मत्स्येन्द्रासन: योग में रीढ़ की शुद्धि और ऊर्जा जागरण का आसन
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संवाद 24 डेस्क। योग भारतीय परंपरा की एक प्राचीन और वैज्ञानिक जीवन-पद्धति है, जिसका उद्देश्य शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करना है। योगासनों में मत्स्येन्द्रासन का विशेष स्थान है। यह आसन ऋषि मत्स्येन्द्रनाथ के नाम पर रखा गया है, जिन्हें हठयोग का प्रवर्तक माना जाता है। मत्स्येन्द्रासन को रीढ़ की हड्डी के लिए अत्यंत लाभकारी आसनों में गिना जाता है और यह शरीर के आंतरिक अंगों को सक्रिय कर संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है।
मत्स्येन्द्रासन क्या है?
मत्स्येन्द्रासन एक बैठकर किया जाने वाला ट्विस्टिंग योगासन है, जिसमें शरीर को कमर और रीढ़ से मोड़ा जाता है। संस्कृत में
• मत्स्य = मछली
• इन्द्र = राजा
• आसन = बैठने की मुद्रा
अर्थात “मछलियों के राजा की मुद्रा”। यह आसन रीढ़ को लचीला बनाता है और कुंडलिनी ऊर्जा को जाग्रत करने में सहायक माना जाता है।
मत्स्येन्द्रासन के प्रकार
1. पूर्ण मत्स्येन्द्रासन – कठिन एवं उन्नत साधकों के लिए
2. अर्ध मत्स्येन्द्रासन – सबसे अधिक प्रचलित और सुरक्षित
3. सरल ट्विस्टिंग वेरिएशन – शुरुआती अभ्यासकर्ताओं के लिए
आजकल अधिकतर योग शिक्षक अर्ध मत्स्येन्द्रासन ही सिखाते हैं, क्योंकि यह सुरक्षित और प्रभावी है।
मत्स्येन्द्रासन करने की सही विधि (Step by Step)
चरण 1: प्रारंभिक स्थिति
• स्वच्छ और शांत स्थान पर योग मैट बिछाएँ
• सुखासन या दंडासन में बैठ जाएँ
• रीढ़ सीधी रखें और श्वास सामान्य रखें
चरण 2: पैरों की स्थिति
• दायाँ पैर मोड़कर बाएँ पैर के बाहर रखें
• बायाँ पैर मोड़कर एड़ी को दाएँ कूल्हे के पास रखें
• शुरुआती लोग बायाँ पैर सीधा भी रख सकते हैं
चरण 3: शरीर को मोड़ना
• दायाँ हाथ पीछे ज़मीन पर रखें
• बाएँ हाथ को दाएँ घुटने के बाहर से लपेटें
• धीरे-धीरे कमर और गर्दन को दाईं ओर मोड़ें
चरण 4: दृष्टि और श्वास
• गर्दन को मोड़कर पीछे देखें
• श्वास सामान्य रखें
• इस स्थिति में 20–30 सेकंड रहें
चरण 5: आसन से बाहर आना
• श्वास लेते हुए धीरे-धीरे सीधी स्थिति में आएँ
• अब दूसरी ओर से यही प्रक्रिया दोहराएँ
मत्स्येन्द्रासन का शारीरिक महत्व
मत्स्येन्द्रासन शरीर की रीढ़, पाचन तंत्र और स्नायु तंत्र पर गहरा प्रभाव डालता है। यह आसन रीढ़ के प्रत्येक कशेरुका (vertebra) को सक्रिय करता है, जिससे नसों में रक्त संचार बेहतर होता है।
मत्स्येन्द्रासन के प्रमुख लाभ
- रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाता है
यह आसन रीढ़ को लचीला बनाता है और स्लिप डिस्क, पीठ दर्द एवं अकड़न में राहत देता है। - पाचन तंत्र को सुधारता है
आंतों पर हल्का दबाव पड़ने से पाचन रस सक्रिय होते हैं, जिससे
• कब्ज
• गैस
• अपच
जैसी समस्याओं में लाभ मिलता है। - मधुमेह में सहायक
अग्न्याशय की क्रियाशीलता बढ़ाकर इंसुलिन संतुलन में सहायक होता है। - मोटापा घटाने में उपयोगी
यह आसन पेट और कमर की चर्बी कम करने में सहायक है। - श्वसन प्रणाली को बेहतर बनाता है
फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है और ऑक्सीजन आपूर्ति बेहतर होती है। - मानसिक तनाव कम करता है
मत्स्येन्द्रासन मन को शांत करता है और चिंता व तनाव को कम करता है। - कुंडलिनी ऊर्जा जागरण
योग शास्त्रों के अनुसार यह आसन सुषुम्ना नाड़ी को सक्रिय कर ऊर्जा जागरण में सहायक है।
महिलाओं के लिए मत्स्येन्द्रासन के लाभ
• हार्मोन संतुलन में सहायक
• रीढ़ और कूल्हों की मजबूती
पुरुषों के लिए मत्स्येन्द्रासन के लाभ
• प्रोस्टेट स्वास्थ्य में सहायक
• कमर और पीठ की ताकत बढ़ाता है
• शारीरिक सहनशक्ति में वृद्धि
मत्स्येन्द्रासन के मानसिक और आध्यात्मिक लाभ
• एकाग्रता बढ़ाता है
• मन की चंचलता कम करता है
• आत्म-जागरूकता को बढ़ाता है
• ध्यान के लिए शरीर को तैयार करता है
•
मत्स्येन्द्रासन करते समय सावधानियाँ - रीढ़ की गंभीर समस्या में सावधानी
स्लिप डिस्क या सर्जरी के बाद डॉक्टर की सलाह आवश्यक है। - गर्भावस्था में न करें
गर्भवती महिलाओं के लिए यह आसन निषिद्ध है। - हर्निया या अल्सर में परहेज़
पेट संबंधी गंभीर रोगों में यह आसन न करें। - जबरदस्ती न मोड़ें
शरीर की क्षमता से अधिक ट्विस्ट न करें। - खाली पेट करें
यह आसन हमेशा खाली पेट या भोजन के 4–5 घंटे बाद करें।
मत्स्येन्द्रासन के लिए उपयोगी सुझाव
• प्रारंभ में योग प्रशिक्षक की देखरेख में करें
• श्वास को न रोकें
• नियमित अभ्यास से ही पूर्ण लाभ मिलता है
• आसन के बाद कुछ देर शवासन करें
मत्स्येन्द्रासन और आधुनिक विज्ञान
आधुनिक शोधों के अनुसार, ट्विस्टिंग योगासन रीढ़ की नसों को सक्रिय कर न्यूरो-मस्कुलर कोऑर्डिनेशन को बेहतर बनाते हैं। यह आसन ऑर्गन डिटॉक्सिफिकेशन में भी सहायक माना गया है।मत्स्येन्द्रासन एक अत्यंत प्रभावशाली योगासन है, जो शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक तीनों स्तरों पर लाभ प्रदान करता है। नियमित और सही विधि से किया गया अभ्यास रीढ़ को स्वस्थ रखता है, पाचन सुधारता है और जीवन में ऊर्जा एवं संतुलन लाता है। यदि सावधानियों का पालन किया जाए, तो यह आसन हर आयु वर्ग के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकता है ।






