पूर्ण विश्राम की कला: शवासन से शरीर-मन को गहराई से पुनर्जीवित करने की वैज्ञानिक विधि
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संवाद 24 डेस्क। योग केवल शरीर को मोड़ने-तोड़ने का अभ्यास नहीं है, बल्कि यह शरीर, मन और चेतना के संतुलन की समग्र प्रणाली है। इसी प्रणाली में शवासन (Corpse Pose) एक अत्यंत महत्वपूर्ण आसन माना जाता है। पहली नज़र में यह आसन बहुत सरल लगता है बस लेटना ही तो है लेकिन वास्तव में इसे सही तरीके से करना गहन जागरूकता और अभ्यास की मांग करता है।
प्राचीन योग परंपरा में विश्राम को उतना ही महत्व दिया गया है जितना सक्रिय अभ्यास को। योग दर्शन के महान आचार्य पतंजलि ने भी मानसिक शांति और चित्त की स्थिरता को योग का मूल उद्देश्य बताया है, और शवासन उसी दिशा में एक प्रभावी साधन है।
यह आसन शरीर की थकान दूर करने, तंत्रिका तंत्र को शांत करने, तनाव कम करने और मानसिक स्पष्टता बढ़ाने के लिए अत्यंत प्रभावी माना जाता है। आधुनिक विज्ञान भी यह मानता है कि गहरा विश्राम (Deep Relaxation Response) शरीर में हार्मोनल संतुलन, हृदय गति नियंत्रण और मानसिक स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
शवासन क्या है?
शवासन दो शब्दों से मिलकर बना है—“शव” (मृत शरीर) और “आसन” (स्थिति)। इसका अर्थ है ऐसा स्थिर और पूर्ण विश्राम जिसमें शरीर पूरी तरह निष्क्रिय हो लेकिन चेतना जागरूक बनी रहे।
इस आसन का उद्देश्य है:
• मांसपेशियों का पूर्ण विश्राम
• मानसिक तनाव का रिलीज
• शारीरिक ऊर्जा की पुनः प्राप्ति
• ध्यान की अवस्था की तैयारी
योग अभ्यास के अंत में शवासन करने की परंपरा इसलिए है क्योंकि यह शरीर को सक्रिय अभ्यास से शांत अवस्था में लाता है।
शवासन करने की तैयारी
शवासन शुरू करने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखें:
1. शांत और हवादार स्थान चुनें।
2. योग मैट या कंबल का उपयोग करें।
3. ढीले और आरामदायक कपड़े पहनें।
4. मोबाइल या अन्य ध्यान भंग करने वाली चीजें दूर रखें।
5. भोजन के तुरंत बाद न करें (कम से कम 2 घंटे का अंतर रखें)।
शवासन करने की स्टेप-बाय-स्टेप विधि
चरण 1: पीठ के बल लेटें
मैट पर सीधे पीठ के बल लेट जाएं। रीढ़ को प्राकृतिक स्थिति में रहने दें।
चरण 2: पैरों की स्थिति
• दोनों पैरों के बीच लगभग 1–1.5 फुट दूरी रखें।
• पंजे स्वाभाविक रूप से बाहर की ओर ढीले गिरने दें।
चरण 3: हाथों की स्थिति
• हाथ शरीर से थोड़ी दूरी पर रखें (लगभग 6–8 इंच)।
• हथेलियां ऊपर की ओर खुली रखें।
• उंगलियों को ढीला छोड़ दें।
चरण 4: सिर और गर्दन
• सिर सीधा रखें।
• यदि गर्दन में तनाव हो तो छोटा तौलिया रख सकते हैं।
चरण 5: आंखें बंद करें
धीरे से आंखें बंद करें और चेहरे की मांसपेशियों को ढीला छोड़ दें।
चरण 6: श्वास पर ध्यान दें
• सांस को नियंत्रित न करें।
• बस उसकी प्राकृतिक गति को महसूस करें।
• पेट के उठने-गिरने पर ध्यान दें।
चरण 7: शरीर स्कैन (Body Awareness)
धीरे-धीरे ध्यान शरीर के हर हिस्से पर ले जाएं:
• पैर
• घुटने
• जांघ
• पेट
• छाती
• हाथ
• कंधे
• गर्दन
• चेहरा
• सिर
हर हिस्से को मानसिक रूप से ढीला छोड़ते जाएं।
चरण 8: मानसिक विश्राम
मन में यह भावना लाएं:
“मेरा पूरा शरीर शांत है… मैं सुरक्षित हूं… मैं विश्राम में हूं।”
चरण 9: समय अवधि
• शुरुआती: 5 मिनट
• मध्यम: 10–15 मिनट
• उन्नत अभ्यास: 20–30 मिनट
चरण 10: आसन से बाहर आना
• धीरे-धीरे सांस गहरी करें।
• उंगलियों और पैरों को हिलाएं।
• दाईं करवट मुड़ें।
• हाथ के सहारे बैठ जाएं।
शवासन के वैज्ञानिक लाभ
- तंत्रिका तंत्र को शांत करता है
शवासन पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम को सक्रिय करता है, जो शरीर को “आराम और पुनर्निर्माण” मोड में ले जाता है। - तनाव और चिंता कम करता है
कॉर्टिसोल (Stress Hormone) का स्तर कम करने में मदद करता है। - रक्तचाप नियंत्रित करता है
नियमित अभ्यास हाई ब्लड प्रेशर के जोखिम को कम कर सकता है। - हृदय स्वास्थ्य बेहतर करता है
हृदय गति स्थिर होती है और हृदय पर दबाव कम होता है। - मानसिक स्पष्टता बढ़ाता है
ध्यान क्षमता और फोकस में सुधार होता है। - अनिद्रा में लाभकारी
सोने से पहले शवासन करने से नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है। - मांसपेशियों की रिकवरी
वर्कआउट या योग के बाद मांसपेशियों की थकान जल्दी दूर होती है। - दर्द कम करने में सहायक
सिरदर्द, माइग्रेन और मांसपेशियों के दर्द में राहत मिल सकती है। - भावनात्मक संतुलन
गुस्सा, चिंता और मानसिक थकान कम होती है। - हार्मोनल संतुलन
तनाव कम होने से हार्मोन संतुलन बेहतर होता है।
मानसिक और मनोवैज्ञानिक लाभ
• अवसाद के लक्षणों में कमी
• भावनात्मक स्थिरता
• आत्म-जागरूकता बढ़ना
• ध्यान अभ्यास के लिए तैयारी
• मानसिक शांति
शवासन को “डायनामिक मेडिटेशन की तैयारी” भी कहा जाता है।
शवासन में होने वाली सामान्य गलतियाँ
1. शरीर को सख्त रखना
2. सांस को नियंत्रित करने की कोशिश करना
3. सो जाना
4. जल्दी उठ जाना
5. गर्दन या कमर में तनाव
शुरुआती लोगों के लिए टिप्स
• आंखों पर कपड़ा रखें
• हल्का संगीत चला सकते हैं
• कंबल का उपयोग करें
• निर्देशित रिलैक्सेशन सुन सकते हैं
उन्नत शवासन अभ्यास
अनुभवी साधक शवासन में निम्न अभ्यास जोड़ सकते हैं:
• योग निद्रा
• मानसिक विज़ुअलाइज़ेशन
• मंत्र ध्यान
• श्वास जागरूकता
चिकित्सीय उपयोग (Therapeutic Applications)
शवासन निम्न स्थितियों में सहायक पाया गया है:
• उच्च रक्तचाप
• चिंता विकार
• पैनिक अटैक
• हृदय रोग पुनर्वास
• क्रॉनिक थकान
• माइग्रेन
हालांकि यह चिकित्सा उपचार का विकल्प नहीं है, बल्कि सहायक अभ्यास है।
शवासन कब करना चाहिए?
सबसे उपयुक्त समय:
• योग अभ्यास के अंत में
• ध्यान से पहले
• सोने से पहले
• तनावपूर्ण दिन के बाद
• ऑफिस ब्रेक में
शवासन से जुड़ी सावधानियाँ
हालांकि शवासन सुरक्षित आसन है, फिर भी कुछ सावधानियाँ जरूरी हैं:
- पीठ दर्द वाले लोग
घुटनों के नीचे तकिया रखें। - गर्भावस्था
दूसरी और तीसरी तिमाही में सीधे पीठ के बल न लेटें—करवट लेकर करें। - लो ब्लड प्रेशर
धीरे-धीरे उठें, अचानक न बैठें। - ठंड लगना
कंबल का उपयोग करें। - गर्दन दर्द
छोटा सपोर्ट रखें। - मानसिक असहजता
कुछ लोगों को स्थिर लेटने में बेचैनी होती है—धीरे अभ्यास बढ़ाएं।
किन लोगों को सावधानी रखनी चाहिए?
• गंभीर डिप्रेशन
• स्पाइनल इंजरी
• हाल की सर्जरी
• वर्टिगो
ऐसी स्थिति में विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।
एक छोटा गाइडेड रिलैक्सेशन स्क्रिप्ट
आप मन में दोहरा सकते हैं:
मेरा शरीर ढीला है…
मेरा मन शांत है…
मेरी सांस सहज है…
मैं सुरक्षित हूं…
मैं पूर्ण विश्राम में हूं…
शवासन कितनी देर करना चाहिए?
• न्यूनतम: 5 मिनट
• आदर्श: 10–15 मिनट
• गहरा अभ्यास: 20 मिनट
योग सत्र के हर 30 मिनट पर कम से कम 5 मिनट शवासन करना फायदेमंद माना जाता है।
नियमित अभ्यास से क्या परिवर्तन दिखते हैं?
लगातार 4–6 सप्ताह अभ्यास से:
• तनाव सहन क्षमता बढ़ती है
• नींद बेहतर होती है
• मानसिक स्पष्टता बढ़ती है
• शरीर की रिकवरी तेज होती है
शवासन योग का सबसे सरल दिखने वाला लेकिन सबसे गहरा आसन है। यह शरीर को पुनर्जीवित करता है, मन को शांत करता है और चेतना को स्थिर करता है। आधुनिक जीवन की भागदौड़ में यह आसन एक प्राकृतिक “रीसेट बटन” की तरह काम करता है।
यदि आप रोज़ केवल 10 मिनट भी शवासन करते हैं, तो यह आपके मानसिक स्वास्थ्य, ऊर्जा स्तर और जीवन गुणवत्ता पर गहरा सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
✅ संक्षेप में:
शवासन = गहरा विश्राम + मानसिक जागरूकता + ऊर्जा पुनर्स्थापन






