भारद्वाजासन योग: कमर दर्द से राहत और तनावमुक्त जीवन की प्राकृतिक कुंजी

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संवाद 24 डेस्क। योग भारतीय परंपरा की एक प्राचीन और वैज्ञानिक जीवन-पद्धति है, जिसका उद्देश्य शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करना है। योगासनों में मोड़ (Twisting) वाले आसनों का विशेष महत्व है, क्योंकि ये रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाने के साथ-साथ आंतरिक अंगों को भी सक्रिय करते हैं। भारद्वाजासन एक ऐसा ही बैठकर किया जाने वाला सरल लेकिन प्रभावशाली आसन है, जो विशेष रूप से रीढ़, पाचन तंत्र और मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है।

इस आसन का नाम महान ऋषि भारद्वाज के नाम पर रखा गया है, जो वैदिक काल के प्रमुख मुनियों में से एक थे। भारद्वाजासन का नियमित अभ्यास व्यक्ति को शारीरिक स्थिरता के साथ मानसिक शांति भी प्रदान करता है, इसलिए यह आधुनिक जीवनशैली में अत्यंत उपयोगी आसन है।

भारद्वाजासन क्या है?
भारद्वाजासन एक सीटेड स्पाइनल ट्विस्ट योगासन है, जिसमें शरीर को बैठी अवस्था में एक ओर मोड़ा जाता है। यह आसन विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी है, जो लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं या जिन्हें कमर और रीढ़ से संबंधित समस्याएँ रहती हैं।
यह आसन हठयोग की परंपरा में वर्णित है और इसे शुरुआती से लेकर मध्यम स्तर के साधक भी आसानी से कर सकते हैं। भारद्वाजासन शरीर पर अधिक दबाव डाले बिना गहराई से कार्य करता है, इसलिए इसे चिकित्सकीय योग में भी शामिल किया जाता है।

भारद्वाजासन का शारीरिक और मानसिक महत्व
भारद्वाजासन केवल एक शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह शरीर और मन दोनों को संतुलित करने वाला आसन है। इसमें रीढ़ को घुमाने की क्रिया से तंत्रिका तंत्र सक्रिय होता है, जिससे मानसिक तनाव कम होता है।
यह आसन पेट के अंगों की मालिश करता है, जिससे पाचन शक्ति में सुधार होता है और शरीर की विषाक्तता (Toxins) बाहर निकलने में सहायता मिलती है। मानसिक स्तर पर यह आसन एकाग्रता बढ़ाने और मन को शांत करने में सहायक होता है।

भारद्वाजासन करने की तैयारी
भारद्वाजासन करने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक है ताकि अभ्यास सुरक्षित और प्रभावी हो सके।
• खाली पेट या भोजन के कम से कम 4–5 घंटे बाद आसन करें
• शांत और स्वच्छ स्थान का चयन करें
• योग मैट या दरी का प्रयोग करें
• शरीर को हल्का गर्म करने के लिए पहले कुछ स्ट्रेचिंग या सूक्ष्म व्यायाम करें

भारद्वाजासन करने की विधि (स्टेप बाय स्टेप)

चरण 1: प्रारंभिक स्थिति
सबसे पहले योग मैट पर दंडासन में बैठ जाएँ। दोनों पैर सामने की ओर सीधे रखें, रीढ़ सीधी और गर्दन सहज स्थिति में हो। कुछ गहरी साँसें लेकर शरीर को शांत करें।

चरण 2: पैरों की स्थिति
अब दोनों पैरों को मोड़कर दाईं ओर रखें। बायाँ पैर दाएँ जाँघ के पास और दायाँ पैर बाएँ पैर के आगे टिकाएँ। नितंब पूरी तरह ज़मीन पर टिके रहने चाहिए।

चरण 3: शरीर को मोड़ना
श्वास लेते हुए रीढ़ को लंबा करें। श्वास छोड़ते हुए धीरे-धीरे धड़ को दाईं ओर मोड़ें। बायाँ हाथ दाएँ घुटने पर रखें और दायाँ हाथ पीछे ज़मीन पर सहारे के लिए रखें।

चरण 4: दृष्टि और श्वसन
गर्दन को हल्का घुमाते हुए दृष्टि दाएँ कंधे के ऊपर रखें। इस स्थिति में सामान्य श्वसन बनाए रखें और शरीर को ढीला न छोड़ें।

चरण 5: आसन में ठहराव
इस मुद्रा में 20–30 सेकंड तक या अपनी क्षमता अनुसार रहें। इसके बाद श्वास लेते हुए धीरे-धीरे मूल स्थिति में लौट आएँ।

चरण 6: दूसरी ओर अभ्यास
अब यही प्रक्रिया दूसरी ओर दोहराएँ, यानी पैरों को बाईं ओर रखकर धड़ को बाईं दिशा में मोड़ें।

भारद्वाजासन के प्रमुख लाभ

  1. रीढ़ की हड्डी को मजबूत और लचीला बनाता है
    भारद्वाजासन रीढ़ की मांसपेशियों को सक्रिय करता है और उनकी जकड़न को दूर करता है। इससे रीढ़ में लचीलापन आता है और पीठ दर्द की समस्या कम होती है।
  2. कमर और पीठ दर्द में राहत
    जो लोग लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं, उनके लिए यह आसन विशेष रूप से लाभकारी है। यह कमर के निचले हिस्से में रक्त संचार बढ़ाकर दर्द और अकड़न को कम करता है।
  3. पाचन तंत्र को सुधारता है
    इस आसन में पेट के अंगों पर हल्का दबाव पड़ता है, जिससे आंतों की कार्यक्षमता बढ़ती है। कब्ज, गैस और अपच जैसी समस्याओं में यह सहायक है।
  4. कंधों और गर्दन की जकड़न दूर करता है
    भारद्वाजासन कंधों और गर्दन की मांसपेशियों को खोलता है, जिससे तनाव और अकड़न कम होती है।
  5. मानसिक तनाव और चिंता को कम करता है
    इस आसन के दौरान गहरी और नियंत्रित श्वसन से मन शांत होता है। यह तनाव, चिंता और मानसिक थकान को कम करने में सहायक है।

भारद्वाजासन के सावधानियाँ

  1. रीढ़ की गंभीर समस्या में सावधानी
    यदि किसी को स्लिप डिस्क, स्पॉन्डिलाइटिस या हाल ही में पीठ की सर्जरी हुई हो, तो इस आसन को डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह से ही करें।
  2. गर्भावस्था में न करें
    गर्भवती महिलाओं को यह आसन नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसमें पेट और रीढ़ पर दबाव पड़ता है।
  3. घुटनों की समस्या में सहारा लें
    यदि घुटनों में दर्द हो, तो कुशन या ब्लॉक का सहारा लेकर ही अभ्यास करें।
  4. जबरदस्ती मोड़ न लें
    शरीर को उसकी प्राकृतिक सीमा से अधिक मोड़ने का प्रयास न करें। यह चोट का कारण बन सकता है।
  5. दर्द होने पर तुरंत रुकें
    यदि अभ्यास के दौरान किसी भी प्रकार का तीव्र दर्द महसूस हो, तो तुरंत आसन छोड़ दें।

भारद्वाजासन से अधिक लाभ पाने के लिए सुझाव
• आसन को हमेशा श्वास-प्रश्वास के साथ करें
• नियमित अभ्यास करें, लेकिन अति न करें
• प्रारंभ में समय कम रखें और धीरे-धीरे बढ़ाएँ
• ध्यान और प्राणायाम के साथ अभ्यास करने से लाभ दोगुना हो जाता है

भारद्वाजासन एक सरल, सुरक्षित और अत्यंत प्रभावशाली योगासन है, जो आधुनिक जीवनशैली में उत्पन्न शारीरिक और मानसिक समस्याओं से राहत दिलाने में सहायक है। रीढ़ की मजबूती, पाचन सुधार और मानसिक शांति के लिए इसका नियमित अभ्यास अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है।

यदि इसे सही विधि, नियमितता और सावधानियों के साथ किया जाए, तो भारद्वाजासन व्यक्ति को स्वस्थ, ऊर्जावान और संतुलित जीवन की ओर ले जाता है।

Radha Singh
Radha Singh

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