एक पाद प्रणामासन (One-Legged Prayer Pose): संतुलन, एकाग्रता और आत्मिक स्थिरता का योगिक मार्ग

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संवाद 24 डेस्क। योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करने की एक प्राचीन एवं वैज्ञानिक पद्धति है। योगासन हमारे जीवन में स्थिरता, स्वास्थ्य और मानसिक शांति लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। एक पाद प्रणामासन (One-Legged Prayer Pose) ऐसा ही एक प्रभावशाली संतुलनकारी आसन है, जो शारीरिक शक्ति के साथ-साथ मानसिक एकाग्रता और आत्मिक जागरूकता को भी बढ़ाता है।

एक पाद प्रणामासन का परिचय
संस्कृत नाम: एक पाद प्रणामासन
अंग्रेज़ी नाम: One-Legged Prayer Pose
आसन का प्रकार: संतुलन आसन (Balancing Pose)
योग की श्रेणी: हठ योग / स्थिरता एवं एकाग्रता आधारित आसन

“एक” का अर्थ है एक,
“पाद” का अर्थ है पैर,
“प्रणाम” का अर्थ है नमन या प्रार्थना,
और “आसन” का अर्थ है शरीर की स्थिति।

इस आसन में साधक एक पैर पर संतुलन बनाते हुए दोनों हाथों को नमस्कार मुद्रा में हृदय के सामने रखते हैं। यह आसन देखने में सरल लगता है, लेकिन इसमें गहरी एकाग्रता और शारीरिक नियंत्रण की आवश्यकता होती है।

एक पाद प्रणामासन का महत्व
आधुनिक जीवनशैली में असंतुलन, तनाव, एकाग्रता की कमी और शारीरिक निष्क्रियता आम समस्याएँ बन गई हैं। एक पाद प्रणामासन इन सभी समस्याओं को दूर करने में सहायक है। यह आसन हमें सिखाता है कि बाहरी अस्थिरता के बीच भी आंतरिक संतुलन कैसे बनाए रखा जाए।

एक पाद प्रणामासन करने की तैयारी
आसन से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक है:
• खाली पेट या भोजन के 4–5 घंटे बाद अभ्यास करें
• शांत और स्वच्छ स्थान चुनें
• आरामदायक वस्त्र पहनें
• प्रारंभ में दीवार या कुर्सी का सहारा लिया जा सकता है
• अभ्यास से पहले हल्के स्ट्रेचिंग आसन करें

एक पाद प्रणामासन की चरणबद्ध विधि

चरण 1: प्रारंभिक स्थिति
• समतल स्थान पर ताड़ासन में सीधे खड़े हो जाएँ
• दोनों पैरों के बीच थोड़ी दूरी रखें
• रीढ़ सीधी, गर्दन और कंधे शिथिल रखें

चरण 2: श्वास पर ध्यान
• गहरी श्वास लें
• मन को शांत करें और दृष्टि सामने किसी एक बिंदु पर स्थिर करें

चरण 3: एक पैर उठाना
• धीरे-धीरे दाएँ पैर को मोड़ें
• दाएँ पैर के तलवे को बाएँ पैर की जांघ या पिंडली पर रखें
• ध्यान रखें कि पैर घुटने पर न रखें

चरण 4: हाथों की स्थिति
• दोनों हथेलियों को हृदय के सामने नमस्कार मुद्रा में जोड़ें
• कोहनियाँ बाहर की ओर हल्की खुली रहें

चरण 5: संतुलन बनाए रखना
• शरीर का पूरा भार बाएँ पैर पर रखें
• रीढ़ सीधी रखें
• श्वास सामान्य रखें
• 20–40 सेकंड तक इस स्थिति में रहें

चरण 6: वापसी
• धीरे-धीरे दाएँ पैर को नीचे लाएँ
• हाथों को ढीला करें
• कुछ क्षण विश्राम करें

चरण 7: दूसरी ओर अभ्यास
• अब यही प्रक्रिया बाएँ पैर से दोहराएँ

एक पाद प्रणामासन के शारीरिक लाभ

  1. संतुलन शक्ति में वृद्धि
    यह आसन शरीर की प्रोप्रियोसेप्शन क्षमता (body awareness) को बढ़ाता है, जिससे गिरने की संभावना कम होती है।
  2. पैरों की मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं
    जांघ, पिंडली, टखने और पैर की मांसपेशियाँ सशक्त होती हैं।
  3. रीढ़ की स्थिरता
    रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है और शरीर की मुद्रा (posture) में सुधार होता है।
  4. जोड़ और स्नायु तंत्र सक्रिय होता है
    घुटने और टखनों की कार्यक्षमता बेहतर होती है।

मानसिक एवं भावनात्मक लाभ

  1. एकाग्रता में वृद्धि
    इस आसन में संतुलन बनाए रखने से फोकस और ध्यान शक्ति बढ़ती है।
  2. तनाव और चिंता में कमी
    नमस्कार मुद्रा और नियंत्रित श्वास से मन शांत होता है।
  3. आत्मविश्वास में वृद्धि
    एक पैर पर स्थिर खड़े रहना मानसिक मजबूती और आत्मविश्वास को बढ़ाता है।

स्वास्थ्य संबंधी लाभ

  1. पाचन और तंत्रिका तंत्र पर सकारात्मक प्रभाव
    संतुलन आसन तंत्रिका तंत्र को सक्रिय करते हैं, जिससे शरीर का समन्वय बेहतर होता है।
  2. मधुमेह और मोटापे में सहायक
    नियमित अभ्यास से चयापचय (metabolism) सुधरता है।

एक पाद प्रणामासन से जुड़ी सावधानियाँ (Precautions)

  1. घुटने या टखने की चोट
    यदि घुटने, टखने या पैर में चोट हो तो यह आसन न करें।
  2. चक्कर या संतुलन समस्या
    चक्कर आने की समस्या हो तो दीवार का सहारा लें।
  3. गर्भावस्था
    गर्भवती महिलाएँ यह आसन केवल विशेषज्ञ की सलाह से करें।
  4. उच्च रक्तचाप
    अत्यधिक देर तक न रुकें और श्वास न रोकें।
  5. जल्दबाज़ी न करें
    आसन में धीरे-धीरे जाएँ और बाहर आएँ।
  6. आँखें बंद न करें (प्रारंभ में)
    संतुलन बिगड़ सकता है।

अभ्यास के लिए उपयोगी सुझाव
• शुरुआत में 15–20 सेकंड से शुरू करें
• नियमित अभ्यास करें
• ध्यान और श्वास को साथ जोड़ें
• योग मैट का उपयोग करें

एक पाद प्रणामासन केवल एक योग मुद्रा नहीं, बल्कि संतुलित जीवन जीने की कला है। यह आसन हमें सिखाता है कि कैसे बाहरी अस्थिरता के बीच भी आंतरिक स्थिरता बनाए रखी जाए। शारीरिक मजबूती, मानसिक शांति और आत्मिक जागरूकता तीनों का सुंदर समन्वय इस आसन में देखने को मिलता है। यदि इसे सही विधि, नियमितता और सावधानियों के साथ किया जाए, तो यह आसन जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।

Radha Singh
Radha Singh

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