शरीर की शक्ति और संतुलन का स्तंभ: चतुरंग दण्डासन

संवाद 24 डेस्क। योग केवल लचीलापन बढ़ाने का अभ्यास नहीं है, बल्कि यह शरीर, मन और श्वास के समन्वय की कला है। चतुरंग दण्डासन (Four-Limbed Staff Pose) योग की उन महत्वपूर्ण मुद्राओं में से एक है जो शरीर की शक्ति, स्थिरता और नियंत्रण को एक साथ विकसित करती है। यह आसन सूर्य नमस्कार, विन्यास योग और अष्टांग योग की श्रृंखलाओं में प्रमुख स्थान रखता है।

“चतुरंग” का अर्थ है चार अंग — दोनों हाथ और दोनों पैर — और “दण्ड” का अर्थ है छड़ी या डंडा। इस आसन में शरीर जमीन के समानांतर सीधी रेखा में रहता है, जैसे कोई मजबूत दण्ड हो। सही तकनीक से किया गया चतुरंग दण्डासन पूरे शरीर को मजबूत बनाता है, जबकि गलत तरीके से करने पर कंधों और कलाई पर दबाव पड़ सकता है। इसलिए इसका अभ्यास सावधानी और सही समझ के साथ करना आवश्यक है।

नीचे इस आसन की विस्तृत विधि, लाभ, सामान्य गलतियाँ और सावधानियाँ दी जा रही हैं।

चतुरंग दण्डासन क्या है?
चतुरंग दण्डासन एक शक्ति-आधारित योग मुद्रा है जो देखने में पुश-अप जैसी लगती है, लेकिन इसमें शरीर की संरेखण (alignment) और मांसपेशियों की सक्रियता अधिक महत्वपूर्ण होती है। यह आसन विशेष रूप से निम्न अंगों को सक्रिय करता है:
• कंधे
• भुजाएँ
• छाती
• कोर (पेट और कमर)
• पैर
• पीठ

यह आसन शरीर को प्लैंक से लो-प्लैंक की स्थिति में नियंत्रित रूप से लाने का अभ्यास कराता है, जिससे संतुलन और नियंत्रण विकसित होता है।

चतुरंग दण्डासन करने की तैयारी
आसन शुरू करने से पहले निम्न अभ्यास करने से शरीर तैयार हो जाता है:
• कलाई घुमाना
• कंधे स्ट्रेच
• प्लैंक पोज़
• अधोमुख श्वानासन
• भुजंगासन
यह तैयारी चोट के जोखिम को कम करती है।

चतुरंग दण्डासन करने की स्टेप-बाय-स्टेप विधि
चरण 1: प्रारंभिक स्थिति (प्लैंक पोज़)

• योग मैट पर पेट के बल लेटें।
• हथेलियाँ कंधों के नीचे रखें।
• पैरों को पीछे सीधा फैलाएँ।
• शरीर को उठाकर प्लैंक स्थिति में आएँ।
• शरीर सिर से एड़ी तक सीधी रेखा में रखें।

चरण 2: कोर को सक्रिय करें
• पेट को हल्का अंदर खींचें।
• जांघों को सक्रिय करें।
• कंधों को कानों से दूर रखें।

चरण 3: शरीर को नीचे लाना
• धीरे-धीरे कोहनियों को मोड़ें।
• कोहनियाँ शरीर के पास रखें (बाहर न फैलाएँ)।
• शरीर जमीन के समानांतर रखें।
• कंधे कोहनी से नीचे न जाएँ।

चरण 4: अंतिम स्थिति
• छाती जमीन से कुछ इंच ऊपर रखें।
• कोहनियाँ लगभग 90 डिग्री पर हों।
• गर्दन न्यूट्रल रखें (नीचे न झुकाएँ)।

चरण 5: बाहर आना
• या तो घुटनों को जमीन पर रखें
• या ऊपर उठकर अधोमुख श्वानासन में जाएँ
• या भुजंगासन में ट्रांजिशन करें

सही अलाइनमेंट के महत्वपूर्ण संकेत
• कंधे कोहनी से नीचे न जाएँ।
• पेट नीचे न लटकने दें।
• कूल्हे ऊपर न उठाएँ।
• कोहनियाँ शरीर से सटी रहें।
• गर्दन सीधी रखें।

सामान्य गलतियाँ
1. कंधों को बहुत नीचे गिराना
2. पेट को ढीला छोड़ देना
3. कोहनियों को बाहर फैलाना
4. शरीर को सीधा न रखना
5. जल्दी-जल्दी नीचे जाना

इन गलतियों से चोट का खतरा बढ़ जाता है।

🌟 चतुरंग दण्डासन के प्रमुख लाभ

  1. पूरे शरीर की शक्ति बढ़ाता है
    यह आसन एक संपूर्ण शक्ति अभ्यास है जो एक साथ कई मांसपेशियों को सक्रिय करता है।
  2. कंधों को मजबूत बनाता है
    नियमित अभ्यास से कंधों की स्थिरता बढ़ती है और चोट का खतरा कम होता है।
  3. भुजाओं और कलाई की ताकत बढ़ती है
    विशेष रूप से ट्राइसेप्स और अग्रबाहु मजबूत होते हैं।
  4. कोर मसल्स को सक्रिय करता है
    यह पेट की गहरी मांसपेशियों को मजबूत करता है जिससे कमर दर्द में मदद मिल सकती है।
  5. शरीर का संतुलन सुधारता है
    नियंत्रण और स्थिरता बढ़ती है।
  6. मुद्रा (Posture) सुधारता है
    पीठ और कंधों की स्थिति बेहतर होती है।
  7. सहनशक्ति बढ़ाता है
    नियमित अभ्यास से शरीर की सहन क्षमता बढ़ती है।
  8. मानसिक एकाग्रता बढ़ती है
    संतुलन और नियंत्रण के कारण ध्यान केंद्रित होता है।
  9. वजन नियंत्रण में सहायक
    मांसपेशियाँ सक्रिय होने से कैलोरी खर्च बढ़ती है।
  10. योग के उन्नत आसनों के लिए आधार
    यह कई एडवांस आसनों की तैयारी कराता है।

मानसिक लाभ
• आत्मविश्वास बढ़ता है
• धैर्य विकसित होता है
• मन शांत होता है
• तनाव कम होता है
• शरीर-मन का तालमेल बेहतर होता है

🧩 शुरुआती लोगों के लिए आसान तरीके (Modifications)

  1. घुटनों के साथ चतुरंग
    • घुटनों को जमीन पर रखें।
    • शरीर का वजन कम हो जाएगा।
  2. ब्लॉक का उपयोग
    • छाती के नीचे योग ब्लॉक रखें।
    • इससे नीचे जाने की सीमा नियंत्रित होगी।
  3. दीवार का सहारा
    • दीवार पर पुश-अप स्टाइल अभ्यास करें।
  4. आधा चतुरंग
    • पूरी तरह नीचे न जाएँ, आधे रास्ते रुकें।

🔄 चतुरंग के विभिन्न रूप
• नी-डाउन चतुरंग
• डायनेमिक चतुरंग
• वन-लेग चतुरंग
• स्लो कंट्रोल चतुरंग

चतुरंग दण्डासन से जुड़ी सावधानियाँ
यह आसन शक्तिशाली है, इसलिए सावधानी आवश्यक है।

किन लोगों को सावधानी रखनी चाहिए
• कंधे की चोट वाले व्यक्ति
• कलाई दर्द वाले लोग
• कार्पल टनल सिंड्रोम
• कमर दर्द
• उच्च रक्तचाप (गंभीर अवस्था)
• गर्भवती महिलाएँ (विशेषज्ञ सलाह से)

अभ्यास के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें
1. जल्दबाज़ी न करें
2. शरीर को जबरदस्ती नीचे न ले जाएँ
3. दर्द होने पर तुरंत रुकें
4. सही वार्म-अप करें
5. सांस न रोकें
6. शरीर सीधा रखें
7. अधिक दोहराव न करें (विशेषकर शुरुआती)

🚫 किन स्थितियों में न करें
• हाल ही में सर्जरी हुई हो
• कंधे में तीव्र दर्द हो
• कलाई में सूजन हो
• स्लिप डिस्क की गंभीर समस्या हो

💡 अभ्यास को सुरक्षित बनाने के टिप्स
• पहले प्लैंक मजबूत करें
• धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ाएँ
• योग शिक्षक के मार्गदर्शन में सीखें
• कोर मसल्स पर ध्यान दें
• कम दोहराव से शुरुआत करें

🕉️ श्वास का महत्व
• नीचे जाते समय श्वास छोड़ें
• स्थिति में सामान्य श्वास रखें
• ऊपर आते समय श्वास लें

सही श्वास शरीर को स्थिरता देती है।

📅 अभ्यास की आवृत्ति
• शुरुआती: 3–5 बार
• मध्यम स्तर: 5–10 बार
• उन्नत: 10–20 बार (विन्यास श्रृंखला में)

🧘 चतुरंग के बाद करने वाले आसन
• भुजंगासन
• उर्ध्वमुख श्वानासन
• बालासन
• अधोमुख श्वानासन

ये आसन शरीर को संतुलित करते हैं।

चतुरंग दण्डासन केवल एक योग मुद्रा नहीं बल्कि शरीर की शक्ति, नियंत्रण और मानसिक एकाग्रता का उत्कृष्ट अभ्यास है। यह आसन हमें सिखाता है कि स्थिरता केवल बाहरी नहीं बल्कि अंदरूनी संतुलन से आती है। सही तकनीक, धैर्य और नियमित अभ्यास से यह आसन शरीर को मजबूत, संतुलित और ऊर्जावान बना सकता है।

हालाँकि, इसे करते समय सावधानी और सही अलाइनमेंट अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि आप शुरुआती हैं, तो सरल रूप से शुरुआत करें और धीरे-धीरे प्रगति करें।

योग का मूल सिद्धांत है — अहिंसा (अपने शरीर के प्रति भी)। इसलिए शरीर की सीमा का सम्मान करें और सुरक्षित अभ्यास करें।

Radha Singh
Radha Singh

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