आयुर्वेद में भृंगराज (Bhringraj / Eclipta alba) : औषधीय गुण, वैज्ञानिक दृष्टि एवं चिकित्सीय उपयोग

संवाद 24 डेस्क। आयुर्वेद एक समग्र चिकित्सा पद्धति है, जिसमें प्रकृति से प्राप्त औषधीय वनस्पतियों का विशेष महत्व है। इन्हीं दिव्य औषधियों में भृंगराज का स्थान अत्यंत विशिष्ट माना गया है। आयुर्वेदिक ग्रंथों में भृंगराज को “केशराज” कहा गया है, अर्थात् बालों का राजा। किंतु भृंगराज केवल बालों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह यकृत (लिवर), त्वचा, पाचन तंत्र, तंत्रिका तंत्र तथा मानसिक स्वास्थ्य पर भी व्यापक प्रभाव डालता है। आधुनिक वैज्ञानिक शोध भी इसके कई पारंपरिक उपयोगों की पुष्टि करते हैं। यह लेख भृंगराज के आयुर्वेदिक महत्व, गुण, लाभ, उपयोग एवं सावधानियों पर एक तथ्यात्मक, पेशेवर और मौलिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है।

भृंगराज का परिचय एवं वनस्पति विवरण
भृंगराज का वानस्पतिक नाम Eclipta alba या Eclipta prostrata है। यह एस्टेरेसी (Asteraceae) कुल का एक छोटा, फैला हुआ, शाकीय पौधा है जो भारत, चीन, थाईलैंड और दक्षिण-पूर्व एशिया में व्यापक रूप से पाया जाता है। यह प्रायः दलदली भूमि, खेतों और नमी वाले क्षेत्रों में उगता है। इसके छोटे सफेद फूल और गहरे हरे पत्ते इसकी पहचान हैं। आयुर्वेद में इसके पत्ते, तना, रस और तेल – सभी औषधीय रूप से उपयोग किए जाते हैं।

आयुर्वेदिक ग्रंथों में भृंगराज का वर्णन
चरक संहिता, सुश्रुत संहिता और भावप्रकाश निघंटु जैसे प्रमुख आयुर्वेदिक ग्रंथों में भृंगराज का उल्लेख मिलता है। इसे तिक्त (कड़वा), कटु (तीखा) रस, लघु एवं रूक्ष गुण, उष्ण वीर्य और कटु विपाक वाला बताया गया है। यह मुख्य रूप से कफ और वात दोष को शांत करता है तथा नियंत्रित मात्रा में पित्त दोष को भी संतुलित करता है। इसे रसायन (Rejuvenator) श्रेणी में रखा गया है, जो शरीर के ऊतकों को पोषण देकर दीर्घायु और स्वास्थ्य प्रदान करता है।

भृंगराज के प्रमुख रासायनिक घटक
आधुनिक विज्ञान के अनुसार भृंगराज में कई सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं, जैसे –
• Ecliptine
• Wedelolactone
• Demethylwedelolactone
• फ्लेवोनॉयड्स
• एल्कलॉइड्स
• पॉलीफेनॉल्स
ये घटक इसके एंटीऑक्सीडेंट, हेपाटोप्रोटेक्टिव (लिवर-संरक्षक), एंटी-इंफ्लेमेटरी और न्यूरोप्रोटेक्टिव गुणों के लिए उत्तरदायी माने जाते हैं।

बालों के स्वास्थ्य में भृंगराज की भूमिका
भृंगराज को पारंपरिक रूप से बालों के लिए सर्वोत्तम औषधि माना गया है। यह बालों की जड़ों को मजबूत करता है, समय से पहले सफेद होने से रोकता है और बालों के झड़ने को कम करता है। आयुर्वेद के अनुसार यह खोपड़ी में रक्त संचार को बढ़ाकर केश कूपों को पोषण देता है। भृंगराज तेल का नियमित प्रयोग बालों को घना, काला और चमकदार बनाता है। आधुनिक अध्ययनों में भी यह पाया गया है कि भृंगराज बालों के विकास चक्र (Hair Growth Cycle) को सकारात्मक रूप से प्रभावित करता है।

यकृत (लिवर) स्वास्थ्य में भृंगराज का महत्व
आयुर्वेद में भृंगराज को श्रेष्ठ यकृत रसायन माना गया है। यह लिवर की कोशिकाओं को क्षति से बचाता है और उनके पुनर्जनन में सहायक होता है। पीलिया, हेपेटाइटिस, फैटी लिवर और विषाक्तता (toxicity) जैसी स्थितियों में भृंगराज का प्रयोग किया जाता है। Wedelolactone जैसे यौगिक लिवर एंजाइम्स को संतुलित करने में सहायक पाए गए हैं।

त्वचा रोगों में भृंगराज के लाभ
भृंगराज रक्तशोधक गुणों से युक्त है, जिससे यह त्वचा संबंधी विकारों में लाभकारी सिद्ध होता है। एक्ज़िमा, सोरायसिस, फोड़े-फुंसी और खुजली जैसी समस्याओं में इसका आंतरिक एवं बाह्य प्रयोग किया जाता है। यह त्वचा की सूजन को कम करता है और घाव भरने की प्रक्रिया को तेज करता है।

पाचन तंत्र एवं भूख पर प्रभाव
भृंगराज पाचन अग्नि को उत्तेजित करता है और भूख बढ़ाने में सहायक होता है। यह यकृत और पित्त स्राव को संतुलित कर भोजन के उचित पाचन में मदद करता है। कब्ज, अपच और गैस जैसी समस्याओं में नियंत्रित मात्रा में इसका उपयोग लाभकारी माना गया है।

मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका तंत्र पर प्रभाव
आयुर्वेद में भृंगराज को मेध्य रसायन भी कहा गया है, अर्थात् यह बुद्धि और स्मरण शक्ति को बढ़ाता है। यह तनाव, चिंता, अनिद्रा और मानसिक थकावट में सहायक है। आधुनिक शोध संकेत देते हैं कि इसके न्यूरोप्रोटेक्टिव गुण मस्तिष्क कोशिकाओं की रक्षा करते हैं और तंत्रिका तंत्र को सशक्त बनाते हैं।

प्रतिरक्षा प्रणाली में योगदान
भृंगराज में उपस्थित एंटीऑक्सीडेंट तत्व शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करते हैं। यह मुक्त कणों (Free Radicals) से होने वाली क्षति को कम करता है और संक्रमणों के प्रति शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।

भृंगराज के विभिन्न आयुर्वेदिक रूप

भृंगराज का प्रयोग कई रूपों में किया जाता है –
• भृंगराज चूर्ण
• भृंगराज रस
• भृंगराज तेल
• भृंगराज घृत
• भृंगराज आसव/अरिष्ट
रोग, आयु और शारीरिक प्रकृति के अनुसार वैद्य इनका चयन करते हैं।

आधुनिक अनुसंधान एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण
हाल के दशकों में किए गए कई वैज्ञानिक अध्ययनों ने भृंगराज के पारंपरिक उपयोगों को समर्थन दिया है। विशेष रूप से लिवर सुरक्षा, बालों के विकास और एंटीऑक्सीडेंट गतिविधियों पर किए गए शोध इसके औषधीय महत्व को प्रमाणित करते हैं। हालांकि, अभी भी बड़े स्तर पर क्लिनिकल ट्रायल्स की आवश्यकता बनी हुई है।

सावधानियाँ एवं निष्कर्ष
भृंगराज अत्यंत प्रभावशाली औषधि है, किंतु इसका प्रयोग सावधानीपूर्वक करना आवश्यक है।
सावधानियाँ:
1. अत्यधिक मात्रा में सेवन करने से पाचन संबंधी समस्या हो सकती है।
2. गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं को बिना चिकित्सकीय परामर्श इसका सेवन नहीं करना चाहिए।
3. निम्न रक्तचाप (Low BP) वाले व्यक्तियों को सावधानी बरतनी चाहिए।
4. किसी गंभीर रोग या दवा के साथ प्रयोग से पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श आवश्यक है।

भृंगराज आयुर्वेद की एक बहुमूल्य औषधि है, जो शरीर, मन और सौंदर्य तीनों स्तरों पर संतुलन स्थापित करती है। पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान, दोनों इसके औषधीय गुणों की पुष्टि करते हैं। उचित मात्रा और सही मार्गदर्शन में इसका प्रयोग स्वास्थ्य संवर्धन की दिशा में एक सशक्त प्राकृतिक उपाय सिद्ध हो सकता है।

डिस्क्लेमर
भृंगराज या इससे संबंधित किसी भी आयुर्वेदिक उत्पाद का सेवन अथवा प्रयोग करने से पूर्व योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श करना आवश्यक है। लेख में वर्णित लाभ पारंपरिक ग्रंथों एवं उपलब्ध शोधों पर आधारित हैं, जिनके परिणाम व्यक्ति विशेष में भिन्न हो सकते हैं। लेखक एवं प्रकाशक किसी भी प्रकार के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष दुष्प्रभाव, हानि या गलत उपयोग के लिए उत्तरदायी नहीं होंगे।

Radha Singh
Radha Singh

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