जेपीएससी सिविल सेवा में उम्र सीमा पर बवाल: क्या बढ़ेगी आयु सीमा? विधानसभा तक पहुँचा मामला!
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संवाद 24 डेस्क। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) द्वारा झारखंड संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा — 2025 के लिए जारी अधिसूचना में उम्र सीमा के कट-ऑफ तिथि को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। यह मुद्दा केवल एक तकनीकी या प्रशासनिक परेशानी नहीं है, बल्कि हजारों अभ्यर्थियों के करियर, भावी योजनाओं और जीवन के निर्णयों पर सीधा प्रभाव डाल रहा है। इस विवाद की गूंज न केवल आम आदिवासी, पिछड़े और अनुसूचित जाति/जनजाति वर्गों के युवाओं के बीच सुनाई दे रही है बल्कि यह झारखंड विधानसभा तक पहुँच चुका है, जहाँ विधायकों ने इस बारे में गंभीर चिंताएँ जताई हैं।
जेपीएससी कौन है और क्यों महत्वपूर्ण है?
झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन (JPSC), संविधान की धारा 315 के अंतर्गत स्थापित एक संवैधानिक संस्था है, जिसका मुख्य उद्देश्य राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के लिए योग्य और उच्च गुणवत्ता वाले अधिकारियों का चयन करना है। यह राज्य के प्रशासनिक और पुलिस सेवाओं के लिए सिविल सेवा परीक्षा आयोजित करता है और उम्मीदवारों को विभिन्न प्रशासनिक पदों पर नियुक्त करता है।
ये पद केवल सरकारी नौकरियाँ नहीं हैं, बल्कि राज्य सरकार के नीति-निर्माण, शासन और विकास के लिए आवश्यक नेतृत्व की भूमिका निभाते हैं। इसी कारण, इन परीक्षाओं में भाग लेने वाले लाखों युवाओं के लिए यह अवसर अत्यंत मूल्यवान माना जाता है।
विवाद का मूल: उम्र सीमा और कट-ऑफ तिथि
जेपीएससी ने झारखंड संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा — 2025 (Advertisement No. 01/2026) के लिए आवेदन आमंत्रित करते समय उम्र सीमा के लिए कट-ऑफ तिथि को 01 अगस्त 2026 निर्धारित किया है। इसका अर्थ यह है कि उम्मीदवार की आयु का वास्तविक आधार इसी तिथि तक की गणना पर आधारित होगी।
हालाँकि, विवाद तब शुरू हुआ जब कई अभ्यर्थियों ने तर्क दिया कि यह तिथि असमान और अनुचित है। उनका कहना है कि इससे वे निष्कासित हो जाएंगे, जिनकी आयु पिछले मानकों या पुराने नियमों के अंतर्गत 2025 परीक्षा के लिए पात्र होती। वे चाहते हैं कि उम्र सीमा के कट-ऑफ को 01 अगस्त 2018 किया जाए — ताकि वे भी आवेदन कर सकें।
अभ्यर्थियों का यह तर्क इसलिए भी मजबूत लगता है क्योंकि पिछली परीक्षाओं में पुरानी तिथि के आधार पर ही उम्र गणना की जाती थी। इस नए नियम के कारण कई अनुभवी युवा जो बार-बार तैयारी कर रहे हैं उन्हें अब पात्रता से बाहर कर दिया गया है।
अभ्यर्थियों की आपत्तियाँ और तर्क
. अनियमित परीक्षा अनुसूची का प्रभाव
एक प्रमुख कारण यह है कि झारखंड सिविल सेवा परीक्षा का आयोजन नियमित नहीं हुआ है। राज्य गठन के बाद अब तक केवल आठ संयुक्त सिविल सेवा परीक्षाएँ आयोजित की गई हैं, जबकि 25 वर्षों में 25 परीक्षाएँ होनी चाहिए थीं। इस अनियमितता के कारण कई उम्मीदवारों की उम्र सीमा पहले से ही कट-ऑफ से अधिक हो चुकी है।
उम्मीदवारों का तर्क है कि यह JPSC की जिम्मेदारी थी कि वह नियमित रूप से परीक्षा आयोजित करे जिससे किसी भी अभ्यर्थी को अनुचित वंचित न होना पड़े।
. समान अवसर का अधिकार
विरोध कर रहे अभ्यर्थियों का मानना है कि नई तिथि 01 अगस्त 2026 के आधार पर आयु की गणना करना समान अवसर के सिद्धांत के विपरीत है। यह निर्णय अप्रत्याशित रूप से युवा उम्मीदवारों को परीक्षा में बैठने से रोकता है, खासकर उन लोगों को जो लगातार वर्षों से तैयारी कर रहे हैं और केवल कुछ महीनों के अंतर से पात्रता खो चुके हैं।
. कानूनी दलीलें
कुछ अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है जिसमें उन्होंने न्यायपालिका से अपेक्षा जताई है कि परीक्षा का कट-ऑफ तिथि संशोधित की जाए। अदालत ने इस मामले पर अंतरिम राहत प्रदान करते हुए कहीं-कहीं अभ्यर्थियों को आवेदन करने की अनुमति दी है, हालांकि पूर्ण निर्णय अभी लंबित है।
हाईकोर्ट का मध्यस्थता दृष्टिकोण
. अंतरिम राहत का आदेश
झारखंड हाईकोर्ट ने इस विवाद में फिलहाल 22 अभ्यर्थियों को अंतरिम राहत प्रदान की है। अदालत ने निर्देश दिया है कि संबंधित उम्मीदवार ऑफ़लाइन आवेदन कर सकते हैं लेकिन उनके परिणाम अदालत के अंतिम आदेश पर ही निर्भर करेंगे।
. आगे की सुनवाई
अगली सुनवाई करीब आठ सप्ताह बाद नियोजित है, जहाँ न्यायालय मामले के सभी पहलुओं, JPSC की नियमावली, अतीत के अभ्यास और समानता के आधार पर निर्णय करेगा।
यह दोनों पक्षों के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण है — जहां न्यायपालिका यह तय कर सकती है कि क्या राज्य और आयोग के द्वारा निर्धारित उम्र सीमा कट-ऑफ वैध, समान और न्यायसंगत है या नहीं।
विधानसभा में मुद्दा गूंजा
. विधायक द्वारा उठाया गया प्रश्न
यह विवाद अब सिर्फ अदालत या सोशल मीडिया पर ही सीमित नहीं रहा — यह झारखंड विधानसभा में भी गूंज चुका है। कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने कट-ऑफ तिथि संशोधन की मांग विधानसभा में उठाई। उनके साथ झामुमो के अमित कुमार और जेएलकेएम के जयराम महतो भी इस मुद्दे पर सहमत दिखे।
. दावा और चिन्ता
विधायकों ने कहाः यह मुद्दा सैकड़ों युवा उम्मीदवारों के जीवन और करियर को प्रभावित करता है। जो युवा शिक्षा और तैयारी में अपने समय, संसाधन और आशाओं को निवेश कर चुके हैं, वे अब अचानक इन नियमों के कारण इससे वंचित हो सकते हैं।
सरकार और आयोग की प्रतिक्रिया
. सरकार गंभीरता से विचार कर रही
झारखंड संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने इस विवाद पर कहा कि सरकार इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार कर रही है। उन्होंने यह भी बताया कि हाल ही में कैबिनेट स्तर पर इस विषय पर चर्चा हुई और सरकार जल्द ही सकारात्मक समाधान की दिशा में कदम उठाएगी।
. आयोग का रुख
JPSC ने आधिकारिक रूप से तिथि को 01 अगस्त 2026 के रूप में घोषित किया है, जिसकी वजह से आवेदन पात्रता सुनिश्चित की जा सके। आयोग ने यह भी कहा है कि नियमावली के अंतर्गत ही सभी निर्णय लिए गए हैं।
भर्ती पदों का विस्तृत विवरण
जेपीएससी के नवीनतम विज्ञापन के अनुसार, कुल 103 पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इन पदों की सूची इस प्रकार है:
पुलिस उपाधीक्षक (DSP) — 42 पद
उप समाहर्ता (Deputy Collector) — 28 पद
सहायक नगर आयुक्त — 10 पद
जिला जनसंपर्क पदाधिकारी — 10 पद
प्रोबेशन पदाधिकारी — 04 पद
सहायक निदेशक (समाज कल्याण) — 03 पद
जिला समादेष्टा, सहायक निबंधक और काराधीक्षक — 02-02 पद
यह भर्ती न केवल प्रशासनिक खातों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि राज्य के विकास, कानून व्यवस्था, सामाजिक कल्याण और जनसंपर्क जैसे क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता वाले अधिकारियों के चयन में भी योगदान करेगी।
विस्तृत उम्र सीमा और श्रेणियाँ
आयु सीमा के सम्बन्ध में आयोग द्वारा जारी मानदंड इस प्रकार हैं:
श्रेणी
अधिकतम आयु सीमा
अत्यंत पिछड़ा वर्ग / पिछड़ा वर्ग
37 वर्ष
महिला (UR / EBC / BC)
38 वर्ष
अनुसूचित जाति / जनजाति
40 वर्ष
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS)
35 वर्ष
PwBD
संबंधित श्रेणी में 10 वर्ष की छूट
पूर्व सैनिक
संबंधित श्रेणी में 5 वर्ष की छूट
यह नियम JPSC की परीक्षा प्रक्रिया के लिये निर्धारित किए गए हैं और इनका उद्देश्य सुनिश्चित करना है कि सभी वर्गों को सामाजिक न्याय के अनुरूप अवसर मिले।
विवाद के संभावित प्रभाव
. करियर पर प्रभाव
इस विवाद की मुख्य पीड़ा उन अभ्यर्थियों को हो रही है जिनके लिए करियर का यह अवसर शायद अंतिम मौका हो सकता था। कई युवा अभ्यर्थी अपनी पढ़ाई, तैयारी और आत्म-विश्वास के साथ वर्षों से इस परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में इन नियमों में बदलाव उन्हें मानसिक और आर्थिक दबाव में डाल रहा है।
. सामाजिक और राजनैतिक परिप्रेक्ष्य
युवाओं के बीच बढ़ती बेरोजगारी के बीच, यह विवाद सामाजिक रूप से भी गंभीर प्रश्न खड़ा करता है—क्या सरकारी संस्थाएं युवा और पिछड़े वर्गों के हितों के प्रति संवेदनशील हैं? क्या समान अवसर के मूल सिद्धांत का पालन किया जा रहा है?
न्याय, समानता और भविष्य की राह
जेपीएससी की उम्र सीमा विवाद एक सरल प्रशासनिक मुद्दा नहीं रहा — यह न्याय, समानता और शासन की पारदर्शिता की परीक्षा बन चुका है। अभ्यर्थियों की मांगें, कानूनी प्रक्रिया, विधानसभा में चर्चा और सरकार की प्रतिक्रिया मिलकर इस मुद्दे को एक जटिल लेकिन महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पर्यवेक्षण योग्य मामला बनाती हैं।
इस विवाद का निष्कर्ष न केवल प्रतियोगी परीक्षा के नियमों को प्रभावित करेगा, बल्कि राज्य में सरकारी चयन प्रक्रियाओं पर नागरिकों का विश्वास भी प्रभावित करेगा। न्यायपालिका और सरकार के अगले निर्णय पर सबकी निगाहें टिक गई हैं।






