आयुर्वेद में मदार (आक) का महत्व, औषधीय गुण एवं चिकित्सीय उपयोग

संवाद 24 डेस्क। भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली आयुर्वेद में अनेक वनस्पतियों का वर्णन मिलता है, जिनका उपयोग प्राचीन काल से औषधि के रूप में किया जाता रहा है। ऐसी ही एक महत्वपूर्ण औषधीय वनस्पति है मदार, जिसे आक, अर्क, अलर्क, सूर्यपर्णी आदि नामों से जाना जाता है। यह पौधा सामान्यतः बंजर भूमि, सड़कों के किनारे और शुष्क क्षेत्रों में पाया जाता है, किंतु इसके औषधीय गुण अत्यंत मूल्यवान हैं। आयुर्वेद में मदार को एक उष्ण, तीक्ष्ण और शक्तिशाली औषधि माना गया है, जिसका प्रयोग अनेक रोगों में किया जाता है।

मदार का वनस्पतिक परिचय
मदार मुख्यतः दो प्रकार का होता है—
1. श्वेत आक (Calotropis gigantea)
2. रक्त आक (Calotropis procera)

यह क्षुप (झाड़ीदार) पौधा 6–10 फीट तक ऊँचा हो सकता है। इसकी पत्तियाँ मोटी, चौड़ी और धूसर-हरी होती हैं। फूल सफ़ेद या बैंगनी रंग के होते हैं तथा पौधे से निकलने वाला दूधिया रस (क्षीर) इसका प्रमुख औषधीय भाग माना जाता है। आयुर्वेद में इसके मूल, पत्ते, पुष्प, क्षीर और छाल सभी का औषधीय उपयोग वर्णित है।

आयुर्वेदिक गुण (रस-गुण-वीर्य-विपाक)
आयुर्वेदिक ग्रंथों के अनुसार मदार के गुण इस प्रकार हैं—
• रस (Taste): कटु, तिक्त
• गुण (Properties): लघु, रूक्ष, तीक्ष्ण
• वीर्य (Potency): उष्ण
• विपाक (Post-digestive effect): कटु
• दोष प्रभाव: कफ-वात शामक, पित्त वर्धक (अधिक मात्रा में)
इन गुणों के कारण मदार कफ और वात से उत्पन्न रोगों में विशेष रूप से लाभकारी माना गया है।

आयुर्वेद में मदार का स्थान
चरक संहिता, सुश्रुत संहिता और भावप्रकाश निघंटु जैसे प्राचीन ग्रंथों में मदार का उल्लेख मिलता है। इसे उपविष वर्ग में रखा गया है, अर्थात् यह औषधि शक्तिशाली है और सीमित मात्रा में ही उपयोग योग्य है। उचित शोधन एवं मात्रा में प्रयोग करने पर यह एक उत्तम औषधि सिद्ध होती है।

पाचन तंत्र में मदार के लाभ
मदार का प्रयोग आयुर्वेद में पाचन संबंधी विकारों में किया जाता है। यह दीपन-पाचन गुणों से युक्त है, जिससे जठराग्नि प्रबल होती है।
• अजीर्ण
• मंदाग्नि
• उदर रोग
• कृमि (आंतों के कीड़े)
जैसी समस्याओं में इसका नियंत्रित उपयोग लाभदायक माना गया है।

वात रोगों में मदार की उपयोगिता
उष्ण वीर्य होने के कारण मदार वात दोष को शांत करता है।
• जोड़ों का दर्द
• गठिया
• साइटिका
• स्नायु दुर्बलता
में इसके पत्तों को गर्म करके या तेल में पकाकर बाह्य प्रयोग किया जाता है, जिससे दर्द एवं सूजन में राहत मिलती है।

त्वचा रोगों में मदार का महत्व
आयुर्वेद में मदार को कुष्ठघ्न (त्वचा रोग नाशक) माना गया है।
• दाद
• खुजली
• फोड़े-फुंसी
• एक्ज़िमा
में इसके क्षीर या पत्तों का बाह्य प्रयोग किया जाता है। यह जीवाणुनाशक एवं शोथहर गुणों से युक्त होता है।

श्वसन तंत्र में मदार के लाभ
मदार कफ नाशक है, इसलिए—
• दमा
• खाँसी
• श्वास रोग
में इसका उपयोग आयुर्वेदिक चिकित्सक द्वारा सीमित मात्रा में किया जाता है। यह श्वसन नलिकाओं में जमे कफ को बाहर निकालने में सहायक होता है।

कृमिनाशक गुण
मदार को आयुर्वेद में एक प्रभावी कृमिघ्न औषधि माना गया है। इसके मूल एवं क्षीर का उपयोग आंतों के परजीवियों को नष्ट करने हेतु किया जाता है।

घाव एवं सूजन में उपयोग
मदार के पत्तों का लेप या रस बाह्य रूप से लगाने से—
• घाव शीघ्र भरते हैं
• सूजन कम होती है
• पीड़ा में राहत मिलती है
सुश्रुत संहिता में इसे व्रणशोधन एवं व्रणरोपण में सहायक बताया गया है।

आधुनिक शोध एवं आयुर्वेद
आधुनिक वैज्ञानिक शोधों में मदार में
• एंटी-इंफ्लेमेटरी
• एंटी-माइक्रोबियल
• एनाल्जेसिक
गुण पाए गए हैं, जो आयुर्वेदिक दावों की पुष्टि करते हैं। हालांकि, इसके विषाक्त प्रभावों के कारण स्व-उपचार की सिफ़ारिश नहीं की जाती।

सावधानियाँ (अत्यंत महत्वपूर्ण)
1. मदार विषैली प्रकृति की औषधि है, अतः बिना आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह के सेवन न करें।
2. इसका दूध (क्षीर) आँखों में जाने से गंभीर क्षति हो सकती है।
3. गर्भवती स्त्रियाँ और बच्चे इसका प्रयोग न करें।
4. अधिक मात्रा में सेवन से उल्टी, दस्त, चक्कर और विषाक्तता हो सकती है।
5. केवल शुद्धिकरण (शोधन) के बाद ही आंतरिक उपयोग करना चाहिए।

मदार/आक आयुर्वेद की एक अत्यंत प्रभावशाली औषधीय वनस्पति है, जो अनेक रोगों में लाभ प्रदान कर सकती है। इसके उष्ण, तीक्ष्ण और कफ-वात नाशक गुण इसे विशेष बनाते हैं। किंतु इसकी शक्तिशाली एवं विषैली प्रकृति के कारण इसका उपयोग केवल योग्य आयुर्वेदाचार्य के मार्गदर्शन में ही किया जाना चाहिए। सही ज्ञान, मात्रा और विधि से प्रयोग करने पर मदार आयुर्वेदिक चिकित्सा में एक अमूल्य औषधि सिद्ध हो सकता है।

डिस्क्लेमर
यह लेख सूचना और शैक्षणिक उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी औषधीय प्रयोग से पूर्व योग्य चिकित्सक या आयुर्वेदाचार्य की सलाह आवश्यक है।

Radha Singh
Radha Singh

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