आयुर्वेद में मुलैठी (यष्टिमधु) का महत्व: जड़ों और कंदों के अद्भुत लाभ, औषधीय गुण और सावधानियाँ
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संवाद 24 डेस्क। मुलैठी, जिसे संस्कृत में यष्टिमधु और अंग्रेज़ी में Licorice (Glycyrrhiza glabra) कहा जाता है, आयुर्वेद की अत्यंत महत्वपूर्ण औषधियों में से एक है। यह एक बहुवर्षीय पौधा है जिसकी जड़ों और कंदों का उपयोग प्राचीन काल से ही विभिन्न रोगों के उपचार में किया जाता रहा है। “यष्टिमधु” शब्द का अर्थ है – “मीठी लकड़ी”, क्योंकि इसकी जड़ें प्राकृतिक रूप से मधुर स्वाद वाली होती हैं। आयुर्वेद में इसे रसायन (पुनर्जीवन देने वाली औषधि) माना गया है, जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, ऊर्जावान बनाए रखने और कई दीर्घकालिक रोगों से बचाने में सहायक होती है।
मुलैठी का उल्लेख चरक संहिता, सुश्रुत संहिता और भावप्रकाश जैसे प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों में मिलता है। इसे मुख्य रूप से कफ और पित्त दोष को संतुलित करने वाली औषधि माना गया है। इसकी जड़ें शीतल, स्निग्ध (मृदु) और पोषण देने वाली होती हैं, जो शरीर में सूजन को कम करती हैं और ऊतकों की मरम्मत में सहायता करती हैं।
मुलैठी का वनस्पति परिचय
मुलैठी फैबेसी (Fabaceae) परिवार का पौधा है और यह मुख्यतः यूरोप, एशिया तथा भारत के कुछ शुष्क क्षेत्रों में पाया जाता है। इसकी जड़ों का रंग बाहर से भूरा और अंदर से पीला होता है। जड़ों को सुखाकर चूर्ण, काढ़ा, अर्क और घनसार जैसे विभिन्न रूपों में उपयोग किया जाता है।
मुलैठी की जड़ों में ग्लाइसीर्रिज़िन (Glycyrrhizin) नामक सक्रिय यौगिक पाया जाता है, जो इसकी मिठास और औषधीय गुणों के लिए जिम्मेदार है। इसके अलावा इसमें फ्लेवोनॉइड्स, सैपोनिन, एंटीऑक्सीडेंट और कई आवश्यक खनिज पाए जाते हैं, जो इसे एक शक्तिशाली प्राकृतिक औषधि बनाते हैं।
आयुर्वेद में मुलैठी का महत्व
आयुर्वेद के अनुसार मुलैठी का रस मधुर, गुण गुरु एवं स्निग्ध, वीर्य शीत और विपाक मधुर होता है। यह शरीर को बल प्रदान करती है, स्वर को मधुर बनाती है और त्वचा में निखार लाती है। इसे विशेष रूप से कास (खांसी), श्वास (अस्थमा), अम्लपित्त (एसिडिटी) और कंठ रोगों में उपयोगी माना गया है।
मुलैठी को वृष्य (शारीरिक शक्ति बढ़ाने वाली) और कंठ्य (गले के लिए हितकारी) औषधि के रूप में भी जाना जाता है। गायक, वक्ता और शिक्षक लंबे समय से अपनी आवाज़ को साफ और मजबूत बनाए रखने के लिए इसका सेवन करते रहे हैं।
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक
मुलैठी की जड़ें इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं और संक्रमण के जोखिम को कम करते हैं। नियमित और संतुलित मात्रा में सेवन करने से शरीर की प्राकृतिक रक्षा प्रणाली बेहतर होती है।
आयुर्वेद में इसे रसायन द्रव्य माना गया है, जिसका अर्थ है कि यह उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने और कोशिकाओं को स्वस्थ रखने में मदद कर सकती है।
श्वसन तंत्र के लिए लाभकारी
मुलैठी का सबसे प्रसिद्ध उपयोग श्वसन संबंधी समस्याओं में होता है। यह कफ को ढीला कर बाहर निकालने में मदद करती है और गले की खराश को शांत करती है। खांसी, ब्रोंकाइटिस और अस्थमा जैसी स्थितियों में मुलैठी का काढ़ा या चूर्ण लाभकारी माना जाता है।
इसके प्राकृतिक एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण श्वसन नलिकाओं की सूजन कम करते हैं, जिससे सांस लेना आसान हो जाता है।
पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाए
मुलैठी पेट की समस्याओं के लिए भी एक प्रभावी औषधि है। यह गैस, अपच, एसिडिटी और पेट में जलन जैसी समस्याओं को कम करने में सहायक होती है। इसके शीतल गुण पेट की अंदरूनी परत को सुरक्षित रखते हैं और अल्सर के जोखिम को घटा सकते हैं।
आयुर्वेदिक चिकित्सक अक्सर इसे अम्लपित्त के उपचार में उपयोग करते हैं क्योंकि यह अतिरिक्त अम्लता को संतुलित करने में मदद करती है।
त्वचा के लिए मुलैठी के लाभ
मुलैठी में मौजूद एंटीबैक्टीरियल और एंटीऑक्सीडेंट गुण त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में सहायक होते हैं। यह मुंहासों, दाग-धब्बों और त्वचा की सूजन को कम करने में मदद कर सकती है। मुलैठी का लेप त्वचा को ठंडक देता है और रंगत में सुधार लाने में सहायक माना जाता है।
कई हर्बल कॉस्मेटिक उत्पादों में मुलैठी का अर्क इसलिए मिलाया जाता है क्योंकि यह त्वचा को प्राकृतिक चमक प्रदान कर सकता है।
स्वर और गले के लिए वरदान
मुलैठी को “गले की मित्र” भी कहा जाता है। गले में खराश, सूखापन या आवाज बैठने की समस्या में इसकी छोटी डंडी चूसना लाभकारी माना जाता है। यह स्वर तंत्र को नम बनाए रखती है और जलन को कम करती है।
वक्ता और गायक लंबे समय तक बोलने या गाने से पहले मुलैठी का उपयोग करते हैं ताकि आवाज स्पष्ट और मधुर बनी रहे।
मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव
आधुनिक शोध यह संकेत देते हैं कि मुलैठी तनाव को कम करने और शरीर के हार्मोन संतुलन में सहायक हो सकती है। यह अधिवृक्क ग्रंथियों (Adrenal glands) के कार्य को समर्थन देती है, जिससे थकान कम महसूस होती है।
हालांकि इसे मानसिक रोगों का उपचार नहीं माना जाता, लेकिन समग्र स्वास्थ्य सुधार में इसकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
महिलाओं के स्वास्थ्य में उपयोगिता
आयुर्वेद में मुलैठी को हार्मोन संतुलन में सहायक माना गया है। यह मासिक धर्म से जुड़ी कुछ असुविधाओं को कम करने में मदद कर सकती है। इसके पोषणकारी गुण शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं और कमजोरी दूर करने में सहायक होते हैं।
लेकिन इसका सेवन हमेशा विशेषज्ञ की सलाह से करना चाहिए, विशेषकर गर्भावस्था के दौरान।
हृदय स्वास्थ्य के लिए संभावित लाभ
मुलैठी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट तत्व रक्त वाहिकाओं को स्वस्थ रखने में सहायक हो सकते हैं। यह सूजन को कम कर हृदय संबंधी जोखिमों को घटाने में मदद कर सकती है। हालांकि अधिक मात्रा में सेवन रक्तचाप बढ़ा सकता है, इसलिए संतुलन अत्यंत आवश्यक है।
यकृत (लिवर) की सुरक्षा
कुछ अध्ययनों से संकेत मिलता है कि मुलैठी का अर्क लिवर को विषैले तत्वों से बचाने में मदद कर सकता है। इसके डिटॉक्सिफाइंग गुण शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने में सहायक होते हैं।
आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से यह शरीर की आंतरिक शुद्धि में योगदान देती है।
वजन प्रबंधन में सहायक
मुलैठी सीधे तौर पर वजन घटाने की औषधि नहीं है, लेकिन यह मेटाबॉलिज्म को संतुलित करने और पाचन सुधारने में मदद कर सकती है। बेहतर पाचन का संबंध स्वस्थ वजन से होता है।
फिर भी, इसे वजन घटाने का चमत्कारी उपाय समझना उचित नहीं है।
दंत स्वास्थ्य के लिए उपयोगी
मुलैठी की जड़ में जीवाणुरोधी गुण पाए जाते हैं, जो मुंह में हानिकारक बैक्टीरिया की वृद्धि को रोकने में सहायक हो सकते हैं। कुछ प्राकृतिक टूथपेस्ट में इसका उपयोग इसलिए किया जाता है क्योंकि यह मसूड़ों को मजबूत बनाने में मदद कर सकती है।
एंटी-इन्फ्लेमेटरी और एंटीवायरल गुण
मुलैठी के सक्रिय तत्व शरीर में सूजन कम करने में सहायक होते हैं। इसके एंटीवायरल गुण कुछ संक्रमणों से बचाव में मदद कर सकते हैं। यही कारण है कि पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों में इसका व्यापक उपयोग हुआ है।
मुलैठी के सेवन के सामान्य तरीके
आयुर्वेद में मुलैठी का उपयोग कई रूपों में किया जाता है—
• चूर्ण: गुनगुने पानी या शहद के साथ
• काढ़ा: खांसी और गले की समस्या में
• अर्क: चिकित्सकीय परामर्श से
• डंडी चूसना: गले की खराश में
सही मात्रा व्यक्ति की आयु, प्रकृति और स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करती है।
सावधानियाँ (Precautions)
1. अधिक सेवन से बचें: मुलैठी का अत्यधिक उपयोग शरीर में सोडियम बढ़ा सकता है और पोटैशियम कम कर सकता है, जिससे उच्च रक्तचाप की समस्या हो सकती है।
2. गर्भावस्था में सावधानी: गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन बिना चिकित्सकीय सलाह के नहीं करना चाहिए।
3. हाई ब्लड प्रेशर के रोगी: जिन लोगों को पहले से उच्च रक्तचाप है, उन्हें विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए।
4. दवाओं के साथ प्रतिक्रिया: यह कुछ दवाओं जैसे डाययूरेटिक्स या हार्मोनल दवाओं के साथ प्रतिक्रिया कर सकती है।
5. लंबे समय तक निरंतर सेवन न करें: किसी भी औषधि की तरह इसे भी सीमित अवधि तक ही उपयोग करना बेहतर है।
6. बच्चों में उपयोग: बच्चों को देने से पहले आयुर्वेदिक विशेषज्ञ से परामर्श लेना उचित है।
मुलैठी की जड़ें और कंद आयुर्वेद की एक अनमोल धरोहर हैं। अपने मधुर स्वाद और बहुआयामी औषधीय गुणों के कारण यह श्वसन, पाचन, त्वचा, प्रतिरक्षा और समग्र स्वास्थ्य के लिए लाभकारी मानी जाती है। हालांकि यह एक प्राकृतिक औषधि है, फिर भी इसका उपयोग विवेकपूर्ण और संतुलित मात्रा में ही करना चाहिए।
प्राचीन ज्ञान और आधुनिक अनुसंधान दोनों इस बात की ओर संकेत करते हैं कि मुलैठी स्वास्थ्य संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। लेकिन याद रखें—सही जानकारी, उचित मात्रा और विशेषज्ञ की सलाह ही किसी भी औषधि के वास्तविक लाभ सुनिश्चित करती है।
डिस्क्लेमर
किसी भी आयुर्वेदिक उत्पाद का सेवन अथवा प्रयोग करने से पूर्व योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श करना आवश्यक है। लेख में वर्णित लाभ पारंपरिक ग्रंथों एवं उपलब्ध शोधों पर आधारित हैं, जिनके परिणाम व्यक्ति विशेष में भिन्न हो सकते हैं। लेखक एवं प्रकाशक किसी भी प्रकार के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष दुष्प्रभाव, हानि या गलत उपयोग के लिए उत्तरदायी नहीं होंगे।






