलों की भारी तैनाती देखी गई है। सड़कों पर बैरिकेडिंग की गई है और कुछ क्षेत्रों में रात के समय आवाजाही पर भी रोक लगाई गई। हालांकि सरकार की ओर से आधिकारिक तौर पर स्थिति को नियंत्रण में बताया जा रहा है, लेकिन जमीनी हालात इससे अलग नजर आ रहे हैं।
विशेषज्ञों की राय: संचार बंदी से बढ़ सकती है नाराजगी
विशेषज्ञों का मानना है कि संचार सेवाएं बंद करना सरकार की वह रणनीति है, जिससे आंदोलनों को संगठित होने से रोका जा सके। लेकिन इससे जनता में नाराजगी और गहरी हो सकती है। युवा वर्ग, छात्र और कामकाजी लोग बड़ी संख्या में इन प्रदर्शनों में शामिल हैं, जो बदलाव की मांग कर रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी उठे सवाल
इस अशांति का असर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देखा जा रहा है। मानवाधिकार संगठनों ने इंटरनेट बंदी को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया है। वहीं कई देशों ने अपने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। फिलहाल यह साफ नहीं है कि सरकार इन प्रतिबंधों को कब तक जारी रखेगी। लेकिन इतना तय है कि ईरान में मौजूदा हालात सिर्फ कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि जनता और सत्ता के बीच बढ़ती दूरी का संकेत दे रहे हैं। आने वाले दिनों में यह संकट किस दिशा में जाएगा, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।






