पीठ की शक्ति और आंतरिक ऊर्जा का जागरण: शलभासन की सम्पूर्ण मार्गदर्शिका
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संवाद 24 डेस्क। योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और प्राण-ऊर्जा के संतुलन का विज्ञान है। आधुनिक जीवनशैली लंबे समय तक बैठना, मोबाइल व लैपटॉप का अत्यधिक उपयोग, तनाव और शारीरिक निष्क्रियता हमारी रीढ़ (Spine) और तंत्रिका तंत्र को कमजोर बना रही है। ऐसे समय में कुछ योगासन ऐसे हैं जो कम समय में गहरे और स्थायी लाभ देते हैं। शलभासन (Locust Pose) उन्हीं प्रभावशाली आसनों में से एक है।
शलभासन पीठ, कमर, जांघों और आंतरिक अंगों को सशक्त बनाने वाला एक महत्वपूर्ण योगासन है। यह आसन देखने में सरल लगता है, लेकिन इसके प्रभाव अत्यंत गहरे और व्यापक होते हैं।
शलभासन क्या है? (What is Shalabhasana)
संस्कृत शब्द “शलभ” का अर्थ है टिड्डा (Locust) और “आसन” का अर्थ है विशेष शारीरिक मुद्रा। इस आसन में शरीर की स्थिति टिड्डे के समान होती है, इसलिए इसे Locust Pose कहा जाता है।
यह आसन मुख्य रूप से प्रोन पोज़िशन (पेट के बल लेटकर) किया जाता है, जिसमें पैरों को ऊपर उठाया जाता है। हठयोग और अष्टांग योग दोनों में इसका विशेष स्थान है।
शलभासन का योगिक एवं शारीरिक महत्व
योग शास्त्रों के अनुसार शलभासन:
• मणिपूर चक्र को सक्रिय करता है
• प्राण-ऊर्जा के प्रवाह को संतुलित करता है
• शरीर में स्थिरता और दृढ़ता लाता है
आधुनिक विज्ञान के अनुसार यह आसन:
• रीढ़ की मांसपेशियों को मज़बूत करता है
• नर्वस सिस्टम को उत्तेजित करता है
• मेटाबॉलिज़्म को बेहतर बनाता है
शलभासन करने की तैयारी (Preparation)
शलभासन से पहले कुछ हल्के आसन या अभ्यास करना लाभकारी होता है:
• मकरासन
• भुजंगासन (हल्का)
• कटी चक्रासन
• 3–5 मिनट गहरी श्वास-प्रश्वास
इससे शरीर लचीला होता है और चोट की संभावना कम हो जाती है।
शलभासन करने की स्टेप-बाय-स्टेप विधि
चरण 1: प्रारंभिक स्थिति
• योग मैट पर पेट के बल सीधे लेट जाएँ
• दोनों पैर सीधे रखें और आपस में मिले हों
• ठोड़ी या माथा भूमि पर टिका हो
• दोनों हाथ शरीर के बगल में, हथेलियाँ नीचे की ओर
चरण 2: श्वास भरना (Inhalation)
• धीरे-धीरे गहरी साँस लें
• पेट और छाती को स्थिर रखें
चरण 3: पैरों को ऊपर उठाना
• श्वास भरते हुए
• दोनों पैरों को एक साथ ज़मीन से ऊपर उठाएँ
• घुटने सीधे रखें
• नितंब और जांघों में संकुचन महसूस करें
चरण 4: स्थिरता बनाए रखना
• इस स्थिति में 10–30 सेकंड तक रहें
• साँस सामान्य रखें
• गर्दन और चेहरे पर अनावश्यक तनाव न रखें
चरण 5: वापसी
• श्वास छोड़ते हुए धीरे-धीरे पैरों को नीचे रखें
• शरीर को पूरी तरह शिथिल करें
• मकरासन में 30–60 सेकंड विश्राम करें
👉 शुरुआत में 2–3 बार अभ्यास पर्याप्त है।
शलभासन के शारीरिक लाभ
- रीढ़ की हड्डी को मज़बूती
शलभासन रीढ़ की एक्सटेंसर मांसपेशियों को सक्रिय करता है, जिससे:
• कमर दर्द में राहत
• झुकी हुई पीठ (Slouching) में सुधार
• स्पाइनल फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ती है - पीठ और कमर दर्द में लाभ
जो लोग:
• लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं
• सायटिका या लोअर बैक पेन से पीड़ित हैं
उनके लिए यह आसन अत्यंत उपयोगी है (हल्के रूप में)। - पेट और पाचन तंत्र को सक्रिय करना
• आंतों की मालिश होती है
• कब्ज, गैस और अपच में सुधार
• पाचन अग्नि (Digestive Fire) मजबूत होती है - नितंब, जांघ और पैरों की मांसपेशियाँ सुदृढ़
• Gluteal muscles टोन होती हैं
• जांघों की ताकत बढ़ती है
• पैरों में रक्त संचार बेहतर होता है - मोटापे में सहायक
शलभासन:
• पेट और कमर की चर्बी घटाने में मदद करता है
• मेटाबॉलिज़्म को सक्रिय करता है - आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति में वृद्धि
यह आसन मणिपूर चक्र को सक्रिय करता है, जो:
• आत्मबल
• निर्णय क्षमता
• आत्मविश्वास
से जुड़ा माना जाता है।
महिलाओं के लिए शलभासन के लाभ
• हार्मोनल संतुलन में सहायक
• पेल्विक क्षेत्र को मजबूत करता है
(गर्भावस्था में यह आसन न करें)
शलभासन के प्राणिक (ऊर्जा) लाभ
• प्राण और अपान वायु का संतुलन
• शरीर में ऊर्जा का संचार
• आलस्य और जड़ता दूर होती है
शलभासन के विभिन्न रूप (Variations)
1. अर्ध शलभासन – एक पैर ऊपर उठाकर
2. सहज शलभासन – घुटने हल्के मोड़कर
3. सपोर्टेड शलभासन – तकिये या ब्लॉक के सहारे
शुरुआती साधकों के लिए ये रूप सुरक्षित होते हैं।
शलभासन से जुड़ी सावधानियाँ (Precautions)
शलभासन करते समय निम्न बातों का विशेष ध्यान रखें:
❗ किन लोगों को नहीं करना चाहिए:
• गर्भावस्था में
• हर्निया
• स्लिप डिस्क की गंभीर समस्या
• हाल ही में पेट या रीढ़ की सर्जरी
• अत्यधिक पीठ दर्द में बिना विशेषज्ञ सलाह
❗ अभ्यास के दौरान सावधानियाँ:
• झटके से पैर न उठाएँ
• सांस न रोकें
• दर्द होने पर तुरंत आसन छोड़ दें
• खाली पेट या 4–5 घंटे के अंतराल के बाद ही करें
शलभासन एक ऐसा योगासन है जो कम समय में शरीर के गहरे हिस्सों पर प्रभाव डालता है। यह न केवल पीठ और कमर को मज़बूत करता है, बल्कि पाचन, ऊर्जा स्तर और मानसिक स्थिरता को भी बेहतर बनाता है। नियमित, सही विधि और सावधानी के साथ किया गया शलभासन आधुनिक जीवनशैली से उत्पन्न कई समस्याओं का प्राकृतिक समाधान बन सकता है।
“सशक्त पीठ, स्थिर मन और ऊर्जावान शरीर—शलभासन का यही सार है।”






