पादांगुष्ठासन: शरीर, मन और श्वास के संतुलन का वैज्ञानिक योगासन

संवाद 24 डेस्क। योग भारत की प्राचीन जीवन-पद्धति है, जो शरीर, मन और आत्मा—तीनों के संतुलन पर आधारित है। योगासनों में कुछ आसन ऐसे हैं जो सरल दिखते हैं, लेकिन उनके लाभ अत्यंत गहरे और वैज्ञानिक होते हैं। पादांगुष्ठासन ऐसा ही एक महत्वपूर्ण योगासन है, जो विशेष रूप से पाचन तंत्र, स्नायु तंत्र, मांसपेशियों और मानसिक स्थिरता पर प्रभाव डालता है।

‘पाद’ का अर्थ है पैर, ‘अंगुष्ठ’ का अर्थ है पैर का अंगूठा और ‘आसन’ का अर्थ है स्थिति। इस प्रकार पादांगुष्ठासन का शाब्दिक अर्थ हुआ— पैर के अंगूठे को पकड़कर किया जाने वाला आसन।

पादांगुष्ठासन क्या है?
पादांगुष्ठासन एक आगे झुकने वाला (Forward Bending Pose) योगासन है, जिसमें साधक खड़े होकर अपने दोनों पैरों के अंगूठों को हाथों से पकड़ते हुए सिर को घुटनों की ओर ले जाता है। यह आसन शरीर को नीचे की ओर खींचता है और गुरुत्वाकर्षण के साथ कार्य करता है।
यह आसन मुख्यतः हठ योग और अष्टांग योग परंपरा में प्रमुख रूप से शामिल है।

पादांगुष्ठासन करने की सही विधि (Step-by-Step Method)

पूर्व तैयारी
• खाली पेट अभ्यास करें (सुबह का समय सर्वोत्तम)
• समतल और शांत स्थान चुनें
• योगा मैट या दरी का उपयोग करें
• शरीर को हल्का वार्म-अप दें (कटि चक्रासन, ताड़ासन)

स्टेप 1: ताड़ासन में खड़े हों
• सीधे खड़े हों
• दोनों पैरों के बीच लगभग 2–3 इंच की दूरी रखें
• रीढ़ सीधी रखें
• दृष्टि सामने रखें
• श्वास सामान्य रखें

स्टेप 2: आगे की ओर झुकना
• गहरी श्वास लें
• श्वास छोड़ते हुए धीरे-धीरे कमर से आगे झुकें
• घुटनों को सीधा रखें (शुरुआती साधक हल्का मोड़ सकते हैं)

स्टेप 3: पैरों के अंगूठे पकड़ें
• दोनों हाथों की तर्जनी और मध्य उँगली से
• दोनों पैरों के अंगूठों को पकड़ें
• अंगूठा उँगलियों के बीच फंसा हो

स्टेप 4: सिर को नीचे ले जाएँ
• श्वास छोड़ते हुए सिर को घुटनों के पास या बीच लाएँ
• गर्दन ढीली रखें
• कोहनियाँ बाहर की ओर मुड़ी रहें

स्टेप 5: आसन में स्थिरता
• इस स्थिति में 15–30 सेकंड तक रहें
• धीरे-धीरे समय 1 मिनट तक बढ़ा सकते हैं
• श्वास-प्रश्वास सामान्य रखें

स्टेप 6: आसन से बाहर आना
• गहरी श्वास लें
• सिर ऊपर उठाएँ
• धीरे-धीरे रीढ़ को सीधा करते हुए खड़े हो जाएँ
• पुनः ताड़ासन में आएँ

पादांगुष्ठासन के शारीरिक लाभ

  1. पाचन तंत्र को मजबूत करता है
    • पेट के अंगों पर दबाव पड़ता है
    • कब्ज, गैस और अपच में राहत मिलती है
    • आंतों की सक्रियता बढ़ती है
  2. रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है
    • स्पाइनल नर्व्स सक्रिय होती हैं
    • कमर दर्द में लाभकारी
    • रीढ़ की जकड़न कम होती है
  3. हैमस्ट्रिंग और पिंडलियों को खिंचाव
    • जांघों की पिछली मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं
    • पैरों की अकड़न दूर होती है
    • एथलीट्स के लिए उपयोगी
  4. रक्त संचार में सुधार
    • सिर की ओर रक्त प्रवाह बढ़ता है
    • मस्तिष्क को अधिक ऑक्सीजन मिलती है
    • त्वचा और बालों के लिए लाभदायक
  5. वजन नियंत्रण में सहायक
    • पेट की चर्बी घटाने में मदद
    • मेटाबॉलिज़्म को तेज करता है
    • थायरॉइड ग्रंथि पर सकारात्मक प्रभाव

पादांगुष्ठासन के मानसिक एवं प्राणिक लाभ

  1. तनाव और चिंता में कमी
    • पैरासिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम सक्रिय
    • मानसिक शांति मिलती है
    • अवसाद के लक्षणों में सहायक
  2. एकाग्रता और स्मरण शक्ति में वृद्धि
    • मस्तिष्क को शांत करता है
    • ध्यान अभ्यास के लिए उपयुक्त आसन
    • छात्रों के लिए लाभकारी
  3. प्राण वायु का संतुलन
    • अपान वायु नियंत्रित होती है
    • शरीर की ऊर्जा नीचे से ऊपर की ओर प्रवाहित
    • चक्रों का संतुलन

महिलाओं के लिए विशेष लाभ
• मासिक धर्म अनियमितता में सहायक
• हार्मोनल संतुलन बेहतर
• गर्भधारण की तैयारी में सहायक (विशेषज्ञ सलाह से)

पादांगुष्ठासन से जुड़ी सावधानियाँ (Precautions)

  1. निम्न स्थितियों में न करें या सावधानी रखें
    • कमर में गंभीर दर्द
    • स्लिप डिस्क
    • साइटिका
    • घुटनों की पुरानी चोट
    • हाई ब्लड प्रेशर (लंबे समय तक न रोकें)
    • चक्कर आने की समस्या
  2. शुरुआती साधकों के लिए सुझाव
    • घुटनों को ज़रूरत अनुसार मोड़ सकते हैं
    • ज़बरदस्ती झुकने से बचें
    • दीवार या ब्लॉक का सहारा ले सकते हैं
  3. श्वास को न रोकें
    • श्वास सामान्य रखें
    • सांस रोकना नुकसानदायक हो सकता है
  4. भोजन के तुरंत बाद न करें
    • कम से कम 4–5 घंटे का अंतर रखें
    • सुबह खाली पेट सर्वोत्तम
  5. गर्भावस्था में न करें
    • बिना योग विशेषज्ञ की अनुमति अभ्यास न करें

पादांगुष्ठासन एक सरल लेकिन अत्यंत प्रभावशाली योगासन है, जो शरीर के निचले हिस्से से लेकर मस्तिष्क तक सकारात्मक प्रभाव डालता है। यह न केवल शारीरिक लचीलापन बढ़ाता है, बल्कि मानसिक संतुलन, पाचन शक्ति और ऊर्जा प्रवाह को भी बेहतर बनाता है।

नियमित, सही विधि और सावधानियों के साथ किया गया पादांगुष्ठासन आधुनिक जीवनशैली से उत्पन्न तनाव, जकड़न और असंतुलन को दूर करने में अत्यंत सहायक सिद्ध हो सकता है।

Radha Singh
Radha Singh

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