सेतुबन्धासन: रीढ़ की सेहत, हार्मोन संतुलन और मानसिक स्थिरता का शक्तिशाली योग सेतु
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संवाद 24 डेस्क। योग विज्ञान में सेतुबन्धासन (Bridge Pose) एक ऐसा आसन है जो शरीर और मन के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रतीक माना जाता है। “सेतु” का अर्थ पुल और “बंध” का अर्थ बांधना या जोड़ना होता है। इस आसन में शरीर का आकार पुल जैसा बनता है, इसलिए इसे सेतुबन्धासन कहा जाता है। यह आसन देखने में सरल लगता है, लेकिन इसके प्रभाव अत्यंत गहरे और बहुआयामी होते हैं। नियमित अभ्यास से यह रीढ़ को मजबूत करता है, हार्मोन संतुलन में मदद करता है, तनाव कम करता है और पूरे शरीर में ऊर्जा का प्रवाह बेहतर बनाता है।
यह लेख सेतुबन्धासन की संपूर्ण जानकारी — करने की विधि, वैज्ञानिक लाभ, शारीरिक प्रभाव, मानसिक फायदे और सावधानियों को प्रस्तुत का कर रहा है।
सेतुबन्धासन क्या है?
सेतुबन्धासन एक बैकबेंड (पीछे की ओर झुकाव) योगासन है जिसमें पीठ को जमीन से ऊपर उठाया जाता है जबकि सिर, कंधे और पैर जमीन पर रहते हैं। यह आसन विशेष रूप से रीढ़, कूल्हों, जांघों, छाती और गर्दन पर कार्य करता है।
यह आसन शुरुआती से लेकर उन्नत साधकों तक सभी के लिए उपयोगी है, क्योंकि इसे विभिन्न स्तरों पर किया जा सकता है।
सेतुबन्धासन करने की तैयारी
आसन शुरू करने से पहले निम्न बातों का ध्यान रखें:
• पेट हल्का होना चाहिए (खाने के 3–4 घंटे बाद करें)
• समतल और आरामदायक जगह चुनें
• योग मैट का उपयोग करें
• शरीर को हल्का वार्म-अप दें (विशेषकर पीठ और पैरों को)
सेतुबन्धासन करने की स्टेप-बाय-स्टेप विधि
चरण 1: प्रारंभिक स्थिति
• पीठ के बल सीधे लेट जाएं।
• दोनों पैरों को घुटनों से मोड़ें।
• एड़ियों को कूल्हों के पास लाएं।
• हाथों को शरीर के बगल में रखें, हथेलियां जमीन की ओर।
चरण 2: श्वास लें और शरीर उठाएं
• गहरी सांस अंदर लें।
• धीरे-धीरे कूल्हों और पीठ को जमीन से ऊपर उठाएं।
• छाती को ठुड्डी की ओर लाने की कोशिश करें।
• गर्दन पर अधिक दबाव न डालें।
चरण 3: हाथों की स्थिति
दो विकल्प हैं:
1. हाथ जमीन पर ही रखें।
2. उंगलियों को पीठ के नीचे इंटरलॉक करें और कंधों को पास लाएं।
चरण 4: स्थिति बनाए रखें
• सामान्य श्वास लेते रहें।
• 15–30 सेकंड तक रुकें (शुरुआती स्तर)
• धीरे-धीरे समय बढ़ाया जा सकता है।
चरण 5: वापस आएं
• सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे पीठ को जमीन पर रखें।
• रीढ़ को एक-एक कशेरुका के साथ नीचे लाएं।
• आराम करें।
सेतुबन्धासन के प्रमुख शारीरिक लाभ
- रीढ़ की मजबूती और लचीलापन
यह आसन रीढ़ को पीछे की ओर झुकाता है जिससे:
• रीढ़ मजबूत होती है
• जकड़न कम होती है
• उम्र से संबंधित समस्याओं का जोखिम घटता है - पीठ दर्द में राहत
हल्के से मध्यम कमर दर्द वाले लोगों के लिए यह आसन उपयोगी हो सकता है क्योंकि:
• पीठ की मांसपेशियां मजबूत होती हैं
• रक्त संचार बेहतर होता है - छाती और फेफड़ों का विस्तार
सेतुबन्धासन करते समय छाती खुलती है जिससे:
• फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है
• सांस लेने में सुधार होता है
• अस्थमा के लक्षणों में राहत मिल सकती है - थायरॉयड ग्रंथि पर सकारात्मक प्रभाव
इस आसन में गर्दन की स्थिति ऐसी होती है कि:
• थायरॉयड ग्रंथि उत्तेजित होती है
• हार्मोन संतुलन में मदद मिलती है - पाचन सुधार
यह आसन पेट के अंगों को हल्का दबाव देता है:
• कब्ज में राहत
• पाचन बेहतर
• गैस की समस्या कम - पैरों और कूल्हों की मजबूती
सेतुबन्धासन में जांघ और ग्लूट मसल्स सक्रिय होते हैं:
• पैरों की ताकत बढ़ती है
• कूल्हे मजबूत होते हैं
मानसिक और न्यूरोलॉजिकल लाभ
- तनाव और चिंता में कमी
यह आसन पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम को सक्रिय करता है जिससे:
• तनाव कम होता है
• मानसिक शांति मिलती है - अवसाद में सहायक
छाती खुलने वाले आसन भावनात्मक तनाव कम करते हैं:
• मूड बेहतर होता है
• सकारात्मकता बढ़ती है - बेहतर नींद
नियमित अभ्यास से:
• अनिद्रा में राहत
• नींद की गुणवत्ता बेहतर
हार्मोनल और आंतरिक अंगों पर प्रभाव
सेतुबन्धासन अंतःस्रावी तंत्र (Endocrine System) पर प्रभाव डालता है:
• थायरॉयड संतुलन
• एड्रेनल ग्रंथि सक्रियता
• प्रजनन अंगों में रक्त संचार बेहतर
महिलाओं में:
• पीरियड दर्द में राहत
• रजोनिवृत्ति के लक्षणों में मदद
वजन नियंत्रण में भूमिका
यह आसन सीधे वजन कम नहीं करता लेकिन:
• मेटाबॉलिज्म सुधारता है
• पेट की चर्बी कम करने में सहायक
• हार्मोन संतुलन से वजन नियंत्रण
हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभ
• रक्त संचार बेहतर
• हृदय मांसपेशियों को अप्रत्यक्ष लाभ
• हाई ब्लड प्रेशर के हल्के मामलों में सहायक (डॉक्टर सलाह आवश्यक)
ऊर्जा चक्रों (चक्र) पर प्रभाव
योगिक दृष्टि से यह आसन विशेष रूप से प्रभावित करता है:
• अनाहत चक्र (हृदय केंद्र)
• विशुद्ध चक्र (गला केंद्र)
इससे भावनात्मक संतुलन और आत्मविश्वास बढ़ता है।
शुरुआती लोगों के लिए आसान तरीका
यदि पूरा आसन कठिन लगे तो:
• कूल्हों के नीचे योग ब्लॉक रखें
• कम ऊंचाई तक उठाएं
• दीवार का सहारा लें
इसे “सपोर्टेड ब्रिज पोज” कहा जाता है।
उन्नत साधकों के लिए विविधताएं
1. एक पैर उठाकर सेतुबन्धासन
2. हाथ ऊपर ले जाकर
3. डायनामिक ब्रिज (ऊपर-नीचे मूवमेंट)
कितनी देर और कितनी बार करें?
• शुरुआती: 10–15 सेकंड × 3 बार
• मध्यम स्तर: 30 सेकंड × 3–5 बार
• उन्नत: 1 मिनट तक
सर्वश्रेष्ठ समय: सुबह खाली पेट या शाम को।
सामान्य गलतियां
• पैरों को बहुत दूर रखना
• गर्दन पर वजन डालना
• सांस रोकना
• अचानक नीचे आना
सेतुबन्धासन करते समय श्वास का महत्व
सही श्वास अभ्यास से लाभ कई गुना बढ़ जाता है:
• ऊपर उठते समय श्वास लें
• स्थिति में सामान्य श्वास
• नीचे आते समय श्वास छोड़ें
किन लोगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी?
• लंबे समय बैठकर काम करने वाले
• कमर दर्द वाले
• थायरॉयड असंतुलन वाले
• तनावग्रस्त लोग
• खिलाड़ियों के लिए रिकवरी
सेतुबन्धासन से जुड़ी सावधानियां
यह बहुत महत्वपूर्ण भाग है। निम्न स्थितियों में सावधानी रखें:
- गर्दन की समस्या
यदि सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस है:
• डॉक्टर की सलाह लें
• गर्दन न मोड़ें - गंभीर कमर दर्द
• पहले विशेषज्ञ से परामर्श लें
• हल्के रूप में करें - हृदय रोग
• चिकित्सा सलाह आवश्यक - उच्च रक्तचाप
• नियंत्रित स्थिति में ही करें
• लंबे समय तक न रोकें - गर्भावस्था
• शुरुआती महीनों में प्रशिक्षक की देखरेख में
• बाद में टालना बेहतर - सर्जरी के बाद
• पूर्ण रिकवरी तक न करें - घुटने दर्द
• पैरों की सही दूरी रखें
• सपोर्ट लें
सुरक्षित अभ्यास के लिए टिप्स
• वार्म-अप करें
• झटके से ऊपर न उठें
• दर्द होने पर रोक दें
• योग प्रशिक्षक से सीखें
सेतुबन्धासन के बाद कौन सा आसन करें?
संतुलन के लिए:
• पवनमुक्तासन
• शवासन
• सुप्त मत्स्येन्द्रासन
वैज्ञानिक दृष्टिकोण
आधुनिक शोध बताते हैं कि बैकबेंड योगासन:
• नर्वस सिस्टम शांत करते हैं
• हार्मोन संतुलन सुधारते हैं
• पोस्टर सुधारते हैं
• मूड हार्मोन (सेरोटोनिन) पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं
सेतुबन्धासन इन्हीं सिद्धांतों पर कार्य करता है।
सेतुबन्धासन एक सरल लेकिन अत्यंत प्रभावशाली योगासन है जो शरीर, मन और ऊर्जा के बीच संतुलन स्थापित करता है। यह रीढ़ की मजबूती, हार्मोन संतुलन, मानसिक शांति, बेहतर नींद और पाचन सुधार जैसे अनेक लाभ प्रदान करता है। नियमित और सही तकनीक से किया गया अभ्यास जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बना सकता है।
लेकिन हर योगासन की तरह इसमें भी सावधानी आवश्यक है। यदि किसी को गंभीर स्वास्थ्य समस्या है तो विशेषज्ञ की सलाह लेना हमेशा बेहतर रहता है।






